सोशल साइटस के जरिए दंगे की साजिश
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कुछ असामाजिक तत्व जिले को दंगे की आग में जलाने की साजिश कर रहे हैं। लोनी बवाल भी इसी साजिश का हिस्सा था। ये सनसनीखेज तथ्य गाजियाबाद इंटेलीजेंस टीम की खुफिया जांच में सामने आए हैं।
इंटेलीजेंस ने एसएसपी को इस संबंध में रिपोर्ट दी है। एसएसपी शासन को ये रिपोर्ट भेज रहे हैं। एसएसपी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि जो असामाजिक तत्व दंगे की साजिश कर रहे हैं, उन्हें चिन्हित कर लिया गया है।
उनके खिलाफ पुलिस के पास पर्याप्त और पुख्ता सुबूत हैं। ऐसे लोग पुलिस के रडार पर हैं। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रिपोर्ट : अरीश रिज़वी
घटना होते ही मैसेज होते हैं फ्लैश
पुलिस सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में लिखा गया है कि कुछ लोग हर मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए सोशल साइट्स फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्स एप का भी सहारा ले रहे हैं।
ये असामाजिक तत्व कोई भी घटना होते ही सोशल साइट्स पर सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने वाले मैसेज फ्लैश करना शुरू कर देते हैं। अफवाहें फैलाते हैं, ताकि लोग आक्रोशित हों।
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने ऐसे लोगों के खिलाफ जो सुबूत जमा किए हैं, उनका भी रिपोर्ट में जिक्र किया गया है। साथ ही ये भी लिखा है कि पुलिस की तत्परता और संभ्रांत लोगों की वजह से असामाजिक तत्व अभी तक अपने नापाक मकसद में कामयाब नहीं हो सके हैं। एसएसपी ने बताया कि लोकल इंटेलीजेंस के इनपुट के बाद पुलिस पूरी तरह से अलर्ट है।
एफबी और व्हाट्स एप की मानिटरिंग
• इसी साजिश का हिस्सा था लोनी बवाल
एफबी और व्हाट्स एप की मानिटरिंग
पुलिस एफबी और व्हाट्स एप की मानिटरिंग कर रही है कि कहीं कोई भड़काऊ वीडियो या मैसेज भेजकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश न कर सके। अफवाहें न फैला सके।
लोनी बवाल में दो चौकी इंचार्ज सस्पेंड
लोनी बवाल मामले में मंगलवार रात एसएसपी ने लालबाग चौकी इंचार्ज अनेक सिंह यादव और इंद्रापुरी चौकी प्रभारी भानुप्रताप सिंह को सस्पेंड कर दिया है। इनकी लापरवाही मानी गई है कि ये बवाल कंट्रोल नहीं कर सके। इनके क्षेत्र में रहते हुए बवाल हो गया।
हालांकि इनके स्थान पर अभी किसी की तैनाती नहीं की गई है। बता दें कि सोमवार को लोनी में सबसे ज्यादा बवाल इन्हीं दो चौकी क्षेत्रों में हुआ था। रविवार को हंगामा और आरोपी के घर तोड़फोड़ के बावजूद पुलिस सोमवार को लोगों का आक्रोश शांत नहीं कर सकी और लोग सड़कों पर उतर आए और बवाल किया।
बनेगी सांप्रदायिक विवादों की कुंडली
दो समुदायों के बीच चल रहे विवाद अब सांप्रदायिक रजिस्टर में दर्ज किए जाएंगे। रेंज के छह जिलों में यह व्यवस्था शुरू करने की तैयारी है। इसकी शुरुआत मेरठ से होगी। इसका खाका तय करने के लिए डीआईजी ने मोदीनगर और बागपत से सांप्रदायिक रजिस्टर मंगवाए हैं।
रजिस्टर में त्योहार रजिस्टर की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। नई बात यह होगी कि इसमें संबंधित विवादित स्थल का फोटो, विवाद का संक्षिप्त विवरण, पुलिस और तहसील प्रशासन द्वारा अब तक की गई कार्रवाई का विवरण, संबंधित थानेदार और सर्किल अफसर के कथन के अलावा विवाद के निस्तारण के लिए प्रयासों को भी दर्ज किया जाएगा।
अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई
डीआईजी रेंज के. सत्यनारायणा ने बताया कि विवादों का फोटो सहित विवरण दर्ज होने और धार्मिक स्थलों से जुड़े पदाधिकारियों, संबंधित थानेदार की जिम्मेदारी तय होने से यह समझने में देर नहीं लगेगी कि गलती किससे हुई।
अफवाहों के बीच लोनी में तनावपूर्ण शांति है। आशंकाओं के चलते लोग दहशत में भी हैं। मंगलवार को भी क्षेत्र में अफवाहों का बाजार गर्म रहा, लेकिन जनजीवन सामान्य रहा। बाजार रोजाना की तरह खुले। चप्पे चप्पे पर पुलिस, पीएसी और आरएएफ तैनात है। डीआईजी, डीएम, एसएसपी समेत पुलिस प्रशासनिक अधिकारी लोनी में डेरा डाले हुए हैं।
रविवार शाम क्षेत्र की एक कालोनी में साठ वर्षीय वृद्ध ने दूसरे संप्रदाय की दस वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था। पुलिस ने आरोपी को जेल भेज दिया था। घटना को लेकर एक समुदाय में आक्रोश फैल गया था। सोमवार को बच्ची की मौत और आरोपी को छोड़ने की अफवाहों से लोनी में बवाल हुआ था।
मंगलवार को भी लोनी में तरह तरह की अफवाहें फैलीं। लेकिन इसका ज्यादा असर लोगों पर नहीं हुआ। हालांकि लोग उपद्रव को लेकर चर्चा करते भी नजर आए। उपद्रव के लिए कोई पुलिस को जिम्मेदार ठहरा रहा था तो कोई शरारती तत्वों की हरकत बता रहा था। एसपी देहात जगदीश शर्मा का कहना है कि अफवाह फैलाने वालों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
दंगों की आग में झुलसा वेस्ट यूपी का विकास
वेस्ट यूपी के दंगों की आग से गाजियाबाद समेत आसपास के जिलों का डेवलपमेंट प्रभावित हो रहा है। दंगों से न केवल कानून व्यवस्था प्रभावित हुई है, बल्कि विकास योजनाओं पर भी ब्रेक लग गये।
दंगों के दौरान बस संचालन रोकने और बसों में तोड़फोड़-आगजनी होने से रोडवेज को काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस के दंगा नियंत्रण में व्यस्त होने केचलते पासपोर्ट और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों के आवेदनों की जांच अधर में लटक गईं। कुल मिलाकर दंगों ने जहां लोगों के तन-मन को घायल किया, वहीं विकास की डगर पर वेस्ट यूपी को पीछे धकेल दिया।
दंगों से प्रभावित कारोबार
दंगों से सबसे ज्यादा असर परिवहन विभाग पर पड़ा। बसों में तोड़फोड़ में आग लगने से जहां लाखों का नुकसान हुआ, वहीं दंगों के दौरान इन जनपदों में बसों का संचालन बंद रखा गया। इससे निगम को रोजाना होने वाली लाखों रुपये की आय प्रभावित हुई। दंगों के दौरान इन क्षेत्रों में चलने वाली ट्रेनों में भी यात्रियों की संख्या बेहद कम रही।
पश्चिमी यूपी में हुए दंगों ने गाजियाबाद की इंडस्ट्रीज को भी प्रभावित किया। यहां की कई फैक्ट्रियों से मुजफ्फरनगर, सहारनपुर आदि क्षेत्रों में प्लास्टिक, ऑटो मोबाइल, होम एप्लाइंसेस व लोहे के सामान आदि की बिक्री प्रभावित हुई है। गाजियाबाद इंडस्ट्रीज फेडरेशन के अध्यक्ष अरुण शर्मा ने बताया कि कई उद्यमियों का इन दोनों शहरों में डीलरशिप है।
जब दंगे हुए तो दुकानें जलाई गई। गाजियाबाद से तैयार माल वहां नहीं जा सका। लिहाजा उसका भी नुकसान उद्यमियों को उठाना पड़ा। वहीं डीलरों ने भी पेमेंट देने से मना कर दिया। उनका कहना था कि करोड़ों रुपये का नुकसान दंगों के कारण हुआ है।
ट्रांसफर और विवेचनाएं प्रभावित
पुलिसवालों के प्रस्तावित स्थानांतरण और विवेचनाएं प्रभावित हो रही हैं। अधिकांश पुलिसकर्मी पहले पड़ोसी जिलों में हुए बवाल की वजह से ड्यूटी पर रहे। इसके बाद पिछले एक माह से गाजियाबाद में इस तरह के हालात बन रहे हैं, जिनमें पुलिसवाले जुटे हुए हैं। इससे उनके ट्रांसफर और विवेचनाएं प्रभावित हो रही हैं।
दंगा प्रभावित जनपदों में दिनरात बिजली की सप्लाई की गई। इसके लिए आसपास केजिलों से सप्लाई काटकर वहां पर दी गई। ऐसे में दंगा होने तक आसपास के जिलों में बिजली संकट झेलना पड़ा।
एनसीआर आटो संचालन की फाइल पर कमिश्नर के हस्ताक्षर होने हैं। कमिश्नर मेरठ को जहां दंगों के दौरान कई जगह कैंप करना पड़ा, वहीं दंगों के बाद उनको सहारनपुर दंगों का जांच अधिकारी बना दिया गया। इसकी व्यस्तता के चलते वह अभी तक एनसीआर आटो की फाइल पर हस्ताक्षर नहीं कर सके हैं।
मेरठ-सहारनपुर, हापुड़, बागपत, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर आदि जिलों में विकास योजना की बैठक नहीं हो सकी हैं। ऐसे में यहां पर विकास कार्य शुरू नहीं किए गए। जिला विकास योजना की बैठक होने के बाद ही विकास योजनाओं पर काम शुरू होगा। दंगों के चलते विकास योजनाओं को शुरू करने में बेवजह की देरी हुई है।