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कॉप-14: 2030 तक बंजर भूमि को हराभरा करने के वादे से पलट नहीं सकेंगे देश, भारत के प्रयासों को सराहा

Sat, 14 Sep 2019 03:25 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 14 Sep 2019 03:25 AM IST
सार

  • सम्मेलन के अंतिम दिन 196 देशों और यूएनसीसीडी के आठ हजार प्रतिनिधियों ने दिल्ली घोषणा को स्वीकार किया
  • देशों ने बंजर भूमि की समस्या से निपटने को हर खेत को पानी, हर बूंद के साथ ज्यादा उपज का नारा दिया
  • दुनिया की 25 फीसदी धरती बंजर है और भारत की 29 फीसदी से ज्यादा धरती बंजर है।

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Resolution of ending wastelands by 2030 and Indian efforts appreciated in COP 14 
सम्मेलन को संबोधित करते वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूएनसीसीडी के कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज (कॉप) के 14वें सम्मेलन में 2030 तक दुनिया से बंजर भूमि को खत्म करने का संकल्प लिया गया। ग्रेटर नोएडा में शुक्रवार को सम्मेलन के अंतिम दिन 196 देशों और यूएनसीसीडी के आठ हजार प्रतिनिधियों ने दिल्ली घोषणा को स्वीकार किया। देशों ने बंजर भूमि की समस्या से निपटने को हर खेत को पानी, हर बूंद के साथ ज्यादा उपज का नारा दिया।

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सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले देशों ने एक सुर में माना कि भूमिक्षरण बड़ी आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय समस्या है। देशों को स्वेच्छा से बंजर हो रही धरती को हराभरा बनाने की जरूरत है। कार्यकारी महासचिव इब्राहिम थियू ने कहा कि दिल्ली घोषणा एक शक्तिशाली दस्तावेज है, जो आने वाले वर्षों में बंजर भूमि को खत्म करने के मिशन को दिशा और दशा देगा। 
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सम्मेलन में कुल 35 फैसले लिए गए, जिनमें अंतरराष्ट्रीय वित्त सहायता के अलावा देशों से लचीली वित्त प्रणाली अपनाने और निजी माध्यमों की मदद से लक्ष्य प्राप्त करने को कहा गया है। ताकि पर्यावरण अनुकूल रोजगार सृजित हो सकें।
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केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने सम्मेलन के अंतिम बतौर कॉप अध्यक्ष कहा कि भारत ने जो लक्ष्य तय किया है, वह तय समय से पूरा करेगा। 

भारत के प्रयासों की सराहना
कॉप-14 ने भारत द्वारा उठाए जा रहे कदमों का स्वागत करते हुए कहा, राष्ट्रीय ग्रामीण गारंटी योजना, पीएम कृषि योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड खासा अहम है। भारत ने बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के लक्ष्य को 2.6 हेक्टेयर तक बढ़ाने का फैसला सराहनीय है।


विश्व में 25 फीसदी धरती बंजर
दुनिया की 25 फीसदी धरती बंजर है। भारत की 29 फीसदी से ज्यादा धरती बंजर है। इसके लिए 450 अरब डॉलर की जरूरत है। अभी तक विकसित देश विकासशील देशों की आर्थिक सहायता करते थे। पहली बार निजी भागीदारी और रोजगार सृजन की बात की गई है। भारत के पर्यावरण मंत्री ने बताया कि  अकेले भारत 75 लाख रोजगार  बंजर धरती को उपजाऊ बनाकर करेगा।

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