पढ़िए, आप से निकाले गए चारों नेताओं की कुंडली
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आम आदमी पार्टी में चल रहा घमासान शनिवार को चरम पर पहुंच गया। अंततः योगेंद्र यादव सहित चार बड़ें नेताओं को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से निकाल दिया गया।
जिस योगेंद्र यादव को लेकर आज पार्टी के अंदर इतना घमासान मचा हुआ है उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत एक रिसर्च स्कॉलर के तौर पर की थी। 2004 तक योगेंद्र यादव सीएसडीएस के सीनियर फेलो रहे। इसके साथ ही योगेंद्र यादव विश्वविद्यालय अनुदान अयोग (UGC) के भी सदस्य रहे।
यूपीए सरकार के दौरान उन्हें शिक्षा के अधिकार (RTI) के लिए बनाई गई राष्ट्रीय सलाहकार परिषद का सदस्य भी नियुक्त किया गया था। राजस्थान यूनिवर्सिटी से बीए करने वाले योगेंद्र यादव ने दिल्ली के जवाहर लाल यूनिवर्सिटी से एमए किया और पंजाब यूनिवर्सिटी से एमफिल की डिग्री हासिल की।
योगेंद्र यादव के पिता अर्थशास्त्र के प्रोफेसर थे जबकि उनकी पत्नी मधुलिका बनर्जी दिल्ली यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। योगेंद्र यादव का नाम सलीम था। सामान्य तौर पर इस नाम को एक संप्रदाय विशेष से जोड़ कर देखा जाता है। बताया जाता है कि इस नाम के चलते स्कूल में चिढ़ाए जाने के चलते बाद में उनका नाम बदल कर योगेंद्र कर दिया गया।
योगेंद्र यादव के दादा एक अध्यापक थे। कहा जाता है कि 1936 में हुए दंगों के दौरान उनकी हत्या कर दी गई जिसके बाद ही उनका नाम सलीम रखने का फैसला किया गया।
सीएसडीएस में रिसर्च फेलो बनने से पहले योगेंद्र यादव चंडीगढ़ के पंजाब यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर थे। 1996 से वह राजनीतिक विश्वलेषक के तौर पर काम कर रहे हैं।
2011 में उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ चले आंदोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। आम आदमी पार्टी बनने के साथ ही योगेंद्र ने सक्रीय राजनीति में आने का फैसला किया। हालांकि अंदरूनी विवाद के चलते 27 मार्च 2015 को पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने निकाल दिया।
पीआईएल से नाम कमाने वाले प्रशांत भूषण
देश के जाने माने वकीलों में से एक प्रशांत भूषण को भ्रष्टाचार, पर्यावरण संरक्षण और मानवाधिकार के संरक्षण के लिए किए जाने वाले जनहित याचिकाओं के चलते देश और दुनिया में प्रसिद्घि मिली।
इंडिया अंगेस्ट करप्शन के लिए हुए आंदोलनकर्ताओं में वह प्रमुख चेहरा थे। इस आंदोलन के कमजारे पड़ने के बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी में शामिल होने का निर्णय लिया और पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल हुए। हालांकि शनिवार को उन्हें इस पद से हटा दिया गया।
प्रशांत भूषण देश के पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण के बेटे हैं। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री लेने वाले प्रशांत भूषण आईआईटी मद्रास और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के भी छात्र रह चुके हैं।
प्रशांत भूषण को सेंटर फॉर पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन (CPIL), पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCl) और ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल में किए गए उसके काम के लिए भी जाना जाता है।
हाल में कोल ब्लॉक आवंटन में हुई अनियमितता और टूजी स्पेक्ट्रम मामले को सामने लाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
मनोज तिवारी से चुनाव हारे थे आनंद कुमार
1972 में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से समाजशास्त्र में एमए करने वाले आनंद कुमार ने छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की।
जेएनयू से रिटायर्ड प्रोफेसर आनंद कुमार ने शिकागो विश्वविद्यालय से पीएचडी की। 1979 से 1989 तक बीएचयू में प्रोफेसर रहे आनंद कुमार ने 1990 में जेएनयू में अध्यापन शुरु किया।
आम आदमी पार्टी में शामिल होने के बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने उत्तर-पूर्वी दिल्ली से चुनाव लड़ा। हालांकि इस चुनाव में वह बीजेपी प्रत्याशी मनोज तिवारी से हार गए।
कौन हैं अजित झा
आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से शनिवार को निकाले गए चौथे नेता अजित झा हैं। अजित झा राजनीति में आने से पहले सामाजिक कार्यकर्ता थे।
हालांकि पेशे से वह अध्यापक हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन करते हैं। आम आदमी पार्टी से जुड़ने से पहले वह जन परिषद के सदस्य थे।
अजित झा को पंचायती राज व्यवस्था का जानकार माना जाता है। लंबे समय तक वह एक राजनीतिक संगठन समाजवादी जन परिषद से भी जुड़े रहे।