जेएनयू छात्रसंघ चुनाव 2019 : सात सालों में पहली बार रिकॉर्ड 68 फीसदी हुआ मतदान
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दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्रसंघ चुनाव के इतिहास में पहली बार छात्रों की याचिका पर मतदान के बाद परिणाम जारी करने पर अदालत ने रोक लगा दी है। इससे पूर्व, 2018 की तर्ज पर 2019 में रिकॉर्ड 68 फीसदी मतदान हुआ।
छात्रसंघ चुनाव के इतिहास में वर्ष 2007 और 2018 के बाद सर्वाधिक मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग किया। मतदान सुबह 10 बजे से शाम 5:30 बजे तक चला।
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शुक्रवार रात 10 बजे से मतगणना होनी है। चुनाव के नतीजे शनिवार आधी रात या फिर रविवार सुबह आने थे। दिल्ली हाईकोर्ट की रोक के चलते अब चुनाव समिति रिजल्ट घोषित नहीं करेगी।
जेएनयू चुनाव समिति के आयुक्त शशांक पटेल के मुताबिक, स्कूल ऑफ इन्वायरमेंटल स्टडीज (एसईएस), स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज (एसआईएस), स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज, लिट्रेचर एंड कल्चर स्टडीज (एसएलएलसी) और स्कूल ऑफ सोशल साइंस (एसएसएस) में मतदान केंद्र बनाए गए थे। कैंपस में मतदान प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण रही। कहीं से किसी तरह के विरोध या वाद-विवाद की सूचना नहीं मिली।
नीले और लाल झंडे के बीच तिरंगा
पहले चरण में 35 फीसदी मतदान : सुबह 10 से 1 बजे तक करीब 35 फीसदी मतदान हुआ। दोपहर ढाई से साढ़े पांच बजे तक 33 फीसदी मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया। सुबह मतदान केंद्र के बाहर लंबी लाइनें लग गईं, लेकिन 11 बजे तक इनमें कमी आ गई। दोपहर साढ़े 12 बजे के करीब फिर मतदाताओं की लंबी लाइन लग गई। शाम 4 बजे के बाद ज्यादा मतदान हुआ।
नीले और लाल झंडे के बीच तिरंगा
मतदान केंद्रों के बाहर नीले और लाल झंडे के बीच एबीवीपी तिरंगा लेकर मतदाताओं को जागरूक करता दिखी। बापसा नीले झंडे के साथ तो वामपंथी एकता पैनल (आइसा, एआईएसएफ, एसएफआई, डीएसफ) लाल झंडे के साथ डफली पर अपने प्रत्याशियों के नाम पर आधारित तैयार किए गाने से मतदाताओं से वोट मांगते दिखे। एबीवीपी तिरंगा हाथ में लेकर ढोल, मंजीरे व चिमटे से देशभक्ति का रंग भरती रही। उधर, राजद प्रत्याशी ने लालटेन के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वहीं, एनएसयूआई हाथ का पोस्टर लेकर मतदाता जागरूकता रैली निकालता रहा।
दिनभर लगाए जाते रहे हार-जीत के कयास
कैंपस में दिनभर मतदान के दौरान हार-जीत के कयास लगाए जाते रहे। सीधा मुकाबला लेफ्ट वर्सेज एबीवीपी के बीच बताया गया। एबीवीपी सेंट्रल से लेकर काउंसलर पद पर जीत के कयास लगा रही है। मतदान के दौरान हर कोई अपने मनपसंद उम्मीदवार का समर्थन करता नजर आया। वहीं छात्र एक-दूसरे से यह जानने में भी जुटे रहे कि उन्होंने किसे वोट दिया।
लेफ्ट की डफली और भगवा का मजीरा
मोदी लहर के चलते वर्ष 2014 और 2019 में केंद्र में भाजपा की सरकार है। मोदी लहर ही कमाल था कि 14 साल के बाद वर्ष 2014 छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी ने लाल दुर्ग में भगवा फहराया था।
सेंट्रल पैनल से लेकर काउंसलर पद तक की रेस में एबीवीपी के वोट बैंक में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। इसी के चलते लाल दुर्ग कहे जाने वाले कैंपस में अब लेफ्ट की डफली के साथ भगवा का मजीरा भी खूब धूम मचाता है। लेफ्ट संगठनों के छात्र डफली से मतदाताओं को रिझाते रहे तो एबीवीपी ने शंखनाद कर शुभ काम करने का संदेश दिया।
शंखनाद के साथ ढोल व मजीरे की थाप पर भजनों से जीत के दावे करते हुए मतदाताओं को रिझाया गया। जेएनयू में अब देश के हर कोने से छात्र पढ़ने आते हैं। इसी के चलते छात्र संगठनों ने देश के हर राज्य के छात्रों को प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतारा है। देशभर के प्रत्याशी मैदान में रहने के कारण जेएनयू कैंपस में मिनी इंडिया की झलक भी दिखी।
वर्ष मतदान (फीसदी)
2007 68.43
मार्च 2012 58.7
सितंबर 2012 60
2013 56
2014 55
2015 53.33
2016 59.60
2017 58.69
2018 68