फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Faridabad News ›   Stockman are relying on foreign cows, only 10 per cent of native cow

खुशखबरी : देसी गाय खरीदने पर मिलेगी 50 फीसदी की छूट

Thu, 23 Jun 2016 12:34 PM IST
गौरव चौधरी/अमर उजाला, फरीदाबाद
गौरव चौधरी/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Thu, 23 Jun 2016 12:34 PM IST
विज्ञापन
Stockman are relying on foreign cows, only 10 per cent of native cow
cow

प्रदेश में देशी और शाहीवाल नस्ल की गायों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। जिस पर सरकार और विभाग ने चिंता जताई है। प्रदेश की देशी और शाहीवाल नस्ल की गाय विलुप्त होने की स्थिति में है।

विज्ञापन


ऐसे में नसरकार पशुपालकों का रूझान देशी नस्ल की गायों की तरफ बढ़ाने के लिए गौ संरक्षण एवं संर्वधन योजना की शुरूआत की गई है।इस योजना के तहत पशुपालक को देशी नस्ल की गाय खरीदने पर 50 प्रतिशत की सब्सिडी विभाग की ओर से दी जाएगी। योजना को शुरू हुए चार माह में देशी गायों की नस्ल में लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है।
विज्ञापन


पशु विशेषज्ञों  के अनुसार पिछले चार सालों के दौरान शहर में देशी गायों की संख्या में 20 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है। पशुपालकों ने देशी गायों से किनारा कर विदेशी गायों पर भरोसा जताया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


योजना पर एक नजर:
सरकार द्वारा देशी गायों के प्रति पशुपालकों का रूझान बढ़ाने के लिए गौ संरक्षण एवं सर्वधन योजना की शुरूआत की थी। योजना के अनुसार पशुपालक अगर तीन हरियाणा की देशी या फिर शाहीवाल नस्ल की गाय खरीदेगा तो उसे सरकार की ओर से तीन गायों पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी।

पशुपालक अगर तीन से कम या ज्यादा गाय खरीदता है तो उसे योजना का लाभ नही मिलेगा। वहीं गायों के लिए  विभाग की ओर से अच्छे सांडों का सीमेन भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। जिससें गायों की दूध की क्षमता बढ़ाई जा सके और अच्छे बच्चे पैदा कर सके।

 

दस लीटर देने वाली गायों को मिलेगा रिवार्ड

Stockman are relying on foreign cows, only 10 per cent of native cow
cow
दस लीटर देने वाली गायों को मिलेगा रिवार्ड- देशी गायों में 10 लीटर से ज्यादा दूध देने वाली गायों को पशुपालन विभाग की ओर से 10 हजार रुपये का अतिरिक्त रिवार्ड भी दिया जा रहा है।

आठ महीने बाद शुरू हुई योजना
पशुपालन विभाग की लापरवाही इस योजना में देखने को मिली। सरकार की ओर से इस योजना को लागू करने के निदेऱश अप्रैल 2015 में विभाग दिए थे। लेकिन विभाग के अधिकारियों द्वारा न तो इस योजना के लिए पशुपालकों को जागरूक किया गया और न ही सरकार से बजट मांगा गया। जिसका यह कारण हुआ कि योजना आठ महीने बाद दिंसबर में शुरू की गई।

देशी गायों के प्रति कम हुआ रूझान:
पल्ला के रहने वाले पशुपालक देव कुमार बताते कि वह कुछ साल पहले देशी गाय रखते थे। एक माह में देशी गाय पर 6 से 7 हजार रुपये का खर्च आता था और दूध भी लगभग इतने पैसों में ही बिकता था। इसीलिए मुनाफा नहीं होता था।  इसी कारण  देशी गाय बेच कर संकर और जर्सी नस्ल की विदेशी गाय खरीदी। जो देशी गाय के मुकाबले दो गुना ज्यादा दूध देती है और मुनाफा भी होने लगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed