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दूसरों का करियर बनाने वालों का खुद का भविष्य अंधकार में
मनोज कुमार/अमर उजाला, नोएडा
Updated Mon, 05 Sep 2016 10:05 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
पूर्व राष्ट्रपति डॉ.सर्वपल्ली राधा कृष्णन ने शिक्षक को राष्ट्र का निर्माता कहा था। गुरू बच्चों को शिक्षित करते हैं और वहीं भविष्य के राष्ट्र निर्माता होते हैं। मगर इस बात के मायके बदल गए हैं।
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जो शिक्षक दूसरों का भविष्य बनाते हैं अब उनका खुद भविष्य अंधकार में हैं। इसका जीता जागता उदाहरण एकेटीयू के संबंद्घ कॉलेजों से से निकाले गए करीब 600 शिक्षक हैं। जिनको निजी कॉलेजों ने बिना नोटिस दिए ही बाहर का रास्ता दिखा दिया।
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दरअसल, एकेटीयू की ओर से साल 2015 में प्रदेशभर के सभी संबंद्घ कॉलेजों को एक शासनादेश भेजकर (संख्या 6939/2015 में) कहा गया था कि जिस गुरू को कॉलेज में बच्चों का भविष्य बनाने के लिए रख रहे हैं।
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उन पर पूरा भरोसा करें। अगर शिक्षक को नौकरी से हटाना पड़े तो कॉलेज कम से कम उन्हें तीन माह का नोटिस देकर ही ऐसी कार्रवाई करें। उसका भी संस्थान को कारण बताना होगा। अकारण ही नौकरी से निकालने की कार्रवाई करने से साफ इंकार किया गया था।
मगर अब प्रदेश भर के इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट ही यूनिवर्सिटी के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। साल-2016-2017 के शैक्षिक सत्र में कॉलेजों ने यूनिवर्सिटी से अपनी समबंद्घता और नवीनीकरण के समय कॉलेज के शिक्षकों को अहम बताते हुए तारणहार बताया था।
मगर जब उन्हें समबद्घता मिल गई तो तारणहार शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इसी शैक्षिक सत्र में पूरे प्रदेश में करीब 50 शिक्षण संस्थानों की ओर से 600 शिक्षकों को बिना नोटिस दिए ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इससे पता चलता है कि दूसरों का भविष्य संवारने वालों का कल कितना अंधकार में हैं।
जिन कॉलेजों ने शिक्षकों को अकारण ही बाहर का रास्ता दिखाया है वह काफी निदंनीय और दुखद है। सभी कॉलेजों को नोटिस भेजकर कहा गया है जिन शिक्षकों को अकारण ही निकाला गया है उनका जवाब तीन माह में कारण सहित दिया जाए।
यदि जांच में पाया गया कि उनको निकालने के पीछे को वाजिब कारण नहीं है तो संबंधित कॉलेज पर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए शिक्षकों से भी लिखित में जवाब लिया जाएगा। जिससे आधार तैयार किया जा सकेगा।-प्रोफेसर विनय कुमार पाठक वाइस चांसलर एकेटीयू
शिक्षकों की कुछ मुख्य समस्याएं
-निजी यूनिवर्सिटी और निजी कॉलेजों में शिक्षकों को नौकरी से कभी भी निकाल दिया जाता है
-नौकरी देते समय वेतन अधिक बताया जाता है लेकिन उसके बाद नकद राशि शिक्षकों से वापस ले ली जाती है।
-राजकीय अवकाश पर भी शिक्षकों को कॉलेज बुलाकर काम कराया जाता है।
-कोई भी सालाना इंक्रीमेंट नहीं दिया जाता है
-नौकरी देने से पहले ही स्तीफा पर हस्ताक्षर तक करा लिए जाते हैं
इनसे सीख ले समाज.........
537 बच्चों को शिक्षा दिला रहे जिलाधिकारी
जिलाधिकारी एनपी सिंह आदिवासी क्षेत्रों में जाकर हाईस्कूल-इंटरपास करीब 150 छात्रों को हर साल आईटीआई में दाखिला दिलाते हैं। बावरिया समाज के बच्चों का दाखिला स्कूलों में कराते हैं। आज बावरिया जाति के 51 बच्चे आईटीआई और पॉलटैनिक कर रहे हैं।
बावरिया समाज की छात्रा रेनू बीए ऑनर्स डीयू के नार्थ कैंपस मिरांडा हाऊस से पढ़ाई कर रही है। इसके अलावा शामली-मुजफ्फरनगर के दंगा पीड़ित 65 छात्र-छात्राओं को शिक्षा दिलाने का काम कर रहे हैं और अपने क्षेत्र बनारस में भी करीब 250 बच्चों को पढ़ाई करा रहे हैं।
वह अपनी खेती का अधिकांश हिस्सा और उनकी चाची की खेती का बड़ा हिस्सा पढ़ाई पर खर्च करते हैं। इस कार्य में उनके कुछ मित्र और समाजसेवी भी सहयोग करते हैं। गौतमबुद्घनगर में रेप पीड़िता समेत 21 बच्चों को उन्होंने पढ़ाई करा रहे हैं।
सेवा निवृत होने के बाद समाज के लिए दिया
नोएडा सेक्टर-50 निवासी बीपी गुप्ता (72) स्टेट बैंक से रिटायर होने के बाद समाज के लिए कुछ करने का मन हुआ। जिसमें उन्होंने साल-2008 में गरीब बच्चों को पार्क में पेड़ के नीचे पढ़ाना शुरू किया था।
बी पी गुप्ता ने बताया कि कई साल तक बच्चों को पढ़ाया तो संख्या बढ़ने लगी। जिसको आगे बढ़ाने के लिए सेक्टर की आरडब्ल्यूए से मद्द मांगी तो उनकी ओर से एक कमरा मुहैया कराया गया जिसमें बच्चों को बैठाने के लिए भी संसाधन मिले।
कक्षा पांच तक वह सभी विषयों को पढ़ाते हैं और उसकेबाद बच्चों का सरकारी स्कूल में दाखिला करा देते हैं। सेक्टर के कुछ और लोग भी अब बच्चों को पढ़ाने के लिए आने लगे हैं। हम सब मिलकर गरीब बच्चों का भविष्य संवारने का प्रयास कर रहे हैं।
प्रिंसिपल को मिला बेस्ट स्टेट अवॉर्ड
नोएडा समरविल स्कूल की प्रिंसिपल को बेस्ट स्टे्ट अवॉर्ड मिल चुका है। स्कूल की प्राचार्या एमएन अरुलराज को यह अवॉर्ड यूपी-उत्तराखंड से नवाजा गया था। इस व्यवहार की वजह से यह सभी छात्रों की चहेती हैं।
स्कूल की प्रिंसिपल एमएन अरुलराज ने बताया कि शिक्षकों का कर्तव्य बच्चों का भविष्य संवारना हैं। उन्हें अपने इस काम प्राथमिकता के साथ करना चाहिए।
300 से अधिक बच्चों को निशुल्क पढ़ा रही आरपी ऊषा
ग्रेनो के गामा दो निवासी आर.के.ऊषा(अधिवक्ता) सात मार्च 2011 से अपने घर में काम करने वाली महिला के दो बच्चों को पढ़ाना शुरू किया था। आज वह अलग-अलग ग्रीन बेल्टों में चार सेंटर चला रही हैं।
इनमें करीब 300 बच्चे हैं। सुबह से शाम तक पढ़ाई का ही कार्यक्रम रहता है। उनके द्वारा 22 बच्चों का अच्छे स्कूल में भी दाखिला दिलवाया है और ऐसे हरेक बच्चे के लिए एक सामाजिक व्यक्ति तलाश किया है जो एक बच्चे का खर्च वहन करते हैं।
पर्यावरण और छात्रहित में करते हैं कार्य
ग्रेनो वेस्ट के श्रीसंत विनोवा इंटर कॉलेज के प्राचार्य तेजपाल सिंह नागर को वर्ष 2012 में माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षा निदेशक बासुदेव यादव द्वारा सम्मानित किया गया था। उन्होंने अपने कॉलेज में छात्रों को हाइटैक बनाने के लिए लेपटॉप प्रयोगशाला की स्थापना कराई।
इसलिए उनके अध्यापन कार्य एवं विद्यालय का विकास करने, छात्रों को पर्यावरण और पौधारोपण के लिए एंव कर्मचारियों, छात्रों और अभिभावकों के प्रति सराहनीय व्यवहार के लिए पुरस्कृत किया गया था। वह लगातार छात्रहित और पर्यावरणहित में कार्य कर रहे हैं।
सेवानिवृत्त के बाद गरीब बच्चों को पढ़ा रही
सेक्टर-51 के केंद्रीय विहार निवासी एम.सचदेवा साल 2013 में सरकारी जॉब से रिटायर्ड होकर सेक्टर-37 में गरीब बच्चों के स्कूल में जाकर पढ़ाती है। अपनी पेंशन का एक हिस्सा भी वह उन्हीं बच्चाें पर खर्च करती हैं। तीन साल से वह इसी अभियान में लगी हैं।