कथित रूप से सामूहिक मोक्ष प्राप्त करने की आस में बुराड़ी के एक घर में परिवार के 11 लोगों ने फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी। सामूहिक खुदकुशी की इस घटना के बाद इस मकान के सामने से गुजरने से भी लोग डरने लगे थे। लेकिन तमाम अफवाहों के बाद मोहन सिंह कश्यप और उनके परिवार ने इस मिथ को तोड़ दिया।
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बुराड़ी का वो घर..
- फोटो : Amar Ujala
पूजा-अनुष्ठान के बाद मोहन परिवार के साथ इस मकान में रहने लगे। लोगों ने उनको डराने की खूब कोशिश की। यहां तक कहा गया जो भी इस मकान में रहेगा वह बर्बाद हो जाएगा, लेकिन मोहन अडिग रहे और इन अफवाहों पर ध्यान नहीं दिया। लगातार छह माह से रहते हुए उनको किसी डर या परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। मकान मालिक दिनेश चुंडावत भी मोहन के रहने से बेहद खुश हैं।
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मूलरूप से गांव धनेली-पूूर्बी, मिलक, रामपुर, यूपी के रहने वाले मोहन बताते हैं, करीब तीस साल पहले वह दिल्ली आए थे। परिवार में पत्नी कृष्णा सिंह, दो बेटी माल्या (12), मेध्या (5) और बेटा ध्रुव (8) है। बुराड़ी सामूहिक खुदकुशी से पूर्व मोहन, खुदकुशी करने वाले ललित और भावनेश की ही गली में वीरेंद्र त्यागी के मकान में ध्रुव डायग्नोस्टिक सेंटर चलाते थे। वारदात के बाद इस गली से भी गुजरने से लोग डरते थे।
महिलाएं और बच्चे तो यहां बिल्कुल नहीं आते थे। ललित और भावनेश के मकान को मनहूस माना जाने लगा। यहां तक अकेले बचे ललित और भावनेश के भाई दिनेश चुंडावत मकान बेचने की बात करने लगे। मोहन ने मकान किराए पर लेने की बात अपनी पत्नी से की। पत्नी पहले तो घबराई, लेकिन बाद में तैयार हो गई। दरअसल मोहन का बेटा ध्रुव और बेटी माल्या ललित की भांजी प्रियंका से ट्यूशन पढ़ने जाते थे।
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सब होने के बाद 28 दिसंबर 2019 को मोहन परिवार समेत इस घर में शिफ्ट कर गए। ललित की लकड़ी की दुकान में मोहन ने अपने बेटे ध्रुव के नाम से डायग्नोस्टिक सेंटर (पैथ लैब) खोल लिया जबकि भावनेश की परचून की दुकान में मोहन की पत्नी कृष्णा ने दुकान खोल ली। मोहन और उनकी पत्नी कृष्णा बताती हैं कि आज तक उनके परिवार को मकान में कभी कोई परेशानी नहीं हुई। मकान में हादसा तो जरूर हुआ, लेकिन वह किसी भी अंधविश्वास को नहीं मानते हैं।
पड़ोसी बोले, मोहन ने लोगों के दिलों से निकाला डर
पड़ोसी वीरेंद्र त्यागी बताते हैं कि घटना के बाद से लोग बुरी तरह डर गए थे। लेकिन मोहन ने हिम्मत दिखाकर इस मकान में रहकर लोगों के दिलों से डर निकाल दिया है। अब न तो कोई इस मकान के सामने से निकलने से डरता है और न ही किसी को कोई परछाई दिखाई देता है।
ऐसे हादसों के बाद अक्सर लोग जानबूझकर अफवाहें फैलाते हैं। मकान मालिक दिनेश चुंडावत चूंकि कोटा, राजस्थान में रहते हैं, इसलिए वह अपना मकान बेचना चाहते हैं। लेकिन वह मकान की कीमत मार्केट रेट से ज्यादा मांग रहे हैं, इसलिए मकान का सौदा नहीं हो पा रहा है।