{"_id":"5e91ceb48ebc3e6fa6218af3","slug":"some-people-are-becoming-the-support-of-hungry-animals-and-birds","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना का प्रभाव : बेजुबानों जानवरों को सहारा बने कुछ लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना का प्रभाव : बेजुबानों जानवरों को सहारा बने कुछ लोग
Sat, 11 Apr 2020 07:35 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Sat, 11 Apr 2020 07:35 PM IST
विज्ञापन
लॉकडाउन में बेजुबान कुत्तों को खाना खिलाते टेकचंद्र
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बेजुबान जानवरों और पक्षियों, यहां तक कि चींटियों के लिए भी कुछ सेवक योद्धा खाने-पानी के इंतजाम में जुटे हैं। उनका प्रयास है कि लॉकडाउन के दौरान कोई भी भूखा न रह जाए। कालका पीठ के महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत जी महाराज और उनके सहयोगी नई दिल्ली के पांच चौराहों पर कबूतरों के लिए ज्वार, भुजिया, मूंग और उड़द, कौवों और चील के लिए बेसन के गठिया और गुड़ के सेव, कुत्तों के लिए दूध, डबल रोटी, चूहों के लिए दही-बूरा और चींटियों के लिए आटे का इंतजाम कर रहे हैं। इस काम में सेवा प्रमुख विजय शर्मा के साथ दीपक शर्मा, महेश मखीजा, अतुल अग्रवाल और नमन शर्मा जुटे हैं।
इससे पहले गाजियाबाद से भी इसी तरह की जानकारी मिली थी। सड़कों और गलियों में घूमने वाले इन बेजुबान जानवरों की कोई सुध लेने वाला नहीं है। ऐसे में शहर के कई युवा बेसहारा जानवरों को सहारा बन एक नया उदाहरण पेश कर रहे हैं। जानवरों को खाना खिलाना और उनकी देखभाल करना, अब उनकी वर्तमान जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। जानवरों के बीमार पड़ने पर वह अपने खर्च पर ईलाज भी करा रहे हैं।
गाजियाबाद के अशोकनगर में रहने वाले बीटेक छात्र अमन कौशिक लॉकडाउन में इन बेजुबानों के सहारा बनकर सामने आए हैं। रोज क्षेत्र में घूमने वाली गायों और कुत्तों को खाना खिला रहे हैं। ऐसा ही कुछ एमएमएच में एलएलबी फाइनल ईयर के छात्र टेकचंद्र लॉकडाउन में सड़कों पर घूमने वाले बेजुबान जानवरों का सहारा बने हुए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
इससे पहले गाजियाबाद से भी इसी तरह की जानकारी मिली थी। सड़कों और गलियों में घूमने वाले इन बेजुबान जानवरों की कोई सुध लेने वाला नहीं है। ऐसे में शहर के कई युवा बेसहारा जानवरों को सहारा बन एक नया उदाहरण पेश कर रहे हैं। जानवरों को खाना खिलाना और उनकी देखभाल करना, अब उनकी वर्तमान जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। जानवरों के बीमार पड़ने पर वह अपने खर्च पर ईलाज भी करा रहे हैं।
विज्ञापन
गाजियाबाद के अशोकनगर में रहने वाले बीटेक छात्र अमन कौशिक लॉकडाउन में इन बेजुबानों के सहारा बनकर सामने आए हैं। रोज क्षेत्र में घूमने वाली गायों और कुत्तों को खाना खिला रहे हैं। ऐसा ही कुछ एमएमएच में एलएलबी फाइनल ईयर के छात्र टेकचंद्र लॉकडाउन में सड़कों पर घूमने वाले बेजुबान जानवरों का सहारा बने हुए हैं।
विज्ञापन