दिल्ली चुनाव को लेकर RSS का अहम फैसला!
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महाराष्ट्र और हरियाणा चुनाव में भाजपा के बेहतर प्रदर्शन के संकेत मिलने के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने पार्टी को दिल्ली में भी चुनाव की तैयारी करने की सलाह दी है। आरएसएस का कहना है कि फरवरी 2014 से निलंबित चल रही दिल्ली विधानसभा को भंग कर यहां भी चुनाव होने चाहिए।
दिल्ली भाजपा के कुछ नेता चुनावों में जाने से कतरा रहे हैं और सरकार बनाने की वकालत कर रहे हैं लेकिन पार्टी सूत्रों के अनुसार इस मामले में आरएसएस का नजरिया एकदम विपरीत है।
संघ परिवार का मानना है कि चुनाव करा कर दिल्ली में सरकार बनाना भाजपा के लिए ज्यादा बेहतर साबित होगा। इससे पार्टी की छवि को भी नुकसान नहीं होगा।
'मोदी मैजिक' के सहारे भाजपा!
इंडिया टुडे के अनुसार, भाजपा के कुछ नेताओं और आरएसएस के वरिष्ठ रणनीतिकारों के बीच शनिवार को एक मीटिंग हुई। इसमें भैयाजी जोशी भी शामिल थे। पार्टी के एक नेता ने बताया कि आरएसएस स्पष्ट रूप से यह कह चुका है कि वर्तमान परिस्थतियों में राजधानी में सरकार बनाना ठीक नहीं है। इससे लोगों के बीच गलत संदेश जाएगा।
आरएसएस का मानना है कि महाराष्ट्र और हरियाणा दोनों चुनावों में भाजपा को जीत हासिल होगी। साथ ही दिल्ली में भी पार्टी के प्रति लोगों का रुझान ठीक है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही भाजपा, 19 अक्तूबर को दोनों राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद दिल्ली में भी चुनाव कराने की घोषणा कर सकती है।
दोनों राज्यों में भाजपा ने अब तक अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम तय नहीं किया है। पार्टी यहां पूरी तरह मोदी मैजिक पर निर्भर है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, राज्यों के चुनाव परिणामों से ही तय होगा कि पार्टी को चुनाव में जाना चाहिए या नहीं।
मोदी का फैसला होगा अंतिम
राजधानी में वर्तमान राजनीति परिस्थितियों में सरकार बनानी चाहिए या नहीं इसे लेकर भी पार्टी में काफी चर्चा हो चुकी है। हालांकि इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही अंतिम फैसला लेना है।
पार्टी के कई नेता फिलहाल चुनाव कराने के पक्ष में नहीं हैं। उनका मानना है कि अभी भाजपा को सरकार बनानी चाहिए। चुनाव में जाने से हार का खतरा भी है।
वहीं दूसरी ओर ज्यादातर नेता यह मानते हैं कि बिना पूर्ण बहुमत या किसी अन्य पार्टी के समर्थन के सरकार बनाना संभव नहीं है। अगर पार्टी सरकार बनाती है तो इससे वोटरों के बीच गलत संदेश जाएगा और इसका नुकसान उन्हें भविष्य में होने वाले चुनावों में उठाना पड़ेगा।
बता दें कि तीन विधायकों के सांसद निर्वाचित होने के बाद पार्टी के विधायकों की संख्या कुल 28 रह गई है। 70 विधायकों वाली विधानसभा में अकाली दल के एक विधायक को मिलाकर इनकी संख्या 29 है।