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ई-रिक्शा पर पहली से स्नातक स्तर की पढ़ाई

Sun, 22 Feb 2015 08:25 AM IST
Updated Sun, 22 Feb 2015 08:25 AM IST
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 Study on E-Rickshaw delhi

आपने ई-रिक्शा पर लोगों को सवारी करते तो देखा होगा,  लेकिन उस पर बने क्लासरूम के जरिए पढ़ाई कराने की बात नहीं सुनी होगी। जी हां ऐसी ही एक क्लास बीते दो माह से चल रही है। जिस पर प्रतिदिन दो घंटे बच्चे गणित, केमिस्ट्री व कंप्यूटर की बारीकियां सीखते हैं।

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महाराजा अग्रसेन कॉलेज (एमएसी) के छात्रों व शिक्षकों ने इनोवेशन प्रोजेक्ट ज्ञान गुल्लक के तहत ऐसा ही एक रिक्शे पर क्लास रूम को तैयार किया है। इस क्लास रूम को एडु-पाथ का नाम दिया गया है। इस क्लासरूम केलिए कहीं जाने की जरूरत नहीं बल्कि यह खुद बच्चों के पास पहुंच जाती है।
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ज्ञान गुल्लक इनोवेशन प्रोजेक्ट के कॉर्डिनेटर डॉ. अमित पुंडीर ने बताया कि स्लम इलाकों में बच्चों को शिक्षित करने के लिए रिक्शे पर स्कूल को तैयार किया गया है। इस रिक्शे की खास बात यह है कि इस पर ही मैथ लैब की व्यवस्था है।

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इनोवेशन प्रोजेक्ट ज्ञान गुल्लक का हिस्सा

 Study on E-Rickshaw delhi

इसके साथ ही इसे फिजिक्स लैब, इलेक्ट्रानिक लैब, इंगिल्श लैब भी बना सकते हैं, क्विज फास्टेस फर्स्ट फिंगर खेला जा सकता है, व टाइम मैनेजमेंट की पढ़ाई भी हो सकती है। इसकेसाथ ही बेसिक साइंस की पढ़ाई कराने के लिए भी लाभदायक है। बच्चों केटाइम टेबल केहिसाब से एक ही रिक्शे केजरिए पढ़ाई कराई जाती है। मोबाइल क्लासरुम पर लैपटॉप भी फिट किए गए हैं, जिससे पढ़ाई काफी सुगम हो जाती है।

इस पर व्हाइट बोर्ड की व्यवस्था भी है जिससे यदि प्रोजेक्टर केजरिए कुछ पढ़ाना है तो वह भी इस पर ही संभव हो जाता है। इस तरह से इस रिक्शे क्लासरुम पर कक्षा पहली से अंडरग्रेजुएट स्तर तक की पढ़ाई हो सकती है। इस एडु रथ पर लैपटॉप भी फिट किए गए हैं। एडु-रथ थ्यौरी की पढ़ाई के लिए 15 फीट चौड़े क्लासरूम में परिवर्तित हो जाता है।

एडु-रथ दल्लुपुरा के बच्चों को दे रहा शिक्षा

 Study on E-Rickshaw delhi

प्रोजेक्ट कोर्डिनेटर डॉ पुंडीर ने बताया कि इस एडु-रथ को कॉलेज के आसपास के इलाके दल्लुपुरा में लेकर जाया जाता है। जिसके साथ दो शिक्षक, चार छात्र व कोर्डिनेटर जाते हैं। इसके जरिए वहां के40 बच्चों को प्रतिदिन दो घंटे 3.30 बजे 5.30 बजे तक बीते दो माह से शिक्षित किया जा रहा है। बच्चे भी इस तरह से पढ़ाई करके बोरियत महसूस नहीं करते हैं।

इस ज्ञान गुल्लक प्रोजेक्ट से जुड़े शिक्षक व छात्रों केघर से अखबार की रद्दी एकत्र की जाती है। कई किलो रद्दी को बेचने से हर माह 7 से 8 हजार रुपये एकत्रित हो जाते हैं। जिसके जरिए इसके जरिए पढ़ने वाले बच्चों के लिए स्टेशनरी जैसे नोट पैड, पेंसिल, कॉपी का इतंजाम हो जाता है।

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