जीएसटी स्लैब का विरोध, कपड़ा व फर्नीचर कारोबारियों का प्रदर्शन
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जीएसटी स्लैब दर के खिलाफ दिल्ली के व्यापारियों ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को कपड़ा व्यापारी व फर्नीचर व्यापारी इसके विरोध में खुलकर सामने आए और जगह-जगह धरना-प्रदर्शन व दुकानें बंद रखीं।
व्यापारी जीएसटी स्लैब को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार कपड़े पर से जीएसटी वापस नहीं लेती है तो 30 जून को भारत बंद किया जाएगा।
एक जुलाई से लागू होने वाले जीएसटी को लेकर व्यापारियों में जबरदस्त नाराजगी दिखाई दे रही है। दिल्ली का होलसेल कपड़ा बाजार पूरी तरह से मंगलवार को बंद रहा।
दिल्ली हिंदुस्तानी मर्कन्टाइल एसोसिएशन के नेतृत्व में कपड़ा व्यापारियों ने जहां चांदनी चौक स्थित टाऊन हॉल के पास काली पटट्टी बांध कर धरना-प्रदर्शन किया तो अशोक बाजार, सुभाष रोड व रामनगर मार्केट एसोसिएशन गांधी नगर के व्यापारियों ने केंद्रीय वित्त मंत्री के पुतले को काला कपड़ा पहनाकर रोष जताया।
गांधी नगर रेडिमेड मार्केट के व्यापारियों ने कपड़ा व्यापारियों के समर्थन में एक दिन दुकानें भी बंद रखीे। अमर कॉलोनी लाजपत नगर के व्यापारियों ने भी दुकानें बंद रखी।
करोल बाग स्थित एशिया की सबसे बड़ी टैंक रोड मार्केट भी बंद रही। उधर, दिल्ली का फर्नीचर मार्केट भी बंद रही। दिल्ली फर्नीचर फेडरेशन के बैनर तले फर्नीचर मार्केट पंचकुइयां रोड, कीर्ति नगर, जेल रोड, मुल्तानी ढांडा, एमएम रोड, पालिका प्लेस समेत अन्य मार्केट-फैक्ट्री भी बंद रहे। फर्नीचर व्यापारियों ने ऐलान किया है कि बुधवार को कीर्तिनगर के भगत सिंह पार्क में बड़ी संख्या में व्यापारी एकत्रित होकर धरना-प्रदर्शन देंगे।
क्या कहना है व्यापारियों का
कपड़ा व्यक्ति के जीवन से मरण तक प्रयोग में लाया जाता है। पहले से ही कपड़े के निर्माण पर एडिशनल एक्साइज ड्यूटी लगी हुई है, व्यापारी सरकार को कर देता है और आगे देना चाहता है, परंतु सरकार हम पर दबाव बनाकर कर नहीं ले सकती है।-मुकेश सचदेवा, महामंत्री, दिल्ली मर्कन्टाइल एसोसिएशन
जीएसटी दर लागू करने के पूर्व सरकार ने व्यापारियों से किसी तरह की सलाह नहीं ली। सरकार अपने फैसले को वापस नहीं लेगी तो 30 जून को भारत बंद रखा जाएगा।-रमेश आहुजा, अध्यक्ष, चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री
सरकार के जीएसटी दर से ना केवल कपड़ा व्यापार बल्कि रेडीमेड गारमेंट उद्योग भी चौपट हो जाएगा। कपड़ा व्यापार को टैक्स के दायरे से बाहर रखने की आवश्यकता है।-केके बल्ली, अध्यक्ष, होलसेल रेडीमेड गारर्मेंट गांधी नगर
1956 में संसद में कानून बनाकर कपडे़ पर सेल्स टैक्स को हटा दिया गया था, अब एक बार फिर कर थोपा जा रहा है। देश हित में और देश के विकास के लिए हम कर देने के लिए तैयार हैं परंतु व्यापारी मित्रवत टैक्स दे सकता है।-सुरेश बिंदल, कपड़ा व्यापारी
फर्नीचर व्यापार पर मल्टी स्लैब लगाकर व्यापार ठप करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार के इस फैसले से बेरोजगारी बढ़ेगी। चीन का फर्नीचर व्यापार पर दबदबा हो जाएगा।-पंकज रेवरी, अध्यक्ष, पंचकुइयां रोड फर्नीचर एसोसिएशन
फर्नीचर पर भी 12 प्रतिशत का ही टैक्स लगना चाहिए। इसे लग्जरी श्रेणी में रखने का कोई औचित्य नहीं है।-रतिंदर पाल सिंह भाटिया, अध्यक्ष, दिल्ली फर्नीचर फेडरेशन