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सुरेंद्र कोली को याद आए गीता-गांधी
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Thu, 30 Oct 2014 12:55 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट से रिव्यू पिटीशन खारिज होने के साथ ही सुरेंद्र कोली के चेहरे पर मौत का खौफ एक बार फिर दिखने लगा है। जेल सूत्रों की मानें तो कोली ने खाना-पीना कम कर दिया है।
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बुधवार रात को वह हाई सिक्योरिटी बैरक में गीता और महात्मा गांधी की आत्मकथा पढ़ता रहा। बता दें कि विगत 16 अक्तूबर को ही कोली ने जेल अधीक्षक को पत्र केमाध्यम से फांसी के बाद न केवल अंगदान की इच्छा जताई थी, बल्कि भगवत गीता और महात्मा गांधी की आत्मकथा पढ़ने के लिए मांगी थी।
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उधर, बुधवार को निठारी कांड के ही एक अन्य मामले में कोली को कोर्ट में पेश किया गया। न्यायाधीश के ट्रेनिंग पर जाने के चलते मामले में सुनवाई अब 3 नवंबर तक टल गई है। करीब 15 मिनट तक कोली कोर्ट में रहा। इस दौरान वह गुमसुम रहा।
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कोली को बचाने की कोशिश
रिव्यू पिटीशन खारिज होने के बाद कोली को फांसी के फंदे से बचाने की कोशिशे जारी हैं। बृहस्पतिवार को दिल्ली और गाजियाबाद के कुछ अधिवक्ता डासना जेल पहुंचकर कोली से वकालतनामे पर हस्ताक्षर करा सकते हैं।
इसके बाद ही कार्रवाई शुरू की जाएगी। पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिव राइट्स नामक संस्था से जुडे़ गाजियाबाद में सुरेंद्र कोली के अधिवक्ता विक्रांत शर्मा ने पुष्टि करते हुए बताया कि उनकी संस्था के लोग ही कोली को फांसी से बचाने के लिए प्रयासरत हैं।
संस्था से जुडे़ पदाधिकारियों का मानना है कि कोली गरीब है और उसे गलत फंसाया जा रहा है। इसी के चलते संस्था मदद करना चाहती है।
ओबामा को पत्र लिख न्याय की गुहार की
सुरेंद्र कोली ने मेरठ जेल से देश के राष्ट्रपति, गृहमंत्री के अलावा अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा, अमेरिकी न्यूज चैनल वाइस ऑफ अमेरिका, बीबीसी आदि संस्थानों को पत्र लिखकर न्याय दिलाने की गुहार लगाई है। 14 मार्च 14 को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भेज पत्र में कोली ने कहा कि मुख्य दोषी मोनिंदर को बचाया गया, जबकि उसे दोषी ठहरा दिया गया है।
मां ने मिलने की इच्छा की जाहिर
फांसी की पुनर्विचार याचिका खारिज पर कोली की मां कुंती देवी ने खाना नहीं खाया। बुधवार देर शाम कुंती ने जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत से दूरभाष पर वार्ता कर बेटे से मिलाने की गुजारिश की। श्री रावत गुरुवार की सुबह कुंती को बेटे से मिलाने डासना जेल के लिए रवाना होंगे।