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Delhi: अंतरिक्ष यात्री शुभांशु ने साझा किए ISS पर प्रयोगों के अनुभव, सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण प्रयोग पर भी बोले

Wed, 05 Nov 2025 10:28 PM IST
आकाश दुबे न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Wed, 05 Nov 2025 10:28 PM IST
सार

शुभांशु शुक्ला ने कहा, नमूनों को बिना हवा के निकालने के लिए, शुक्ला को स्वयं एक 'सेंट्रीफ्यूज' की तरह कार्य करना पड़ा। उन्हें प्रत्येक नमूने के लिए कई बार (चार-पांच चक्कर) अपने चारों ओर घूमना पड़ता था ताकि नमूने को सही ढंग से सिरिंज में भरा जा सके और बाद में उन्हें एक छोटे डिब्बे में रखकर फ्रीजर में संरक्षित किया जा सके।

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Shubhanshu Shukla spun around himself for 3 hours to collect experiment samples
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, भारतीय अंतरिक्ष यात्री - फोटो : ANI

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर अपने 18 दिवसीय प्रवास के दौरान, अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला को सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में प्रयोगों के लिए नमूने निकालने हेतु लगभग तीन घंटे तक अपने ही चारों ओर घूमना पड़ा। यह अनुभव उन्होंने दिल्ली में सशक्त विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन (ईएसटीआईसी) में साझा किया, जहां उन्होंने कक्षीय प्रयोगशाला में बिताए समय, अंतरिक्ष यात्रा के दौरान ‘जी-फोर्स’ के प्रभाव, शून्य गुरुत्व की अनुभूति और पृथ्वी पर लौटने के बाद पुनः सामान्य जीवन में ढलने के अपने अनुभवों को विस्तार से बताया।

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उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में प्रयोगों के दौरान सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण की स्थितियां कई अनूठी चुनौतियां पेश करती हैं। उन्होंने विशेष रूप से सूक्ष्म शैवाल के नमूनों को एक थैली से निकालने की प्रक्रिया का उल्लेख किया। पृथ्वी पर, सिरिंज में हवा के बुलबुले को आसानी से निकाला जा सकता है या थैली को उल्टा करके बुलबुले को ऊपर लाया जा सकता है। लेकिन अंतरिक्ष के शून्य गुरुत्वाकर्षण में, ये तरीके काम नहीं करते।
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उन्होंने बताया, पृथ्वी पर, जब किसी सिरिंज में हवा का बुलबुला होता है, तो आप उसे थोड़ा सा दबा सकते हैं और हवा का बुलबुला बाहर निकल जाएगा, या थैली को उल्टा कर दें और वह ऊपर आ जाएगी। लेकिन अंतरिक्ष में ऐसा नहीं होता।
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उन्होंने बताया कि नमूनों को बिना हवा के निकालने के लिए, शुक्ला को स्वयं एक 'सेंट्रीफ्यूज' की तरह कार्य करना पड़ा। उन्हें प्रत्येक नमूने के लिए कई बार (चार-पांच चक्कर) अपने चारों ओर घूमना पड़ता था ताकि नमूने को सही ढंग से सिरिंज में भरा जा सके और बाद में उन्हें एक छोटे डिब्बे में रखकर फ्रीजर में संरक्षित किया जा सके। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए, उन्हें कुल 36 नमूने एकत्र करने पड़े, जिसमें उन्हें लगभग तीन घंटे तक लगातार चक्कर लगाने पड़े।


साथ ही बताया, बिना हवा के नमूने निकालने के लिए मुझे इतने चक्कर लगाने पड़े। नमूने निकालने और उन्हें छोटे डिब्बों में रखने के लिए मुझे तीन घंटे तक लगातार घूमना पड़ा।

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