दिवाली पर पटाखे तो जलेंगे पर नहीं चलेगी मनमानी, सुप्रीम कोर्ट से सिर्फ 'ग्रीन पटाखों' की अनुमति
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सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली पर पटाखे जलाने की अनुमति दे दी है, लेकिन पर्यावरण को देखते हुए कुछ बंदिशें भी लगा दी हैं। पटाखा कारोबारियों ने पहले ही पटाखे तैयार कर लिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने कम आवाज और कम प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे जलाने की ही अनुमति दी है, जिनमें केमिकल की मात्रा भी न के बराबर ही होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण के खराब होते हालात को देखते हुए दिवाली पर पटाखे जलाने का लोगों को तोहफा दे दिया है। मालूम हो कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा और दादरी-दनकौर समेत क्षेत्र के काफी पटाखा कारोबारियों ने 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक के ऑर्डर तैयार करा लिए हैं।
कुछ व्यापारियों ने तो उनको अपने-अपने गोदाम में भी रखवा लिया है। पटाखा कारोबारी विरेश कुमार ने बताया कि करीब 70 लाख रुपये के पटाखे के ऑर्डर दे दिए थे और करीब 15 लाख रुपये बतौर पेशगी के पहुंचा दिए गए हैं। अब वह पटाखों का आर्डर नहीं लेंगे, तो 15 लाख रुपये मर जाएंगे। यदि पटाखों का ऑर्डर लिया, तो 70 लाख रुपये का नुकसान हो जाएगा। इस स्थिति में उनको नुकसान सहना पड़ सकता है।
बेहद कम मात्रा में हो केमिकल
जानकारों की मानें तो इस बार सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखे यानी बेहद कम प्रदूषण फैलाने वाले और कम आवाज के पटाखों को जलाने की अनुमति दी है। इन पटाखों में केमिकल का प्रयोग बेहद कम मात्रा में किया जाना जरूरी है। इससे दिवाली भी मनेगी और पटाखे जलाने की इच्छा भी पूरी हो जाएगी।
क्या हैं ग्रीन पटाखे?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में पर्यावरण के अनुकूल पटाखों का जिक्र किया है। जिसे ईको फ्रेंडली या ग्रीन पटाखे नाम दिया गया है। केंद्रीय विज्ञान एवं पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन ने विज्ञान एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) को इनकी तकनीक बनाने का निर्देश दिया था। पटाखों में कागज का इस्तेमाल जहरीला धुआं पैदा करता है वहीं इनमें इस्तेमाल बेरियम और स्ट्रांटियम जैसी धातु स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती हैं। प्रदूषण फैलाने वाले रसायन परचोरेलेट की जगह नाइट्रोसेलुलोज का इस्तेमाल भी बेहतर रहेगा। कोर्ट का कहना है कि ग्रीन पटाखों का मतलब कम धुएं, कम आवाज और घातक रसायनों के न होने से है।
संभव नहीं हैं ग्रीन पटाखे
पटाखों के निर्माण के बड़े केंद्र तमिलनाडु के शिवकाशी में पटाखा निर्माताओं की संस्था का कहना है कि वे सुप्रीम कोर्ट के केवल ग्रीन पटाखों की अनुमति के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे। तमिलनाडु फायरवर्क्स एसोसिएशन का कहना है कि ग्रीन पटाखों जैसा कुछ नहीं होता। संस्था ने कहा कि हम पटाखों में रसायन का इस्तेमाल कम कर सकते हैं पर ग्रीन पटाखे कैसे बनेंगे इस बारे में हमें कुछ भी पता नहीं है।
‘घाटा उठाने वाले व्यापारियों को ही दिया जाए लाइसेंस’
पटाखा व्यापारियों का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को सिटी मजिस्ट्रेट शैलेंद्र मिश्रा से मिला। उन्होंने मांग की कि पिछले साल पूरी प्रक्रिया और फीस जमा करने के बावजूद उनको लाइसेंस नहीं दिया गया था, जिससे उनका पूरा ऑर्डर आज भी घरों में रखा है, इसलिए पुराने व्यापारियों को ड्रॉ करके पटाखे का लाइसेंस दिया जाए। दरअसल, पिछले साल प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए दिवाली के अंतिम समय में जिला प्रशासन ने कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए लाइसेंस नहीं दिए थे।
इससे व्यापारियों के लाखों रुपये के ऑर्डर खराब हो गए थे और कुछ ने लाइसेंस की फीस भी जमा करा दी थी। इस मौके पर कपिल, कैलाश, अमित वर्मा और विनोद आदि मौजूद रहे। उधर, सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि अभी सुप्रीम कोर्ट ने किस तरह का आदेश दिया है उसकी जानकारी नहीं है। पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अध्ययन किया जाएगा। उसके बाद जिलाधिकारी से इस संबंध में निर्देश प्राप्त किए जाएंगे। उसके बाद ही वह किसी तरह का आश्वासन देंगे।
उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार ही पटाखे जलाने दिए जाएंगे। अगर कोई व्यक्ति आदेश का उल्लंघन करेगा तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। किसी को कोर्ट के आदेश की अवहेलना नहीं करने दी जाएगी। -बीएन सिंह, जिलाधिकारी