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Sahibabad : इत्र बनाने की फैक्टरी में लगी आग, कर्मियों ने छत से कूदकर बचाई जान, जांच में मिली मानकों में कमी
Mon, 07 Apr 2025 05:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, साहिबाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, साहिबाबाद
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 07 Apr 2025 05:55 AM IST
सार
आग ने पास में ही संचालित रोप-वे लिफ्ट निर्माता फैक्टरी जेपीएस इंजीनियरिंग को भी चपेट में ले लिया। फैक्टरियों में सो रहे कर्मचारियों ने छतों से कूदकर अपनी जान बचाई।
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आग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
थानाक्षेत्र के लोनी रोड स्थित औद्योगिक क्षेत्र के साइट दो में संचालित अगरबत्ती में इस्तेमाल होने वाला इत्र बनाने की फैक्टरी गुप्ता एरोमेटिक में रविवार तड़के करीब तीन बजे अचानक आग धधक गई। आग ने पास में ही संचालित रोप-वे लिफ्ट निर्माता फैक्टरी जेपीएस इंजीनियरिंग को भी चपेट में ले लिया। फैक्टरियों में सो रहे कर्मचारियों ने छतों से कूदकर अपनी जान बचाई।
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सूचना पर पहुंची अग्निशमन विभाग की टीम ने 12 वाटर व फॉम टेंडर की मदद से आग पर काबू पाया। दोनों फैक्टरियों में अग्निशमन मानकों की कमी भी शुरुआती जांच में सामने आई है। हालांकि आग पहले किस फैक्टरी में लगी और किस वजह से लगी इसकी पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।
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मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल ने बताया कि पूर्वी दिल्ली के शाहदरा निवासी संजीव गुप्ता की गुप्ता एरोमेटिक नाम से फैक्टरी संचालित होती है। फैक्टरी में अगरबत्ती व धूपबत्ती और कॉस्मेटिक उत्पादों में इस्तेमाल होने वाला इत्र बनाया जाता है। यहां से यह इत्र को देश के अलग-अलग राज्यों में सप्लाई किया जाता है। इसके ठीक पास सोनीपत निवासी प्रदीप की रोप-वे लिफ्ट बनाने की फैक्टरी है।
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सीएफओ ने बताया कि रविवार सुबह करीब तीन बजे वैशाली फायर स्टेशन पर फैक्टरियों में आग लगने की सूचना मिली थी। इसके बाद वैशाली फायर स्टेशन से तीन, कोतवाली से तीन और लोनी से एक वाटर व फॉम टेंडर मौके पर बुलाकर आग बुझाने का काम शुरू हुआ। लगातार बढ़ती आग ने पास में ही स्थित पैकेज वाटर सप्लाई प्लांट तक भी लपटें पहुंची और छत पर रखे तीन पानी के टैंकर व प्लास्टिक का कबाड़ जलाकर राख कर दिया। आग को बुझाने के लिए सीएफओ ने गौतमबुद्ध नगर से दो, हापुड़ से एक और शिप्रा मॉल से एक फायर टेंडर मंगाया।
इत्र बनाने के लिए फैक्टरी में रखे केमिकल की वजह से जानलेवा धुआं दमकल टीम की रुकावट बना, लेकिन बीए सेट का इस्तेमाल कर दमकल कर्मियों ने करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इत्र निर्माता कंपनी में शाम को छह बजे के बाद काम बंद हो जाता है। फैक्टरी में करीब 10-12 कर्मचारी काम करते हैं। एक दंपती देख-रेख के लिए रहते हैं।
कर्मचारी राजेंद्र ने बताया, हादसे के समय वह फैक्टरी के ऊपर बने कमरे में सो रहे थे। आग का पता तो उन्हें नहीं चला लेकिन जब लोगों का शोर मचना शुरू हुआ तब वह पड़ोसियों की मदद से दूसरी छत पर सीढ़ी लगाकर फैक्टरी से निकल पाए। वहीं फैब्रिकेशन फैक्टरी में सो रहे करीब चार-पांच कर्मचारियों ने भी दीवार कूदकर जान बचाई।