कोर्ट ने सरकार से किया सवाल, पूछा ट्रांसजेंडरों के नाम परिवर्तन में क्या है परेशानी
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केंद्र सरकार ने ट्रांसजेंडरों के नाम सरकारी रिकॉर्ड में बदलने में असमर्थता जताई है। सरकार ने कहा कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि लिंग परिवर्तन के बाद नाम परिवर्तन कर दिया जाए।
हाईकोर्ट ने इस जवाब पर नाराजगी जताते हुए सरकार से पूछा कि आखिर ट्रांसजेंडरों के सरकारी रिकार्ड में नाम परिवर्तन करने में परेशानी क्या है। न्यायमूर्ति संजीव सचदेव के समक्ष दोनों ट्रांसजेंडरों ने अलग-अलग याचिका दायर कर सरकारी रिकॉर्ड में अपना नाम परिवर्तन करवाने की मांग की है।
अदालत ने सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय को शपथपत्र सहित स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि इस मुद्दे पर क्या कोई नियम है या नहीं। इसके लिए गजट में क्या प्रावधान है।
अदालत ने कहा कि कागज में लिंग परिवर्तन अलग बात है, यहां केवल नाम बदलने का मसला है। दोनों ने अदालत से इस बारे में जवाब दायर करने के लिए समय मांगा। जिसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 4 अक्टूबर की तारीख तय कर दी।
'लैंगिक पहचान के चलते किया जा रहा है भेदभाव'
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील मोनिका अरोड़ा ने अदालत को बताया कि राइटस ऑफ ट्रांसजेंडर बिल विगत 2 अगस्त को संसद में पेश कर दिया गया है। जिसमें दोनों याचिकाकर्ताओं के लिए समाधान है।
पेश मामले में याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उसकी लैंगिक पहचान के चलते उसके साथ भेदभाव किया जा रहा है। याची ने अदालत को बताया कि उसकी सेक्सुअल रीअसाइंगमेंट सर्जरी चल रही है।
याची का दावा है कि 19 वर्ष की उम्र से वह महिला की तरह रह रही है। उसके कपड़े, आवाज व रहन-सहन महिला की तरह है। लेकिन उसके पूर्व के सरकारी कागज व अन्य पहचान पत्रों में उनकी पुरानी फोटो व लिंग दर्शाता है।
जिससे सोसायटी में उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। ऐसे में उन्होंने मंत्रालय व नियंत्रक कार्यालय से सरकारी कागज में अपना नाम व लिंग परिवर्तन के लिए अर्जी दाखिल की, लेकिन उसका नाम परिवर्तन नहीं किया गया।