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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Rekha gupta becomes the first leader to take charge of Delhi after coming out of the school of politics.

CM Delhi : राजनीति की पाठशाला से दिल्ली के सियासी शिखर पर पहुंचीं रेखा गुप्ता, यह है अलका लांबा से कनेक्शन

Thu, 20 Feb 2025 05:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 20 Feb 2025 05:24 AM IST
सार

रेखा गुप्ता ने 1995 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से चुनाव लड़ा और महासचिव के पद पर काबिज हुईँ। इसके बाद उन्होंने कभी मुड़कर पीछे नहीं देखा।

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Rekha gupta becomes the first leader to take charge of Delhi after coming out of the school of politics.
रेखा गुप्ता और अलका लांबा : अलका लांबा द्वारा वर्ष 1995 की एक तस्वीर साझा की गई है जिसमें दिल्ली की नई सीएम रेखा गुप्ता भी दिख रही हैं...

विस्तार

राजनीति की प्राथमिक पाठशाला कहे जाने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव (डूसू) से रेखा गुप्ता का सियासी सफर शुरू हुआ। रेखा गुप्ता ने 1995 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से चुनाव लड़ा और महासचिव के पद पर काबिज हुईँ। इसके बाद उन्होंने कभी मुड़कर पीछे नहीं देखा। एबीवीपी और भाजपा में अलग-अलग पदों की जिम्मेदारी संभालते हुए वे सीएम के पद तक पहुंचने में कामयाब रहीं। डूसू से निकलीं वे पहली नेता हैं, जो मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालेंगी।

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दरअसल, डूसू से निकले छात्र नेताओं ने नगर निगम, विधानसभा ही नहीं, बल्कि लोकसभा और राज्यसभा तक अपनी राजनीति का डंका बजाया है। 68 साल के इतिहास में डूसू ने देश को कई काबिल नेता दिए हैं। अरुण जेटली, विजय गोयल, सुभाष चोपडा, अजय माकन और पूर्णिमा सेठी ऐसे ही नाम हैं जिन्होंने डूसू के बाद राष्ट्रीय राजनीति तक कई नए मुकाम हासिल किए। डूसू की शुरुआत वर्ष 1956 में हुई थी, तब से अब तक लगातार डूसू से नेता निकले और देश की मुख्यधारा की राजनीति में जुड़ते रहे।
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एनएसयूआई की ओर से अजय माकन, सुभाष चोपड़ा, हरचरण सिंह जोश, हरिशंकर गुप्ता, अल्का लांबा, नीतू वर्मा, शालू मलिक और बहुत से छात्र नेताओं ने राष्ट्रीय राजनीति में चमक बिखेरी है। वर्ष 1974 में एबीवीपी के टिकट से दिवंगत अरुण जेटली डूसू के अध्यक्ष बने। छात्र राजनीति के बाद वह भाजपा से होते हुए देश की राजनीति तक पहुंचे।
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राज्यसभा सांसद व केंद्रीय मंत्री भी रहे। इसी तरह एबीवीपी से वर्ष 1978 में डूसू अध्यक्ष रहे विजय गोयल ने केंद्रीय मंत्री बनने का सफर तय किया। गोयल भी तीन बार लोकसभा व एक बार राज्यसभा सांसद रहे। इसके अलावा भाजपा संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर भी रह चुके हैं।

कांग्रेस के अजय माकन वर्ष 1986 में डूसू अध्यक्ष बने। उन्होंने डूसू से निकलकर सक्रिय राजनीति में भाग लिया। वे विधायक, दिल्ली के मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, लोकसभा के दो बार के सांसद व केंद्र सरकार में भी रहे। 1968 में डूसू अध्यक्ष रहे हरचरण सिंह जोश ने भी सक्रिय राजनीति में भाग लिया और विधानसभा तक पहुंचे। वर्ष 1971 में डूसू अध्यक्ष बने सुभाष चोपड़ा ने भी विधानसभा तक का सफर तय किया। इसके बाद 1994 में अध्यक्ष रहीं शालू मलिक, 2001 में अध्यक्ष बनीं नीतू वर्मा ने निगम में झंडा गाड़ा, जबकि 2008 में पूर्व अध्यक्ष अनिल चौधरी भी विधानसभा पहुंचे।

अलका लांबा के साथ रेखा गुप्ता ने ली थी शपथ
डूसू में सहसचिव बनी पूर्णिमा सेठी भी विधानसभा तक पहुंची। 2007 में गौरव खारी नगर निगम पहुंचे। अनिल झा ने भी विधानसभा का सफर तय किया। 1995 में एनएसयूआई के टिकट से डूसू अध्यक्ष बनीं अलका लांबा बाद में आप से विधायक बनीं। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का हाथ थाम लिया। 1995 में ही रेखा गुप्ता भी डूसू महासचिव बनीं थीं। सीएम पद के लिए रेखा गुप्ता के नाम की घोषणा होते ही अलका ने एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर शेयर की। इसमें रेखा गुप्ता को बधाई देते हुए उन्होंने तस्वीर को यादगार बताया। उन्होंने रेखा गुप्ता के साथ डूसू पदाधिकारी के तौर पर शपथ ली थी। इधर, एबीवीपी के टिकट से 2008 में डूसू अध्यक्ष बनी नुपूर शर्मा विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ चुनाव लड़ी थीं, लेकिन जीत नहीं सकीं।

जींद से 50 साल पहले दिल्ली में बस गया था परिवार

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जींद के जुलाना के नंदगढ़ गांव से हैं। नंदगढ़ में रेखा गुप्ता के दादा मनीराम और परिवार के लोग रहते थे। पिता जयभगवान बैंक मैनेजर बने तो दिल्ली में ड्यूटी थी। इस कारण वे दिल्ली में परिवार के साथ जा बसे।

नंदगढ़ गांव के बलवान नंबरदार ने बताया कि 50 साल पहले तक रेखा के दादा मनीराम जिंदल, परदादा गंगाराम की गांव में दुकान थी। इसके बाद उन्होंने जुलाना में आढ़त की दुकान की। गांव की जमीन को बेचकर वह जुलाना में रहने लगे थे। जिंदल परिवार के लोगों ने गांव में शिव मंदिर भी बनाया हुआ है। यहां हर वर्ष परिवार के लोग पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। गांव में रेखा के परिवार का बेहद अच्छा व्यवहार रहा। रेखा के पिता जयभगवान 1972-73 में मैनेजर बने तो उनकी ड्यूटी दिल्ली में लग गई थी, इसलिए वे दिल्ली में शिफ्ट हो गए। 

छात्र जीवन से राजनीति में सक्रिय
रेखा गुप्ता का जन्म 19 जुलाई 1974 को हुआ था। छात्र जीवन से ही रेखा राजनीति में सक्रिय हो गई थीं। रेखा के पति मनीष स्पेयर पार्ट का बिजनेस करते हैं। रेखा ने इससे पहले भी दो बार विधानसभा चुनाव लड़ा। पहली बार वे 11 हजार वोटों से हारीं तो पिछली बार आप की वंदना से 4500 वोटों से हार गईं थीं। इस बार वंदना को उन्होंने बड़े वोटों के अंतर से हराकर इतिहास रच दिया। इस बार शालीमार बाग सीट से आप की वंदना को 38605 वोट मिले तो रेखा गुप्ता को 68200 वोट मिले।

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