तो इसीलिए की थी पिता के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत
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अदालत ने अपनी ही 17 वर्षीय बेटी से यौन प्रताड़ना के आरोपी पिता को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। दरअसल अदालत के समक्ष बेटी अपने बयानों से मुकर गई और अदालत को बताया कि अपने माता-पिता की बीच हुए विवाद के कारण उसने फर्जी शिकायत की थी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौतम मेनन ने उत्तरी दिल्ली निवासी आरोपी को धारा 354, 506 व पोस्को के तहत आरोपों से बरी किया है। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता लड़की व उसकी मां ने अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया है।
ऐसे में मामले की सुनवाई जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने कहा कि लड़की ने कहा कि उसे अपनी भूल का अहसास हो गया है और उसके पिता ने कभी भी उसे यौन प्रताड़ना नहीं की।
आरोप पत्र में लगाए थे संगीन आरोप
जबकि उसकी मां भी इसी प्रकार का बयान दिया है। दोनों ने कहा कि परिवारिक विवाद के कारण ही यह झूठा आरोप लगाया गया था। ऐसे में आरोपी का अपराध साबित नहीं होता।
अभियोजन पक्ष के अनुसार लड़की ने आरोप लगाया था कि 31 अगस्त 2013 को जब वह सो रही थी उसी समय पिता ने उससे शारीरिक छेड़छाड़ की और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकियां दी।
उसने अगले दिन इस घटना के बारे में अपनी मां को बताया तो मां ने पिता को कुछ दिन घर में नहीं घुसने दिया। कुछ दिन बाद अचानक उसका पिता जबरन घर में आ गया व फिर छेड़छाड़ की। पुलिस ने इस शिकायत पर उसे गिरफ्तार कर लिया था और आरोपपत्र दायर किया। सुनवाई के दौरान आरोपी ने स्वयं को निर्दोष बताया।