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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने अरावली पर्वत श्रृंखला में की जमकर की तारीफ

Tue, 28 Jun 2016 03:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Tue, 28 Jun 2016 03:27 AM IST
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The Minister lauded praise on the Aravali mountain range
प्रकाश जावड़ेकर - फोटो : अमर उजाला

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडे़कर द्वारा अरावली पर्वत श्रंखला की खूबसूरती की तारीफ करने से मेवात के उन लोगों को जोर का झटका लग सकता है जो पिछले काफी समय से राजस्थान की तरह मेवात इलाके में भी अरावली पर्वत श्रंखला में खनन की मंजूरी की मांग करते आ रहे हैं।

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सोमवार को मेवात पहुंचे केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने हवाई सर्वे के बाद जब वे इलाके के प्रमुख लोगों और पत्रकारों से रूबरू हुऐ तो उन्होने अरावली पर्वत श्रंखला की खूबसूरती की जमकर तारीफ की और कहा कि अरावली का उन्होने राजस्थान तक सर्वे किया है।
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जो खूबसूरती देखी वह हर जगह नहीं मिलती है। केंद्रीय मंत्री के अरावली की केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने हवाई सर्वे के बाद जब वे इलाके के प्रमुख लोगों और पत्रकारों से रूबरू हुऐ तो उन्होने अरावली पर्वत श्रंखला की खूबसूरती की जमकर तारीफ की। इसके अलावा वन क्षेत्र बढाने और अरावली में सदियों से बह रहे कुदरति झरनों को मबजूत करने की जो बाद कही इससे साफ जाहिर  हैकि मेवात इलाके की अरावली पर्वत श्रंखला में किसी भी कीमत पर खनन को मंजूरी नहीं मिल सकती है।
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बता दें कि हरियाणा के गुड़गांव, फरीदाबाद, मेवात व राजस्थान के अलवर, भरतपुर और कामां इलाके में फैली अरावली पर्वत श्रृंखलाओं को मेवात के लोग काला पहाड़ के नाम से जानते हैं।

अरावली पर्वत श्रंखला को हरा भरा करने के लिये केंद्र सरकार ने वर्ष 1991-92 में करीब सौ करोड रूपये खर्च किये थे। उस योजना के तहत पहाड मे कीकर, धोक आदी के बीज डाले गये थे।

वो पैसा कहां गया इसका अंदाजा इसी बात से ही लगाया जा सकता है कि अरावली पहाड में कुछ काबली कीकरों के अलावा कोई पेड नजर नहीं आते हैं।
बरसात के मौसम में ही सर्वे क्यों?

जब भी देखा गया है, अरावली पर्वत श्रंखला का केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से केवल बरसत के मौसम में ही सर्वे क्यों किया जाता है। क्या ये सब कुछ सोची समझी चाल के तहत होता है। समाजसेवी रमजान चौधरी का कहना है कि अरावली पर्वत श्रंखला केवल चटियल मैदान है।

इस पहाड पर एक भी पुराना पेड नजर नहीं आता है। अब से दो महिने पहले के अगर वीडियों देखे जाये तो इस पहाड पर एक भी हरा पडे नजर नहीं आता है। बल्कि अब बरसात का मौसम चल रहा है। अब तो पहाड ही क्या विरान जंगल भी हरे भरे नजर आऐगें।

अरावली में खनन पर टूटा सपना
मेवात के लोग काफी समय से अरावली पर्वत श्रंखला पर केंद्र और राज्य सरकार से खन्न को मंजूरी की मांग करते आ रहे हैं।  वर्ष 2000 से पहले मेवात के पहाडों पर खनन की मंजूरी थी लेकिन पर्यावरण विभाग द्वारा अदालत में दरवाजा खटटाने के बाद काफी समय से मेवात में खन्न पर रोक लगी हुई है। करीब 15 साल पहले मेवात के करीब 80 फीसदी लोगों की रोजी रोटी मेवात के खन्न से होती थी लेकिन अब मेवात के मजदूरों ने अपना रूख राजस्थान की तरफ लिया है।


अवैध निर्माणों पर गिर सकती है गाज
केंद्रीय मंत्री द्वारा अरावली पर्वत श्रंखला का वन क्षेत्र बढाये जाने की घोषणा से पिछले काफी समय से धर्म और जाति के नाम पर या फिर अपनी ऊचे रसूखातों के चलते अब तब अरावली के काफी क्षेत्र पर लोगों ने पक्के मकान, मंदिर, मजिस्द यहां तक की रिसोर्ट, होडल जैसी संस्थान खोलकर अवैध कब्जा कर रखा है। केंद्रीय मंत्री के इस आदेश से ऐसे लोगों पर नकेल लगनी संभव है।

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