फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Public Accounts Committee on the flaws in six AIIMS including Rishikesh

ऋषिकेश सहित छह एम्स में खामियों पर लोक लेखा समिति हैरान

Wed, 26 Dec 2018 03:45 AM IST
राजेश सैनी परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: राजेश सैनी Updated Wed, 26 Dec 2018 03:45 AM IST
विज्ञापन
Public Accounts Committee on the flaws in six AIIMS including Rishikesh
एम्स दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश भर में 20 नए एम्स की स्थापना की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन शुरुआती छह एम्स में खामियों पर लोक लेखा समिति (पीएसी) ने हैरानी जताते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। समिति ने संसद में एक रिपोर्ट भी पेश की है, जिसमें छह नए एम्स की स्थापना को लेकर कई खामियां उजागर हुई हैं। रिपोर्ट में समिति ने स्पष्ट लिखा है कि वे ऋषिकेश सहित देश के छह एम्स को लेकर स्तब्ध हैं। ऋषिकेश एम्स के लिए 960 बिस्तरों की मंजूरी थी, लेकिन इनका लाभ अभी तक नहीं मिला है।

विज्ञापन


उन्होंने हैरानी जताई है कि साल 2011 से 2017 के बीच भोपा, भुवनेश्वर, जोधपुर, पटना, रायपुर और ऋषिकेश एम्स को 3285 करोड़ रुपये आवंटित हुए, जिनमें मार्च 2017 तक 1267 करोड़ रुपये खर्च ही नहीं हुए। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने निर्माण एजेंसियों, पर्याप्त स्टॉफ नहीं मिलना और सातवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू नहीं करना बताया। ये रिपोर्ट संसद में भी पेश की गई। छह एम्स में 43 से लेकर 84 फीसदी तक बिस्तरों की कमी बताई गई है।  
विज्ञापन

     

प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की समीक्षा करते हुए समिति ने आश्चर्य जताया है कि नए एम्स की खामियों को पूरा करने के लिए दो दो बार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को निर्धारित समय देने के बाद भी कामयाबी हासिल नहीं हुई। इतना ही नहीं इन एम्स की प्रगति के लिए संबंधित राज्य के मुख्य सचिव की निगरानी में राज्य परियोजना निगरानी समिति के गठन का आदेश हुआ था। समिति को आश्चर्य है कि ऋषिकेश एम्स को लेकर अब तक ये कमेटी गठित ही नहीं हुई। जिन राज्यों में समिति गठित हुई, वहां आज तक कोई बैठक ही नहीं की। समिति की रिपोर्ट में मंत्रालय के कार्यों के प्रति असंतुष्टि जाहिर करते हुए नए 20 एम्स और 71 मेडिकल कॉलेजों के अपग्रेडशन में कोताही नहीं बरतने की चेतावनी भी दी है।  
     
दरअसल देश में चिकित्सा शिक्ष की गुणवत्ता में सुधार और स्वास्थ्य संबंधी असंतुलन को लेकर वर्ष 2003 में प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना शुरू की गई थी, जिसके पहले चरण में दिल्ली एम्स की भांति देश में छह नए एम्स की स्थापना को मंजूरी मिली थी। साथ ही 13 मौजूदा मेडिकल कॉलेजों के उन्नयन की कल्पना भी की थी। इसी योजना की समीक्षा, वित्तीय प्रबंधन और कार्यान्वन को लेकर लोक लेखा समिति ने अब तक के कार्यों की जब जांच की तो एम्स की स्थापना को लेकर छिपीं खामियां उजागर हुईं। 
      

लोक लेखा समिति की मानें तो साल 2004 से 2017 के बीच इस योजना पर सरकार ने 14,970 करोड़ रुपये आवंटित किए, जिसमें से मंत्रालय ने 9,207 करोड़ रुपये जारी किए थे। इसके बावजूद 13 वर्षों तक इन संस्थान में मरीजों को पूरा उपचार नहीं मिल सका। कहीं जमीन देरी से मिली तो कहीं ठेकेदार को ज्यादा लाभ दिया गया। इन एम्स में अब तक पर्याप्त चिकित्सीय उपकरण तक उपलब्ध नहीं हैं। जबकि 31 मार्च 2017 तक 454 करोड़ की लागत से यहां 1318 उपकरण तैनात होने थे। समिति ने उत्तराखंड को लेकर मंत्रालय से सिफारिश की है कि एम्स की निगरानी के लिए पीएमसी गठन के लिए तत्काल निर्देश जारी किए जाएं।       

रायबरेली में चार साल लगे जमीन लेने में

रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उत्तर प्रदेश के रायबरेली में एम्स की स्थापना के लिए राज्य सरकार को जमीन अधिग्रहण में ही चार साल लग गए। इसके बाद भी सरकार एम्स के लिए प्रस्तावित 100 एकड़ जमीन नहीं दे सकी। जबकि एम्स की मंजूरी से पहले राज्य सरकार 148 एकड़ जमीन देने पर सहमत थी। समिति ने इसके पीछे उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। यूपी सरकार पर्याप्त रुप से निवेश करने में सक्षम नहीं। इसके कारण एम्स की लागत में वृद्घि करनी पड़ी और 2012 में पूरी होने वाली ये योजना अब 2020 तक होगी। वहीं गोरखपुर एम्स को लेकर भी मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि जमीन देने में राज्य ने देरी की है। यहां 80 संरचनाओं को गिराने और जमीन अधिग्रहण के बाद इसी साल जून में निर्माण शुरू हुआ है।        
     

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed