भारती ने की थी अफ्रीकी महिलाओं से अभद्रता
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली सरकार को
आयोग के मुताबिक, दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती ने 15-16 जनवरी की रात गैर-कानूनी तरीके से महिलाओं को प्रताड़ित किया था।
आयोग का मानना है कि भारती ने अफ्रीकी महिलाओं के मानवाधिकारों का हनन किया है। दूसरी तरफ सोमनाथ भारती ने आयोग के फैसले पर आपत्ति जाहिर की है।
सेवानिवृत्त
सेशन जज बीएल गर्ग और अपनी टीम की रिपोर्ट की जांच के आधार पर आयोग का
कहना है कि तत्कालीन कानून मंत्री ने अपने समर्थकों के साथ अफ्रीकी महिलाओं
को अपमानित किया।
इतना ही नहीं, नस्लीय टिप्पणियां करने के साथ ड्रग लेने
का आरोप भी लगाया। लेकिन एम्स के डाक्टरों की जांच से साफ है कि महिलाओं ने
कोई ड्रग नहीं लिया था।
संवैधानिक पद पर रहते हुए तोड़ा कानून
भारती ने संवैधानिक पद पर रहते हुए कानून तोड़ा
है। लिहाजा अफ्रीकी महिलाओं को मुआवजा मिलना चाहिए। प्रत्येक महिला को 25
हजार रुपये का मुआवजा मिलेगा। इतना ही नहीं, आयोग ने आठ सप्ताह के भीतर
प्रमाण के साथ इसकी रिपोर्ट मुख्य सचिव को दाखिल करने को कहा।
दूसरी
तरफ सोमनाथ भारती ने आयोग के फैसले पर आपत्ति जाहिर की है। भारती का कहना
है कि बगैर हमारी बात सुने आयोग का निष्कर्ष प्राकृतिक न्याय के मान्य
सिद्धांत के खिलाफ है। फिर मामला अदालत में विचाराधीन है। ऐसे में बगैर
अदालत के फैसले के मुआवजे का ऐलान सही नहीं है।
इसके अलावा पिछली अदालती कार्रवाई में यह बात भी सामने आई है कि पुलिस ने तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की है। इसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित कर लिया। ऐसी हालत में मानवाधिकार आयोग के फैसले से अदालती कार्रवाई प्रभावित हो सकती है।