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दिल्ली सरकार के चार वर्ष: शीला दीक्षित बोलीं- बर्बादी का इतिहास है केजरीवाल का दौर
Thu, 14 Feb 2019 05:56 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Thu, 14 Feb 2019 05:56 AM IST
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शीला दीक्षित
- फोटो : ani
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कांग्रेस ने केजरीवाल सरकार के चार साल को बर्बादी का इतिहास बताया है। प्रदेशाध्यक्ष शीला दीक्षित का कहना है कि प्रदूषण के कारण दिल्ली गैस चैंबर बन गई है। सरकारी स्कूलों में बच्चे पढ़ने को तैयार नहीं हैं तो बिजली बिल के कारण उपभोक्ता परेशान है। पेयजल और सीवर की समस्याओं से निजात नहीं मिली। अनधिकृत कॉलोनियों में विकास कार्य ठप हैं। मेट्रो फेज-4 को भी रफ्तार नहीं मिली।
उन्होंने कहा कि हमने 15 साल में दिल्ली को विश्वस्तरीय शहर बनाया था। आप ने दिल्लीवालों से किए वादे पूरे नहीं किए। सभी लोगों को मुफ्त बिजली और पानी नहीं मिल रहे हैं। महंगाई के कारण घर का बजट बिगड़ा हुआ है। युवाओं को नौकरी नहीं मिल पा रही हैं।
कांग्रेस के शासनकाल में 30 लाख गरीब लोगों को राशन मिलता था, अब इनकी संख्या 19 लाख रह गई है। कांग्रेस के दौर में 3 लाख 11 हजार लोगों को पेंशन मिलती थी, जो अब 2 लाख रह गई है। सफाई कर्मचारियों को अब वेतन के लिए भी धरने-प्रदर्शन करने पड़ते हैं।
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कांग्रेस ने 75 नए फ्लाईओवर और 4 हजार किलोमीटर सड़कें बनाई थीं। अब उनमें बड़े-बड़े गड्डे है। लोगों को ट्रैफिक जाम झेलना पड़ रहा है। बारिश के दिनों में मुख्य सड़कों तो क्या, गलियों, पार्कों और घरों में भी पानी भरा दिखता है। पूरी दिल्ली की रफ्तार जरा सी बारिश पड़ते ही थम जाती है। बढ़ोत्तरी तो दूर, डीटीसी बसों की संख्या 1700 कम हो गई। शिक्षा की खस्ता हालत से 58 हजार विद्यार्थी सरकारी स्कूल छोड़ गए।
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उन्होंने कहा कि हमने 15 साल में दिल्ली को विश्वस्तरीय शहर बनाया था। आप ने दिल्लीवालों से किए वादे पूरे नहीं किए। सभी लोगों को मुफ्त बिजली और पानी नहीं मिल रहे हैं। महंगाई के कारण घर का बजट बिगड़ा हुआ है। युवाओं को नौकरी नहीं मिल पा रही हैं।
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कांग्रेस के शासनकाल में 30 लाख गरीब लोगों को राशन मिलता था, अब इनकी संख्या 19 लाख रह गई है। कांग्रेस के दौर में 3 लाख 11 हजार लोगों को पेंशन मिलती थी, जो अब 2 लाख रह गई है। सफाई कर्मचारियों को अब वेतन के लिए भी धरने-प्रदर्शन करने पड़ते हैं।
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कांग्रेस ने 75 नए फ्लाईओवर और 4 हजार किलोमीटर सड़कें बनाई थीं। अब उनमें बड़े-बड़े गड्डे है। लोगों को ट्रैफिक जाम झेलना पड़ रहा है। बारिश के दिनों में मुख्य सड़कों तो क्या, गलियों, पार्कों और घरों में भी पानी भरा दिखता है। पूरी दिल्ली की रफ्तार जरा सी बारिश पड़ते ही थम जाती है। बढ़ोत्तरी तो दूर, डीटीसी बसों की संख्या 1700 कम हो गई। शिक्षा की खस्ता हालत से 58 हजार विद्यार्थी सरकारी स्कूल छोड़ गए।