...तो क्या मास्क पहनकर कलाकार करेंगे रामलीला का मंचन, दिशा निर्देशों के बाद आयोजकों में ऊहापोह
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नियम के मुताबिक सभी को मास्क पहनना और सामाजिक दूरी का पालन करना अनिवार्य है। गाइडलाइन के मुताबिक महज 100 लोगों को ही रामलीला मंचन देखने की अनुमति है, जबकि इतने तो रामलीला मंचन के कलाकार ही होते हैं। ऐसे में अनिश्चितता बनी हुई है।
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन के बाद रामलीला मंचन को लेकर कमेटियों में काफी उत्साह था, लेकिन सरकार की गाइडलाइन आने के बाद यह उत्साह धूमिल सा हो गया है। विश्व हिंदू परिषद खुद ही इस बार रामलीला के आयोजन को लेकर सक्रिय है।
मंगलवार को एक बैठक भी हुई, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग और सरकार की गाइडलाइन को देखते हुए आयोजन को लेकर कोई खास निर्णय नहीं हो पाया। अशोक विहार रामलीला कमेटी के सतीश गर्ग ने बताया कि 100 लोगों के लिए रामलीला का मंचन करने की अनुमति है।
ऐसे में सभी कमेटियां ऊहापोह की स्थिति में है। जबकि इस बार ज्यादा धूमधाम से मंचन करने की तैयारी थी। नवश्री रामलीला कमेटी से जुड़े राहुल ने बताया कि सरकार की गाइडलाइन नहीं बदली और कोरोना महामारी पर कंट्रोल नहीं हुआ तो सिर्फ राम की पूजा ही होगी।
मंचन रामलीला का हुआ भी तो इसे सोशल मीडिया के माध्यम से ही प्रसारित किया जाएगा। रामलीला समितियों का कहना है कि छोटे स्तर पर ही सही, लेकिन इस इस साल अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की शुरुआत को ध्यान में रखते हुए मंचन की अनुमति मिलनी चाहिए।
श्री राम धार्मिक लीला समिति त्रिनगर के महासचिव अनिल गर्ग ने कहा कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता के साथ बैठक में 100 लोगों को मंचन देखने की बात सामने आई। हालांकि अभी प्रोटोकॉल का इंतजार है।
रामलीला कमेटी के अर्जुन कुमार ने बताया कि अगर सरकार 100 लोगों को ही मंचन देखने की अनुमति देती है तो कमेटी हर दिन भगवान राम की पूजा का ही आयोजन करेगी। मंचन करने वाले कलाकारों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनकर अभिनय करना मुश्किल होगा।
कार्यक्रम स्थल के लिए आवेदन रामलीला कमेटियां कर रही है। कई अन्य कमेटियों का कहना है कि यू-ट्यूब चैनल पर पिछले साल की रामलीला का प्रसारण किया जा सकता है। द्वारका श्री रामलीला के मुख्य संरक्षक राजेश गहलोत ने कहा कि उपराज्यपाल अनिल बैजल को पत्र लिखकर रामलीला के आयोजन की अनुमति मांगी गई है।
10 दिन की जगह तीन दिन के लिए भी सुझाव मंचन के लिए दिया गया है। रामलीला कमेटियों ने इस साल रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के साथ-साथ कोरोना वायरस का पुतला जलाने की योजना बनाई है।