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कोर्ट ने पत्नी से अप्राकृतिक कृत्य संबंधी रेप कानून पर मंत्रालय को किया तलब

Thu, 21 Jul 2016 10:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 21 Jul 2016 10:26 AM IST
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The Court of unnatural acts wife rape law ministry summons
कोर्ट

पत्नी से अप्राकृतिक कृत्य के मामले को लेकर बलात्कार कानून में संशोधन में विसंगतियों को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। अदालत ने इस मुद्दे पर कानून एवं न्याय मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

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याचिका में ऐसे पति को संरक्षण प्रदान करने की मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ के समक्ष दायर याचिका में तर्क रखा गया है कि वर्ष 2013 में धारा 375 (बलात्कार) में किया गया संशोधन गलत है। 
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इतना ही नहीं भारतीय दंड संहिता की धारा 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध) भी असंगत है। अदालत ने इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार को भी जवाब दाखिल करने को कहा है।

याचिका में कानूनी समस्या का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि धारा 375 में अनिश्चितता है और यह अपवाद है कि संभोग या अपनी पत्नी के साथ एक आदमी द्वारा यौन कृत्य तब तक बलात्कार नहीं है जब तक उसकी आयु 15 वर्ष से कम न हो।

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याचिकाकर्ता पर पत्नी से अप्राकृतिक कृत्य करने का आरोप

The Court of unnatural acts wife rape law ministry summons
कोर्ट, कंज्यूमर फोरम - फोटो : फाइल फोटो

याचिका में कहा गया है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 377 व 375 में अलग व्याख्या की गई है। याची ने कहा कि धारा 377 में दंडनीय अपराध है जबकि धारा 375 में पति द्वारा किया गया संभोग दंडनीय नहीं है।

उन्होंने कहा कि संशोधन में किए गए प्रावधान पति-पत्नी के संबंधित अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। अदालत ने मामले की सुनवाई 29 अगस्त तय की है। याचिकाकर्ता  पर अपनी पत्नी से अप्राकृतिक कृत्य करने का आरोप है। याची ने कहा कि उसे धारा 375 के तहत संरक्षण प्राप्त है जबकि उसे धारा 377
में आरोपी बनाया गया है। 

याची की 20 वर्षीय पत्नी ने उस पर रेप व अप्राकृतिक कृत्य करने का आरोप लगाया था। ट्रायल कोर्ट ने उसे रेप के आरोप से बरी कर दिया था लेकिन अपनी पत्नी के साथ अप्राकृतिक सेक्स करने का आरोप पर मुकदमा चलाने का निर्देश दिया था। याची को वर्ष 2015 में हाईकोर्ट ने जमानत प्रदान कर दी थी। 

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