Delhi: डीडीए के मैदानों में धार्मिक आयोजन करना हुआ महंगा, करीब सात गुना बढ़ी सिक्योरिटी फीस
जानकारी के मुताबिक, दो साल पहले डीडीए के मैदान की बुकिंग के लिए क्षेत्रफल के अनुसार सिक्योरिटी राशि के तौर पर दो से तीन लाख जमा कराने होते थे। इस साल सिक्योरिटी राशि के रूप में 16 से 20 लाख रुपये तक मांगे जा रहे है।
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पार्क के आकार व सुविधा के आधार पर पहले यह राशि 2-3 लाख रुपये होती थी। डीडीए के इस फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है। भाजपा ने डीडीए से इसे वापस लेने की मांग की है। दिल्ली रामलीला महासंघ के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने बताया कि दो साल पहले डीडीए के मैदान की बुकिंग के लिए क्षेत्रफल के अनुसार सिक्योरिटी राशि के तौर पर दो से तीन लाख जमा कराने होते थे। इस साल सिक्योरिटी राशि के रूप में 16 से 20 लाख रुपये तक मांगे जा रहे है, जबकि उनके लिए इतनी राशि देना मुनासिब नहीं है।
दरअसल वह चंदा करके रामलीला मंचन कराते है। डीडीए कोई भी गलती बताकर रामलीला कमेटियों की सिक्योरिटी राशि जब्त कर लेती है। दूसरी ओर डीडीए ने आयोजन के दौरान खाना नहीं पकाने और कूड़े कचरे के लिए प्लांट लगाने की शर्त लगाई है। इस शर्त का भी रामलीला महासंघ विरोध कर रहा है। उन्होंने कहा कि केवल 11 दिन मैदान का उपयोग होता है। डीडीए की शर्तों के विरोध में रणनीति तय करने के लिए समस्त रामलीला कमेटियों के पदाधिकारी अगले सप्ताह बैठक करेंगे।
भाजपा ने की वापस लेने की मांग
भाजपा ने रामलीला आयोजन के लिए भूमि आवंटन की बढ़ाई गई सिक्योरिटी राशि को वापस लेने की मांग की है। इसे लेकर दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना को एक पत्र भी लिखा है। जिसमें बताया है कि धार्मिक आयोजनों के लिए भूमि आवंटन की सिक्योरिटी राशि में लगभग 7 गुणा वृद्धि कर दी गई है। खाना नहीं पकाने समेत कई अव्यावहारिक शर्तें थोपी गई हैं जो व्यावहारिक नहीं हैं। प्रदेश भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा है कि पत्र में उपराज्यपाल से अपील की गई है कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के अव्यावहारिक शर्तो को हटवाएं।