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वाड्रा ने किया बड़ा 'खेल', उड़ीं नियम कानून की धज्जियां!

Fri, 10 Oct 2014 01:53 PM IST
Updated Fri, 10 Oct 2014 01:53 PM IST
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robert vadra breaks all rule for his guesthouse building.

हरियाणा की हुड्डा सरकार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर किस कदर मेहरबान है इसका अंदाजा आपको गुड़गांव में बने उनके दो गेस्ट हाउस को देखकर लग जाएगा। सरकार ने वाड्रा को फायदा पहुंचाने के लिए हर एक नियम को नजरअंदाज किया।

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रिपोर्ट के मुताबिक, गुड़गांव के दो प्लॉटों में बन रहे वाड्रा के गेस्ट हाउसों, जिनमें से एक वाड्रा के नाम है तो दूसरा किसी निजी कंपनी के नाम, का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अब चेंज ऑफ लैंड यूज के लिए आवेदन किया गया है।
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वाड्रा की ये बिल्डिंग पहले रिहायसी उपयोग के उद्देश्य से बनाई गई थी और अब इसे बदलकर व्यावसायिक करने का आवदेन दिया गया है, जोकि हर स्तर पर गैरकानूनी है।

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ऐसे हुआ वाड्रा के घोटाले का खुलासा

robert vadra breaks all rule for his guesthouse building.

टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गुड़गांव के रहने वाले धर्मवीर यादव की ओर से 2013 में दायर की गई एक आरटीआई में इस बात का खुलासा हुआ है कि नवंबर 2010 में दोनों बिल्डिंग (N29, N30) के लिए अलग-अलग प्लान मंजूर किए गए थे लेकिन बाद में दोनों का निर्माण एक साथ पूरा किया गया। 2011 में शुरू हुए निर्माण के बाद 2014 में इसका काम पूरा हुआ।

इसके बाद कॉलोनी में रहने वाले सतपाल ठाकरन ने आरटीआई के माध्यम से बिल्डिंग के बारे में जानकारी लेनी चाही लेकिन वाड्रा के दबाव के चलते अधिकारियों ने इसका जवाब नहीं दिया।

हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HUDA), गुड़गांव नगर निगम (MCG) और जिला नगर योजनाकार (DTP) से पत्राचार के जरिए मांगी गई जानकारी में इस बात का खुलासा हुआ कि वाड्रा के लिए किस कदर हर स्तर पर नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं।

नगर और ग्राम योजना विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पहचान न जाहिर करने की शर्त पर कहा कि नियमों के मुताबिक किसी भी प्लॉट का न तो चेंज ऑफ लैंड यूज आवेदन स्वीकार किया जा सकता और न ही दो अलग-अलग व्यक्तियों के प्लॉटों को एक साथ मिलाकर गेस्ट हाउस चलाने की अनुमित दी जा सकती। वाड्रा के मामले में इन दोनों ही बातों का खुला उल्लंघन किया गया है।

कौन देगा इन 2 सवालों के जवाब?

robert vadra breaks all rule for his guesthouse building.

नियमों के अनुसार, एक रिहायसी प्लॉट पर गेस्ट हाउस चलाने की अनु‌मति नहीं दी जा सकती और न ही चेंज ऑफ लैंड यूज पास किया जा सकता। इस मामले में दो सवाल सबसे अहम हैं-

1- वाड्रा के प्लॉट से जुड़ा प्लॉट N30 किसके नाम पर है, उसका असली मालिक कौन है?
2- दो अलग-अलग प्लॉट को मिलाकर एक करने का बिल्डिंग प्लान कब जारी किया गया।

डीटीपी ऑफिस सूत्रों के अनुसार, दोनों प्लॉटों के लिए नवंबर 2010 में अलग-अलग बिल्डिंग प्लान जारी किया गया था। प्लॉट पर गेस्ट हाउस के निर्माण के बारे में नगर और ग्राम योजना विभाग को 2012 में पता चला लेकिन उस वक्त वाड्रा ने चेंज ऑफ लैंड यूज के लिए आवेदन क्यों नहीं किया यह भी बड़ा सवाल है।

ठाकरन ने दावा किया है कि उन्होंने यादव के साथ खुद जाकर बिल्डिंग को देखा है। इसमें अंदर करीब 25 कमरे हैं और दोनों प्लॉटों को मिलाकर इन्हें बनाया गया है।

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