मोबाइल फोन में छुपा है बिसाहड़ा बवाल का असल सच
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बिसाहड़ा के बवाल की असली वजह दो युवक हैं जिन्होंने मंदिर के पुजारी से लाउडस्पीकर के जरिये जबरन घोषणा करवाई। ये युवक कौन हैं, इसका खुलासा अभी तक नहीं हो सका है।
वहीं, पुलिस ने इस मामले में जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया है या हिरासत में लिया है उनकी पुजारी से पहचान कराई गई है। पुजारी ने इनमें से किसी को भी घोषणा कराने वाले युवकों के रूप में पहचानने से इंकार किया है।
पुलिस अब बवाल का सच जानने के लिए गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल खंगाल रही है। दादरी अनुराग सिंह का कहना है कि मामले को लेकर अब तक जितने भी युवकों को गिरफ्तार करके या हिरासत में लिया गया है।
पुजारी का कहना है कि दो आरोपी युवक नहीं थे शामिल
पुजारी ने इन्हें पहचानने से ही इंकार कर दिया है। पुजारी का कहना है कि इनमें वह दो आरोपी युवक नहीं हैं। ऐसे में आशंका है कि घोषणा कराने वाले या आरोपियों से अलग कोई अन्य लोग हैं या जिन दो युवकों की पुलिस तलाश रही है वे इस गांव के नहीं हैं।
आसपास गांवों में भी उन्हें तलाशा जा रहा है। वहीं, गिरफ्तार छह आरोपियों और उसके अलावा हिरासत में लिए लोगों के मोबाइल कहां हैं। इसे लेकर पुलिस के अफसर चुप्पी साधे हैं।
हालांकि, सूत्रों का कहना है कि पुलिस गोपनीय रूप से कुछ युवकों से बरामद हुए मोबाइल को पुलिस खंगाल रही है। पुलिस को कुछ लोगों ने सोशल मीडिया के जरिये मामले को बढ़ाने का भी संकेत दिया था। इसे लेकर ही गिरफ्तार युवकों के मोबाइल खंगाले जा रहे हैं। पुलिस को इनसे साक्ष्य मिलने की उम्मीद है।
एक झटके में टूट गया भाईचारा
बिसाहड़ा गांव क्षेत्र की साठा चौरासी की राजनीति का केंद्र बिंदु रहा है। ठाकुर बहुल इस गांव में मुस्लिम परिवार गिने चुने हैं लेकिन दशकों से यहां सबसे बीच भाईचारा कायम रहा है। हालांकि एक झटके में ही भाईचारा खत्म हो गया। अब गांव का माहौल पहले जैसा नहीं रहा।
बिसहाड़ा की जनसंख्या करीब 14 हजार है। जबकि मतदाताओं की संख्या छह हजार है। गांव में 50 परिवार मुस्लिम समुदाय से है। एक परिवार गुर्जर बिरादरी से ही। सबसे अधिक ठाकुर बिरादरी से है। उनकी संख्या करीब 10 हजार है।
बाकी ब्राह्मण, दलित समेत दूसरी बिरादरी के हैं। गांव में आर्थिक रूप से ठाकुर समुदाय ही संपन्न है। गांव के 15 से 20 फीसदी युवक दिल्ली और गाजियाबाद में नौकरी करते हैं। गांव के अधिकांश परिवारों की भरण पोषण का जरिया कृषि है। हर परिवार के दो से तीन सदस्य खेतों में मेहनत करके ही अपने परिवार की जीविका चला रहे हैं। गांव के लोग आर्थिक रूप से संपन्न है।
राजनीतिक रूप से बिसाहड़ा गांव के लोग काफी सक्रिय रहे हैं। हर चुनाव में क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभाते रहे है। उनके चुनावी या दूसरे फैसलों का संदेश साठा चौरासी के हर गांव के लोग मानते रहे हैं। गांव में राणा संग्राह सिंह इंटर कॉलेज दादरी क्षेत्र का सबसे पुराना कॉलेज है। जनपद में हर साल हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा परिणाम में इस कॉलेज के छात्र या छात्राओं को टॉप टेन में रही है।
सालों पहले हिंदू समुदाय के लोगों ने बनवाई थी मस्जिद
गांव की आपसी तालमेल इस बात से लगाया जा सकता है। गांव की मस्जिद बनाने के लिए अफलातून नामक व्यक्ति ने 250 गज जमीन दी थी। वहीं ईदगाह बनाने के लिए अपने खेत की पांच बीघा जमीन दी थी। उसकी जमीन देने के बाद भी भवन निर्माण में भी गांव के कुछ लोगों ने आर्थिक मदद की थी। मदद के चलते ही ईदगाह और मस्जिद बनाई गई थी।
गांव में किसी भी समुदाय धर्म या जाति को कोई त्यौहार, शादी या कोई समारोह होता है या कोई गमी होती है सभी लोग शामिल होते हैं। गांव के लोग एक परिवार के सदस्यों की तरह रहते रहे है। इसको सभी बिरादरी के लोगों ने माना है।
अनुज नामक एक शख्स की ट्विटर पर प्रोफाइल देखने के बाद प्रशासन ने उसकेखिलाफ गंभीर धारा में रिपोर्ट दर्ज कर दी और डीएम ने इसकी सूचना बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर दी। उसके एक घंटे बाद ही अनुज ने तीन चार ट्विीट बिसाहड़ा के संबंध में किए और उसने प्रशासन को चैलेंज करते हुए लिखा कि मैं जमानत करा लूंगा।