राजनीति में वापसी पर शीला का बड़ा खुलासा
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दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और केरल की पूर्व राज्यपाल शीला दीक्षित दिल्ली आ गई हैं। यहां सक्रिय राजनीति की पारी कैसे शुरू करेंगी, इस पर उन्होंने कहा कि जैसा आलाकमान का आदेश होगा, वैसा करूंगी। एक हफ्ते बाद बताऊंगी कि आगे का प्लान क्या है।
दिल्ली में 15 साल तक मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल चुकी शीला दीक्षित ने 'अमर उजाला' से कहा कि अभी आई हूं। सेटल हो जाऊं, आलाकमान और जिम्मेदारी तय करने वाले नेताओं से मिल लूं, तभी जिम्मेदारी का पता चलेगा।
तिरुवंतपुरम से लौटने पर शीला दीक्षित ने कहा कि मेरी भूमिका तय करने का अधिकार पार्टी नेतृत्व को है। मैं दिल्ली की स्थायी निवासी हूं, बाकी कुछ नहीं कहूंगी। उल्लेखनीय है कि शीला दीक्षित के दिल्ली की राजनीति में वापसी को लेकर कांग्रेस के कई नेता परेशान हैं। क्योंकि जिम्मेदारी मिलती है तो आगामी विधानसभा के लिए उनसे बड़ा कोई चेहरा कांग्रेस केपास नहीं है।
हालांकि भ्रष्टाचार, विधानसभा चुनाव में हार, बढ़ती उम्र का हवाला देकर कांग्रेस के कई नेता वापसी से कांग्रेस का नुकसान बता रहे हैं। वहीं समर्थक नेताओं का कहना है विकास कार्यों को याद किया जाए तो कांग्रेस को फायदा मिलेगा।
शीला की वापसी को लेकर कांग्रेस में टकराव!
केरल के राज्यपाल पद से इस्तीफा देने की अटकलों के साथ ही दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित की राजनीति में वापसी की चर्चा शुरू हो गई थी। शीला की वापसी को लेकर कांग्रेस के कुछ नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात भी थी।
शीला के करीबी माने जाने वाले नेताओं का कहना है कि दिल्ली में दोबारा चुनाव होने की स्थिति में शीला को सामने लाना काफी असरदार होगा। इससे लोगों को उनके 15 साल के कार्यकाल और विकास को गिनाया जा सकेगा। यही नहीं, इससे दिल्ली पार्टी की डूबती नैया भी पार लग सकती है।
हालांकि दिल्ली की राजनीति में शीला की वापसी को लेकर कांग्रेस में दो गुट बने हुए हैं। एक गुट का कहना है कि दिल्ली में शीला की वापसी जरूरी है क्योंकि अरविंदर लवली वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलने में नाकाम रहे हैं।
वहीं, दूसरे गुब् का तर्क है कि पार्टी को युवाओं को आगे आने का मौका देना चाहिए।