नए नोटों के लिए 10 किलोमीटर लंबी दौड़, 50 हजार आबादी पर सिर्फ एक बैंक
-ग्रीन फील्ड के आसपास की 50 हजार आबादी पर एक निजी बैंक
नोटों के लिए 10 किलोमीटर लंबी दौड़
-ग्रीन फील्ड के आसपास की 50 हजार आबादी पर एक निजी बैंक
-नोटबंदी के बाद इकलौते एटीएम में आज तक नहीं आया कैश
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नोटबंदी की मार झेल रहे लोगों की समस्या कम होने की जगह बढ़ती जा रही है। 36 दिन बाद भी बैंकों और एटीएम के बाहर लंबी कतारें कायम हैं। शहर की एक कॉलोनी ऐसी भी है जहां नोटों के लिए हजारों लोगों को कुछ ज्यादा ही जद्दोजहद करनी पड़ रही है। यहां कैश के लिए लोग 10 किलोमीटर लंबी दूरी नापने को मजबूर हैं।
अरावली की वादियों में स्थित ग्रीन फील्ड कॉलोनी में सिर्फ एक निजी बैंक है। उस बैंक के बाहर रोजाना सैंकडों लोग कैश लेने के लिए कतारों में लगते हैं, लेकिन कई घटें लाइन में खडे होने के बावजूद लोगों को कैश नही मिलता।
इसी कारण कॉलोनी के लोगों को कैश के लिए दर-दर भटकाना पड़ रहा है। कॉलोनी के लोग कैश लेने के दिल्ली या फिर एनआईटी की तरफ रुख करते हैं, लेकिन यहां भी कैश मिले, इसकी कोई गारंटी नहीं।
50 हजार की आबादी, बैंक सिर्फ एक
ग्रीन फील्ड कॉलोनी और उसके पास के क्षेत्रों में 50 हजार से ज्यादा आबादी है। ग्रीन फील्ड कॉलोनी में 15 हजार के करीब लोग रहते है, अंनगपुर गांव में भी 15 हजार की आबादी है। कॉलोनी के साथ बसे दयालनगर और ओमेक्स ग्रीन सोसायटी तकरीबन 20 हजार की आबादी है।
ऐसे में इतनी आबादी वाले क्षेत्र में सिर्फ एक निजी बैंक है। इसी परेशानी से निपटने के लिए लोग रोजाना सुबह या फिर देर रात को दिल्ली और एनआईटी के बैकों व एटीएमों के बाहर लाइन में लग कर कैश निकालने के जुगत में रहते हैं।
एटीएम और बैंक से पर्याप्त पैसा न मिलने के कारण कॉलोनी के 5000 से ज्यादा परिवार परेशानियों से जूझ रहे हैं। कॉलोनी में ज्यादातर लोग नौकरीपेशा हैं । जिनको सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है।
परिवारों को नौकरानी,दूध वाले और पानी के टैंकर का समय पर भुगतान नहीं हो पा रहा है। ज्यादातर लोगों का दो महीने का बकाया हो गया है। कॉलोनी की मार्केट में 125 से ज्यादा दुकाने है। --विरेन्द्र भड़ाना, प्रधान ग्रीन फिल्ड कॉलोनी