ब्लैक मनी की वापसी से भारत छूएगा नई ऊंचाईयां!
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विदेशों में जमा काले धन के आंकड़े सही पाए जाते हैं और इस धन की वापसी देश में हो जाती है तो आर्थिक स्तर पर तमाम चुनौतियों का सामना कर रहे भारत को बहुत बड़ी राहत मिल सकती है। विदेशी बैंकों में जमा काला धन के आंकड़े चौंकाने वाले हैं।
अमेरिकी संस्था जीएफआई के 2008 के अनुमान के अनुसार भारतीयों के करीब 23 लाख करोड़ रुपये जबकि फिक्की के हिसाब से करीब 45 लाख करोड़ रुपये काला धन विदेशी बैंकों में जमा है। दूसरी तरफ वित्त मंत्रालय के मुताबिक 2012 के अंत तक स्विस बैंक में भारतीयों के करीब 85 अरब करोड़ रुपये जमा थे।
एक अरब से अधिक की आबादी वाले इस देश में चलने वाली स्वास्थ्य योजना पर भी साल भर में करीब इतना ही खर्च होता है। भारत का साल भर का बजट करीब 14 लाख करोड़ रुपये का होता है। यानी पूरे देश के साल भर के बजट से दोगुनी रकम इस विकासशील भारत के कुछ लोग विदेशी बैंकों में जमा कर चुके हैं। ऐसे में केंद्र सरकार ने अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में विदेशी बैंकों में जमा काला धन वापस लाने के लिए एसआईटी के गठन को मंजूरी देकर नई पहल की है।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के तहत हो रहा है काम
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एमबी शाह की अध्यक्षता में गठित एसआईटी का राजनीतिक श्रेय लेते हुए मोदी सरकार इसे अपने चुनावी घोषणा पत्र में किये गए वादे को पहले ही दिन से पूरा किए जाने की बात कर रही है तो विपक्ष इसे सुप्रीम कोर्ट के जुलाई 2011 में दिए गए आदेश का पालन करते हुए सरकार द्वारा लिया गया फैसला बता रहा है।
वैसे यूपीए सरकार करीब तीन साल तक इस मामले को टालने का प्रयास करती रही। अब एसआइटी काले धन की समस्या से निबटने के लिए एक कार्ययोजना तैयार करेगी। नई एसआइटी के सुप्रीम कोर्ट के तहत काम करने की वजह से इससे निष्पक्षता की उम्मीद की जा सकती है।
इससे पहले केंद्र सरकार ने देश में काले धन के मामले में कई स्तर पर प्रयास किए हैं। कई देशों के साथ किया गया दोहरे कराधान रोकथाम समझौता उनमें से एक है। इसके साथ ही 2009 के आम चुनाव बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने रथयात्रा की थी जिसमें उन्होंने काले धन के मुद्दे को उठाया था। योग गुरु बाबा रामदेव भी इसको लेकर आंदोलन कर चुके हैं। लेकिन इन सबका कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।
पैसा आएगा तो क्या-क्या हो सकता है?
बाबा रामदेव ने काले धन के मामले पर गत मंगलवार को कहा कि अगर काला धन वापस आ गया तो देश में कोई भूखा नहीं सोएगा, बेरोजगारी नहीं रहेगी, रूपये में मजबूती आएगी और भारतीय अर्थव्यवस्था विकास की नई ऊंचाइयों को छूएगा।
एसआईटी के गठन ने जहां देश के लोगों में उम्मीद जगाई है वहीं यह सवाल भी उठता है कि क्या भारत अपने लोगों द्वारा स्विस बैंकों में जमा कराये गए धन के बारे में जानकारी हासिल कर कोई ठोस कार्रवाई कर सकेगा।
नाइजीरिया के राष्ट्रपति ने 1996 में विदेशी कंपनी से मोटा कमीशन लेकर उसे स्विस बैंक में जमा करा दिया था लेकिन बाद में नाइजीरियाई सरकार की पहल पर स्विट्जरलैंड ने न केवल स्विस बैंक में जमा काले धन की पूरी जानकारी दी बल्कि इस मामले में शामिल लोगों की गिरफ्तारी में भी मदद की। ऐसे में काले धन के मामले में केंद्र सरकार की पहल के सकारात्मक परिणाम का इंतजार पूरे देश को रहेगा।