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दिल्ली: बारापुला बनकर तैयार हुआ तो जाम ने खोल दी डिजाइन की खामी, पिछली सरकार पर जमकर बरसे पीडब्ल्यूडी मंत्री
Wed, 07 Oct 2026 01:21 PM IST
Vijay Singh Pundir
आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vijay Singh Pundir
Updated Wed, 07 Oct 2026 01:21 PM IST
सार
बारापुला फेज-3 का मकसद सराय काले खां से मयूर विहार तक बेहतर और सिग्नल मुक्त कनेक्टिविटी देना था। परियोजना में लंबे समय तक देरी भी हुई। पीडब्ल्यूडी मंत्री ने कहा कि बारापुला पर मौजूदा जाम की बड़ी वजह डिजाइन है।
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पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बारापुला फेज-3 कॉरिडोर जिस मकसद से बनाया गया था, फिलहाल वही सड़क जाम की समस्या से जूझ रही है। उद्घाटन के बाद लगातार लग रहे जाम को लेकर बुधवार को सचिवालय में पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने पिछली आम आदमी पार्टी सरकार के समय तैयार किए गए डिजाइन पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि कॉरिडोर में पर्याप्त जगह होने के बावजूद सड़क को जरूरत के मुताबिक चौड़ा नहीं किया गया। अब सरकार ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव कर जाम कम करने की तैयारी कर रही है।
बारापुला फेज-3 का मकसद सराय काले खां से मयूर विहार तक बेहतर और सिग्नल मुक्त कनेक्टिविटी देना था। परियोजना में लंबे समय तक देरी भी हुई। पीडब्ल्यूडी मंत्री ने कहा कि बारापुला पर मौजूदा जाम की बड़ी वजह डिजाइन है। उनके मुताबिक पहले से बने बारापुला फ्लाईओवर की चौड़ाई अधिक है, जबकि नए हिस्से में लेन व्यवस्था ऐसी है कि आगे जाकर वाहनों को कम लेन में आना पड़ता है। इससे पीक ऑवर में दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर सड़क में दो-दो लेन और बनाई जातीं तो लंबे समय तक यातायात की जरूरत पूरी की जा सकती थी।
फुटपाथ हटाकर बढ़ेगी एक लेन
जाम को तत्काल कम करने के लिए सराय काले खां से आईटीओ तक फुटपाथ हटाकर एक अतिरिक्त लेन बनाने के सुझाव पर काम चल रहा है। मंत्री के मुताबिक ट्रैफिक पुलिस ने यह सुझाव दिया है। इसके अलावा दो-तीन अन्य सुझाव भी मिले हैं। सरकार ने इन बदलावों के लिए कंसल्टेंट भी तय किया है। मंत्री ने दावा किया कि अगले 10-15 दिन में जाम की स्थिति में कमी दिखाई देने लगेगी।
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गूगल मैप पर भी निर्भरता
मंत्री ने बताया कि सरकार की गूगल से भी बात हुई है। नई सड़क के ट्रैफिक पैटर्न को गूगल मैप के सिस्टम में पढ़ने और उसके हिसाब से रूट दिखाने में समय लगता है। हाल में बारापुला पर जाम को लेकर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ओर से भी पहले लेन मर्जिंग को समस्या बताया गया था, हालांकि बाद में जारी संशोधित सूचना में इस बिंदु का उल्लेख नहीं था।
640 करोड़ के भुगतान पर सवाल
प्रवेश साहिब सिंह ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान आर्बिट्रेशन के जरिए ठेकेदार को 640 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। उन्होंने इसे परियोजना की लागत और कामकाज से जुड़ा गंभीर सवाल बताया। मंत्री के मुताबिक जब मौजूदा सरकार सत्ता में आई, तब परियोजना का करीब 80 फीसदी भुगतान हो चुका था। सरकार ने बाकी काम करीब एक साल में पूरा कराकर इसे चालू कराया, लेकिन इसके बाद ट्रैफिक और डिजाइन से जुड़ी खामियां सामने आने लगीं।
डिजाइन पर राजनीतिक टकराव
मंत्री ने आरोप लगाया कि 2015 में तत्कालीन अरविंद केजरीवाल सरकार के समय परियोजना का डिजाइन तैयार कराया गया और भविष्य की ट्रैफिक जरूरतों को ध्यान में नहीं रखा गया। उनका कहना था कि सरकार और विभाग के पास कंसल्टेंट समेत पूरी तकनीकी व्यवस्था थी, इसके बावजूद सड़क की क्षमता सीमित रखी गई। अब सरकार का जोर मौजूदा सड़क में बदलाव कर ट्रैफिक दबाव कम करने पर है।
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बारापुला फेज-3 का मकसद सराय काले खां से मयूर विहार तक बेहतर और सिग्नल मुक्त कनेक्टिविटी देना था। परियोजना में लंबे समय तक देरी भी हुई। पीडब्ल्यूडी मंत्री ने कहा कि बारापुला पर मौजूदा जाम की बड़ी वजह डिजाइन है। उनके मुताबिक पहले से बने बारापुला फ्लाईओवर की चौड़ाई अधिक है, जबकि नए हिस्से में लेन व्यवस्था ऐसी है कि आगे जाकर वाहनों को कम लेन में आना पड़ता है। इससे पीक ऑवर में दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर सड़क में दो-दो लेन और बनाई जातीं तो लंबे समय तक यातायात की जरूरत पूरी की जा सकती थी।
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फुटपाथ हटाकर बढ़ेगी एक लेन
जाम को तत्काल कम करने के लिए सराय काले खां से आईटीओ तक फुटपाथ हटाकर एक अतिरिक्त लेन बनाने के सुझाव पर काम चल रहा है। मंत्री के मुताबिक ट्रैफिक पुलिस ने यह सुझाव दिया है। इसके अलावा दो-तीन अन्य सुझाव भी मिले हैं। सरकार ने इन बदलावों के लिए कंसल्टेंट भी तय किया है। मंत्री ने दावा किया कि अगले 10-15 दिन में जाम की स्थिति में कमी दिखाई देने लगेगी।
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गूगल मैप पर भी निर्भरता
मंत्री ने बताया कि सरकार की गूगल से भी बात हुई है। नई सड़क के ट्रैफिक पैटर्न को गूगल मैप के सिस्टम में पढ़ने और उसके हिसाब से रूट दिखाने में समय लगता है। हाल में बारापुला पर जाम को लेकर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ओर से भी पहले लेन मर्जिंग को समस्या बताया गया था, हालांकि बाद में जारी संशोधित सूचना में इस बिंदु का उल्लेख नहीं था।
640 करोड़ के भुगतान पर सवाल
प्रवेश साहिब सिंह ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान आर्बिट्रेशन के जरिए ठेकेदार को 640 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। उन्होंने इसे परियोजना की लागत और कामकाज से जुड़ा गंभीर सवाल बताया। मंत्री के मुताबिक जब मौजूदा सरकार सत्ता में आई, तब परियोजना का करीब 80 फीसदी भुगतान हो चुका था। सरकार ने बाकी काम करीब एक साल में पूरा कराकर इसे चालू कराया, लेकिन इसके बाद ट्रैफिक और डिजाइन से जुड़ी खामियां सामने आने लगीं।
डिजाइन पर राजनीतिक टकराव
मंत्री ने आरोप लगाया कि 2015 में तत्कालीन अरविंद केजरीवाल सरकार के समय परियोजना का डिजाइन तैयार कराया गया और भविष्य की ट्रैफिक जरूरतों को ध्यान में नहीं रखा गया। उनका कहना था कि सरकार और विभाग के पास कंसल्टेंट समेत पूरी तकनीकी व्यवस्था थी, इसके बावजूद सड़क की क्षमता सीमित रखी गई। अब सरकार का जोर मौजूदा सड़क में बदलाव कर ट्रैफिक दबाव कम करने पर है।