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Samyukta Kisan Morcha: एमएसपी पर किसान संगठनों की अहम बैठक आज, कार्यक्रम तय तारीख पर होंगे, 29 को संसद तक ट्रैक्टर मार्च

Sun, 21 Nov 2021 09:26 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sun, 21 Nov 2021 09:26 AM IST
सार

आंदोलन की आगे की क्या रणनीति होगी उस पर रविवार को बैठक होगी लेकिन शनिवार को कोर कमेटी की बैठक में फैसला लिया गया है कि शीत सत्र के दौरान संसद तक ट्रैक्टर मार्च का जो निर्णय लिया गया था वह वैसा ही रहेगा।

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Farmers samyukta kisan morcha meeting today, further strategy will be discussed
Samyukta Kisan Morcha - फोटो : एएनआई

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा के दूसरे दिन सिंघु बॉर्डर पर पंजाब से जुड़े किसान संगठनों ने बैठक की। इसमें तय किया कि 22 नवंबर को प्रस्तावित लखनऊ रैली व 29 नवंबर को संसद मार्च के आयोजन का कार्यक्रम पूर्ववत रहेगा। इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। 

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हालांकि, इस फैसले पर अंतिम मुहर लगाने के लिए रविवार को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक होगी। इसमें प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद पैदा हुए हालात व किसान आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी। किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी व बिजली संशोधन कानून को रद्द किए बगैर आंदोलन वापस लेने की कोई योजना नहीं है।
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सिंघु बॉर्डर पर रविवार को होने वाली संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। इसमें पिछले एक साल के गतिरोध के बाद तीनों कृषि कानूनों को निरस्त की घोषणा के बाद की हालात पर चर्चा होगी। मोर्चा की इस बैठक में गतिरोध समाप्त करने के लिए वार्ता, आंदोलन की रणनीति सहित कुछ और पहलुओं पर भी रविवार को निर्णय लिए जाने की उम्मीद है। हालांकि, अभी तक किसान संगठनों ने दिल्ली की सीमाओं से हटने के संकेत नहीं दिए हैं। किसानों का कहना है कि जब तक एमएसपी, सहित दूसरी मांगें नहीं मानी जाती हैं, विरोध जारी रहेगा।
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किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी का कहना है कि अभी यहां से जाने का समय नहीं आया है। किसान आंदोलन की भेंट चढ़े किसानों के आश्रितों को मुआवजा और दर्ज हो चुके मुकदमों को खारिज किए जाने तक यहीं रहेंगे। इस संबंध में रविवार को संयुक्त किसान मोर्चा की रविवार को बैठक होगी। इसमें आंदोलन के आगे के कदमों के बारे में फैसला किया जाएगा।

29 नवंबर को संसद तक ट्रैक्टर मार्च
एक किसान नेता ने बताया कि दिल्ली बॉर्डर से अभी किसान आंदोलन खत्म नहीं होगा। हमारे पहले से जो कार्यक्रम तय थे, वे अब तय तारीख पर आयोजित होंगे। हम 22 नवंबर को लखनऊ में किसानों की बड़ी रैली होनी है। जबकि 26 नवंबर को किसान आंदोलन का एक साल पूरा होने पर देशभर में रैली निकालेंगे। इसके साथ ही 29 नवंबर से शुरू हो रहे संसद सत्र के दौरान प्रतिदिन 500 प्रदर्शनकारी ट्रैक्टर ट्रॉलियों में सवार होकर संसद तक शांतिपूर्ण मार्च करेंगे।

जैसे कानून वापस लिए, वैसे ही मुकद्दमे भी वापस लो
सरकार ने तीन कृषि कानून तो वापस लेने की घोषणा कर दी है, लेकिन किसानों पर दर्ज हुए हजारों मुकद्दमे फिलहाल वापस नहीं लिए गए हैं। जिस तरह से कानून वापस लिए गए हैं वैसे ही मुकद्दमे भी वापस लिए जाएं। किसान आंदोलन में शहीद हुए किसानों को मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा एमएसपी गारंटी कानून बनाया जाए। इन सभी मांगों के पूरा होने पर ही वह आंदोलन को वापस लेंगे। कोर कमेटी में आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है और पहले से तय कार्यक्रमों में कोई बदलाव नहीं होगा। - गुरनाम सिंह चढूनी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन

बैठक में करेंगे आगामी रणनीति का खुलासा
रविवार को एसकेएम के सभी नेता बैठक करेंगे और इसी बैठक में आगामी रणनीति का खुलासा किया जाएगा। प्रधानमंत्री की घोषणा पर चर्चा के अलावा कई अहम मुद्दों पर बातचीत होगी। दिल्ली कूच की तैयारियां चल रही हैं। सभी की सहमति बनने पर ही आगे की रणनीति तय होगी। - डॉ. दर्शनपाल, सदस्य, समन्वय समिति, एसकेएम

लंबित मांगों के पूरा होने का इंतजार
संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से जारी बयान में कहा है कि तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा के बाद भी कुछ लंबित मांगें हैं। मोर्चा का कहना है कि किसानों के लंबे संघर्ष के बाद भी उनकी सभी मांगें नहीं मानकर अनदेखी की जा रही है। देश के किसान कई वर्षों से सभी कृषि उत्पादों के लिए कानूनी रूप से गारंटी और लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसके लिए जगह-जगह विरोध प्रदर्शन किए जाते रहे हैं। उचित एमएसपी के लिए वैधानिक गारंटी की मांग मौजूदा आंदोलन का एक अभिन्न अंग है। विद्युत संशोधन विधेयक को पूरी तरह से वापस लेने, किसानों को दिल्ली में वायु गुणवत्ता विनियमन पर कानून से संबंधित दंडात्मक धाराओं से बाहर रखने की भी मांग कर रहा है। इन मांगों के पूरा होने के बाद ही किसान अपने घर लौटेंगे। तीनों कृषि कानूनों पर घोषणा के बाद सरकार अन्य मांगों पर चुप है। इनपर फैसला लेने के बाद ही आंदोलन का रुख तय होगा।

मुआवजा और किसानों की याद में स्मारक बने
संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से जारी आंकड़े के मुताबिक किसान आंदोलन में अब तक 670 से अधिक किसान जान गंवा चुके हैं। सरकार की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि देना तो दूर उनके बलिदान को भी नहीं स्वीकार किया गया। आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों के परिजनों को मुआवजा देने, आश्रितों को रोजगार देने सहित उन किसानों के नाम पर एक स्मारक बनवाने की मांग की है।

किसानों पर दर्ज झूठे मामले बगैर शर्त हो वापस
हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, चंडीगढ़, मध्यप्रदेश सहित दूसरे राज्यों में हजारों किसानों को झूठे मामलों में फंसाया गया है। मोर्चा ने उनपर दर्ज मामले रदद् करने की मांग की है। परिवारों को मुआवजे और रोजगार के अवसरों के साथ समर्थन दिया जाना है। शहीदों को भी संसद सत्र में श्रद्धांजलि दी जानी चाहिए और उनके नाम पर एक स्मारक बनाया जाना चाहिए। हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, चंडीगढ़, मध्यप्रदेश आदि विभिन्न राज्यों में हजारों किसानों के खिलाफ सैकड़ों झूठे मुकदमे दर्ज किए गए हैं। सभी मामले बगैर शर्त वापस लेने की भी किसानों ने मांग की है।

लखीमपुर खीरी हत्याकांड के आरोपियों पर हो कार्रवाई
लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड में किसानों की हत्या के मामले केंद्रीय मंत्री को गिरफ्तार कर केंद्रीय मंत्रि परिषद से बर्खास्त करने की संयुक्त किसान मोर्चा ने मांग की है। शुक्रवार को जब प्रदर्शनकारी किसानों की जीत का जश्न मना रहे थे, उस दौरान भाकियू कादियां संघ के मलोट (पंजाब) के जसविंदर सिंह की मृत्यु हो गई। 26 नवंबर 2020 से वह टीकरी मोर्चा पर डटे हु थे। इस आंदोलन के लिए जीवन तक गंवा देने वाले किसानों को याद रखते हुए किसानों का यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।

राज्यों में ट्रैक्टर और बैलगाड़ी जुलूस निकालें किसान : एसकेएम

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि किसान आंदोलन की पहली वर्षगांठ पर 26 नवंबर को अलग-अलग राज्यों में किसान टैक्टर और बैलगाड़ियों का जुलूस निकालकर आंदोलन को धार देंगे। शनिवार को एक बयान जारी कर मोर्चा ने कहा कि दिल्ली से दूर के राज्यों की राजधानियों में ये जुलूस निकाले जाएंगे। मोर्चा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने तीन काले कानूनों को वापस लेने की घोषणा की है लेकिन वह किसानों की अन्य मांगों पर चुप रहे। 

एसकेएम ने कहा, आंदोलन के दौरान 670 किसान शहीद हुए लेकिन भारत सरकार ने अब तक उनके बलिदान का संज्ञान नहीं लिया है। इन शहीदों के परिवारों को मुआवजा और रोजगार के अवसर मिलने चाहिए। शहीद किसानों को संसद के सत्र के दौरान श्रद्धांजलि दी जानी चाहिए और उनकी याद में एक स्मारक बनाया जाए। हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश तथा दूसरे राज्यों में हजारों किसानों पर मामले दर्ज किए गए हैं। इन सभी मुकदमों को बिना शर्त वापस लिया जाए।

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