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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Questions raised over pollution control system; plans underway to step up monitoring

Delhi NCR News: प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्था पर सवाल, निगरानी बढ़ाने की तैयारी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 26 Oct 2026 08:41 PM IST
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गामड़ी में बंद परिसरों की जांच करेगा एमसीडी, अवैध इकाइयां मिलने पर कटेगी बिजली
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औद्योगिक अपशिष्ट जल और कचरा प्रबंधन भी चुनौती

ज्योति सिंह
नई दिल्ली। दिल्ली में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए उद्योगों की निगरानी से लेकर कचरे के निपटान तक कई व्यवस्थाएं लागू हैं, लेकिन इनके प्रभावी संचालन और नियमों के पालन की चुनौती बनी हुई है। पूर्वी दिल्ली के गामड़ी गांव में कथित अवैध औद्योगिक इकाइयों की जांच के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दोबारा संयुक्त निरीक्षण का निर्देश दिया है। वहीं, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की निर्धारित औद्योगिक इकाइयों को 30 नवंबर तक पीटीजेड कैमरे लगाने को कहा है। दिल्ली सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के आंकड़े भी औद्योगिक अपशिष्ट जल और ठोस कचरे के प्रबंधन में कमियों की ओर संकेत करते हैं।
गामड़ी गांव का मामला एनजीटी में वरुण गुलाटी बनाम केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं अन्य के नाम से चल रहा है। याचिका में आरोप है कि कुछ औद्योगिक इकाइयां वैध अनुमति के बिना संचालित हो रही हैं और धातु उपचार, निकेल इलेक्ट्रोप्लेटिंग, पिकलिंग, पाउडर कोटिंग, कांच पिघलाने, गैल्वनाइजिंग और कपड़ा रंगाई जैसी गतिविधियों से प्रदूषण फैला रही हैं।
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पहले निरीक्षण के दौरान कुछ परिसर बंद मिले थे। अब एनजीटी ने दोबारा संयुक्त निरीक्षण का आदेश दिया है। अधिकरण के निर्देशानुसार, अधिकृत नगर निगम अधिकारी जरूरत पड़ने पर बंद परिसरों को खुलवाकर जांच कर सकेंगे। निरीक्षण के समय पुलिस सहायता और एसडीएम की मौजूदगी सुनिश्चित करने को भी कहा गया है। संयुक्त समिति में बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड का प्रतिनिधि भी शामिल होगा। किसी इकाई के अवैध रूप से संचालित पाए जाने पर उसकी बिजली काटने के लिए शीघ्र कार्रवाई करनी होगी। समिति को अगली सुनवाई से कम-से-कम एक सप्ताह पहले रिपोर्ट सौंपनी है। मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी को होगी।
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अपशिष्ट जल और कचरे का दबाव
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, दिल्ली में पानी को प्रदूषित करने वाली 981 औद्योगिक इकाइयां दर्ज हैं। औद्योगिक अपशिष्ट जल की मात्रा 32.79 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) है, जबकि साझा अपशिष्ट जल शोधन संयंत्रों (सीईटीपी) की उपयोग दर महज 37.76 प्रतिशत है।
-राजधानी में रोजाना 11,862 टन ठोस कचरा पैदा होता है, लेकिन वास्तविक प्रसंस्करण 7,460.3 टन प्रतिदिन है। यह अंतर कचरे के वैज्ञानिक निपटान और प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने की जरूरत को रेखांकित करता है। दिल्ली में 28 औद्योगिक क्षेत्र हैं।


स्मॉग टावर का असर सीमित
कनॉट प्लेस में स्थापित स्मॉग टावर पर आईआईटी बॉम्बे के अध्ययन के मुताबिक, इसका प्रभाव सीमित दायरे में है। टावर से 20 मीटर तक पीएम 2.5 में 48 प्रतिशत और पीएम 10 में 56 प्रतिशत कमी दर्ज की गई। हालांकि, 100 मीटर से आगे प्रभाव घटकर 12-13 प्रतिशत रह गया, जबकि 500 मीटर से अधिक दूरी पर उल्लेखनीय असर नहीं मिला।
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