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विशेष खबर: देशी खिलौना बाजार में उछाल, चीन से मिली चुनौती बनी अवसर

Fri, 25 Dec 2020 03:55 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी नवनीत शरण, नई दिल्ली
नवनीत शरण, नई दिल्ली Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Fri, 25 Dec 2020 03:55 PM IST
सार

  • चीन से सामान नहीं आने की स्थिति में कारोबारियों ने खुद किया उत्पादन, तकनीक बेहतर करने की भी कोशिश

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Special news: Bounce in domestic toy market, opportunity poses challenge from China
खिलौने की दुकान - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

दिल्ली के खिलौना व्यापारी चुनौतियों को अवसर बना रहे है। कोविड-19 व चीन के साथ भारत की तनातनी के बीच चीन से सामान की आवक कम होने का भारतीय उद्यमियों ने जमकर फायदा उठाया। प्रधानमंत्री के मन की बात में खिलौना उद्योग को बढ़ावा देने की बात ने उनके उत्साह को बढ़ाया है। निर्माण कार्य शुरू करने के साथ अब उद्यमियों की कोशिश तकनीक के मामले में भी चीन से आने निकलने की है।
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दिल्ली के खिलौना कारोबारियों का दावा है कि लॉकडाउन खत्म होते ही खिलौना बाजार तेजी से बढ़ा। इस बीच चीन से आवक तेजी से गिरी थी। उस वक्त चीन से ना तो खिलौना आ रहा था और ना ही खिलौना बनाने में इस्तेमाल होने वाला रॉ मैटेरिकयल। अचानक से पैदा हुई मांग की भरपाई करने के लिए खिलौना उद्यमी निर्माण क्षेत्र में तेजी से कदम बढ़ाया। यहां तक कि चीन पर निर्भर रहने वाले बैट्री, रिमोट, इलेक्ट्रॉनिक सामान को भी बनाने में सफलता हासिल की।
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टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव राजीव बत्रा का कहना है कि मांग पूरी करने के लिए रात-दिन फैक्ट्रियां चली और बेहतर उत्पाद भी किया। खास बात यह है कि महंगाई में भी असर नहीं पड़ा। प्रधानमंत्री की मन की बात में खिलौनों को प्रोत्साहन देने की बात से सभी मंत्रालय का सहयोग भी मिल रहा है। लेकिन बेहतर तकनीक नहीं होने से चीन की तरह खिलौने बनाने में परेशानी आ रही है। सरकार को चीन की तरह ही प्ले एंड प्लग नीति पर काम करना होगा। इसके लिए एक हब तैयार करना होगा जहां खिलौना उद्यमी बेहतर तकनीक का इस्तेमाल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलौना बना सके।
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भारत दे सकता है चीन का टक्कर, चीन की तकनीक अभी बेहतर
कॉनफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स के महासचिव प्रवीण खंडेवाल का कहना हे कि भारतीय कारोबारी सक्षम है। हालांकि, चीन की तकनीक भारत से बेहतर है। सरकार अगर तकनीक से लैस हब बना दे ता छोटे उद्यमी भी वहां डिजाइन तैयार कर खिलौना बनाने में सक्षम हो सकते है। वजह यह कि खिलौने में प्लास्टिक, मोल्ड, कम्यूटराइज मशीन की जरूरत होती है। पिछले दिनों से भारत सरकार के आईटी विभाग से अब मदद मिल रही है। उम्मीदन जल्द ही तकनीक में भारत चीन का टक्कर देगा।

टॉय हब होना चाहिए
कनफेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष देवराज बवेजा का कहा है कि टॉय हब होना चाहिए। इसके लिए एक कॉमन लेबोरेटरी होनी चाहिए। ताकि उस हब में उद्यमी जाकर पैसा देकर काम करा ले। मोल्डिंग मशीन महंगी होती है। यह चीज हब में ही संभव है। पूरे भारत में हब बन जाए तो कास्ट ऑफ प्रोडक्शन में कमी और प्रोडक्शन में बढ़ोत्तरी हो जाती है। चीन की तरह ही हब बन जाए तो चीन को पीछे छोडना बड़ी बात नहीं होगी। चीन में प्लग एंड प्ले यूनिट लगता है। यानी बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर वहां उद्यमियों के लिए तैयार मिलता है। भारत में भी यह व्यवस्था हो जाए तो अंतरराष्ट्रीय मार्केट में भारतीय खिालौनों की धूम होगी।


महंगाई की मार भी पड़ी
कारोबारियों का कहना है कि पिछले 20 दिनों में खिलौना काफी महंगा हो गया है। चीन से प्रोडक्ट आने भी कम हो गए है। वॉकर, मैजिक कार, ट्राइ-साइकिल आने बंद हो गए है। लॉकडाउन खत्म होने के दौरान डिमांड ज्यादा थी लेकिन महंगाई नहींबढ़ी। जबरदस्त डिमांड आई लेकिन पिछले 20 दिनों में डिमांड कम हो गई है और महंगाई भी बढ़ गई है। रॉ मटेरियल में तेजी आ गई। स्टील के मूल्य में बढ़ोत्तरी भी महंगाई की मुख्य वजह है। खिलौना के दाम में 20 से 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। बच्चों की साइकिल में करीबन 30-35 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई है।

बेहतर भारतीय खिलौने
रॉक ऑन रॉकेट, सिटी राइडर, पप्पी राइडर, बेबी स्वींग, बेबी बाथ टब, बेबी रॉकिंग चेयर, मोटो पोटी सीट, डक्की वॉकर, स्वींग कार।
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