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आउटसोर्सिंग एजेंसियों ने किया 1.54 करोड़ रुपये का घोटाला
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Thu, 01 Jun 2017 07:31 PM IST
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नगर निगम फरीदाबाद में कार्यरत रही आउटसोर्सिंग एजेंसियों ने एक करोड़ 54 लाख रुपये का घोटाला किया है। भ्रष्टाचार विरोधी मंच ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि इन एजेंसियों ने आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन से यह राशि काटी जरूर मगर उसे उनके ईपीएफ खातों ने जमा नहीं किया।
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मंच का यह भी आरोप है कि इस राशि का गबन नगर निगम अधिकारियों के मिलीभगत से किया गया है। प्रदेश सरकार से भ्रष्टाचार के इस मामले की जांच के कराने की मांग भी मंच के पदाधिकारियों ने किया है।
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पिछले 17 मई से नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार को जड़ से उखाडने को लेकर भ्रष्टाचार विरोधी मंच द्वारा निगम मुख्यालय पर सत्याग्रह किया जा रहा है। अनशन पर बैठे मंच के संयोजक व सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता बाबा रामकेवल ने बताया कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के इंफोर्समेंट अधिकारी उधम सिंह की जांच में पाया गया है कि अप्रैल 2012 से जनवरी, 2016 के बीच आउटसोर्सिंग एजेंसी मैसर्स आरबी इंटरप्राइजेज व प्रधान नियोक्ता नगर निगम फरीदाबाद द्वारा बार-बार अवसर दिए जाने के बाद भी इन कर्मियों के उपस्थिति रजिस्टर, वेजेज रजिस्टर, बैंक चालान व अन्य रिकार्ड प्रस्तुत नहीं किए गए।
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इसके बाद एक करोड़ 54 लाख रुपये की ईपीएफ. राशि जमा करने के लिए कंपनी को नोटिस दिया गया। 31 मार्च 2017 को 15 दिन के अंदर यह राशि जमा करने के आदेश दिए गए। इसके बावजूद यह राशि कर्मियों के खातों में जमा नहीं की गई है।
सत्याग्रह पर बैठे नगर निगम अधिकारी रतन लाल रोहिल्ला का कहना है कि सैलरी बिल स्वीकृत करने व ठेकेदार को अदायगी करते समय निगम अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि ठेकेदार के द्वारा ईपीएफ व ईएसआई की राशि जमा कराई गई है कि नहीं। मगर ऐसा नहीं किया गया। मंच का कहना है कि नगर निगम स्तर यह एक बड़ी अनियमितता है। सरकार को इसका संज्ञान लेना चाहिए।