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जेएनयू विवादः क्या छात्रों के बहाने प्रोफेसर भी कर रहे हैं राजनीति? कुछ पर लगा हिंसा भड़काने का आरोप

Mon, 06 Jan 2020 07:34 PM IST
Abhishek Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhishek Singh Updated Mon, 06 Jan 2020 07:34 PM IST
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Question raising against JNU professor over violence
- फोटो : अमर उजाला

जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) में वामपंथी और एबीवीपी छात्रों के बीच विवाद बना हुआ है। सोमवार को दोनों ही वर्गों से जुड़े छात्र मीडिया के सामने आए और विवाद पर अपना पक्ष रखा। इस विवाद में अब जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के कुछ प्रोफेसरों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। दोनों ही वर्गों के विभिन्न छात्रों का आरोप है कि संस्थान के कुछ प्रोफेसरों ने भी छात्रों को उकसाने का काम किया। कुछ प्रोफेसरों ने छात्रों के मार्च को दिशा देने की भी कोशिश की।    

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ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष सईद वली उल्लाह ने अमर उजाला को बताया कि जेएनयू में प्रोफेसरों का एक ही संगठन होता था, लेकिन अब दक्षिणपंथी विचारधारा के प्रोफेसरों ने अपना अलग गुट बना लिया है। इसलिए छात्रों के हितों से जुड़े विषयों पर प्रशासन को दी जाने वाली राय में भी अब वैचारिक टकराव दिखने लगा है। सईद के मुताबिक छात्रों के ऊपर हुए हमलों के पहले कुछ प्रोफेसरों ने छात्रों को उकसाने का भी काम किया था। 
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वहीं जेएनयू विवाद में हिंसा का शिकार हुए एबीवीपी के छात्र मनीष जांगिर ने कहा कि संस्थान के वामपंथी प्रोफेसर भी इस हिंसा के पीछे अपनी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जेएनयू में रजिस्ट्रेशन का रविवार को अंतिम दिन था। छात्रों के विरोध को देखते हुए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का विकल्प दिया गया था। लेकिन संस्थान के इंटरनेट सेवा को बाधित कर छात्रों का रजिस्ट्रेशन रोकने की कोशिश की गई।
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इधर, आरोप है कि इंटरनेट के सर्वर को खराब करने के पीछे कुछ वामपंथी विचारधारा के प्रोफेसरों ने भूमिका निभाई। बाद में रविवार को पेरियार हॉस्टल में हुई हिंसा के दौरान भी कई प्रोफेसर छात्रों के मार्च को लीड करते हुए दिखाई पड़े थे। एबीवीपी नेताओं ने इस हिंसा के पीछे प्रोफेसरों की भूमिका की भी जांच की मांग की है।  

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