Delhi: रिंग रेल को मिले रफ्तार तो दूर हो ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या, साढ़े चार दशक से इस योजना का इंतजार
रिंग रेल के पूरे नेटवर्क पर 10 रुपये न्यूनतम किराया है। इतने रुपये में 35 किलोमीटर लंबी रिंग रेल की यात्रा पूरी की जा सकती है। वहीं, बस व मेट्रो से यात्रा करने पर 25 से 60 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। 35 किलोमीटर की यात्रा लगभग 90 मिनट में पूरी हो जाती है।
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दिल्ली को ट्रैफिक जाम व प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए साढ़े चार दशक पहले बनी रिंग रेल योजना अभी भी साकार नहीं हो सकी है। दिल्लीवासियों के लिए 35 किमी लंबा रिंग रेल का नेटवर्क भरोसेमंद और सस्ते सफर का बेहतर विकल्प हो सकता था।
रेलवे अपने बजट में बार-बार इस योजना का जिक्र भी करता है, लेकिन साढ़े चार दशक बाद भी रिंग रेल योजना परवान नहीं चढ़ सकी है। इससे फरीदाबाद, पलवल, गाजियाबाद समेत एनसीआर के दूसरे शहरों से दिल्ली आने जाने वाले यात्रियों को भी लाभ होगा।
मालगाड़ी के लिए बिछी थी पटरी
नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली व हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर पैसेंजर ट्रेनों के आवागमन में कोई दिक्कत नहीं हो, इसके लिए 1975 में दिल्ली में रिंग रोड के समानांतर पटरी बिछाकर मालगाड़ी चलाने की शुरुआत की गई थी। 1982 में एशियाई खेलों के दौरान दिल्ली में इस नेटवर्क पर 36 यात्री ट्रेनें चलने लगी थीं। हालांकि बाद में यात्रियों की कमी की वजह से अधिकांश ट्रेनें बंद कर दी गईं। इस समय चार-पांच जोड़ी ट्रेनें चलती हैं। हालांकि इनमें 80 प्रतिशत सीटें खाली रहती हैं। साढ़े तीन हजार लोग ही रिंग रेल पर यात्रा करते हैं। इस ट्रैक से 70 मालगाड़ी गुजरती हैं।
2016 में रेलवे ने करवाया अध्ययन
2016 के बजट में रिंग रेल को विकसित करने की घोषणा के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम राइट्स से इसे लेकर अध्ययन कराया गया था। उसकी रिपोर्ट बताती है कि यात्रियों के लिए इसे सुविधाजनक बनाने के लिए रेलवे स्टेशनों के विकास, स्टेशन तक आवागमन की समस्या दूर करने, स्टेशनों व पटरियों से अतिक्रमण हटाने का सुझाव रेलवे को दिया गया था। इस ट्रैक पर मालगाड़ियों के बोझ का भी हवाला दिया। कहा कि इस कारण अधिक संख्या में पैसेंजर ट्रेनें चलाना संभव नहीं है। हालांकि डेडिकेटेड फ्रेट कारीडोर भी मालगाड़ियों के लिए अलग से संचालन के लिए बनाया जा रहा है।
पैसों के साथ समय की भी बचत
रिंग रेल के पूरे नेटवर्क पर 10 रुपये न्यूनतम किराया है। इतने रुपये में 35 किलोमीटर लंबी रिंग रेल की यात्रा पूरी की जा सकती है। वहीं, बस व मेट्रो से यात्रा करने पर 25 से 60 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। 35 किलोमीटर की यात्रा लगभग 90 मिनट में पूरी हो जाती है। डीटीसी की बस की बात करें को नॉन एसी बस का किराया 5-15 रुपये है, एसी बस 10 से 25 रुपये का किराया है। इसी तरह मेट्रो का किराया न्यूनतम 10 रुपये और अधिकतम 60 रुपये है। लिहाजा रिंग रेल चलने से पैसे के साथ समय की बचत और जाम की समस्या से भी निजात मिलेगा।
क्या है परेशानी
फीडर बस के बिना रिंग रेल को पुनर्जीवित करना बेहद ही मुश्किल साबित हो रहा है। रिंग रेल के स्टेशन तक पहुंचना यात्रियों के लिए कठिन, अतिक्रमण के कारण पैदल चलना भी मुश्किल है। रिंग रेल चलाना लगातार घाटे का सौदा साबित हो रहा है। मालगाड़ियों से भरपाई हो रही है।
रिंग रेलवे पर स्थित 21 स्टेशन
दक्षिणी दिल्ली के स्टेशन- लाजपत नगर, सेवा नगर, लोधी कॉलोनी, सरोजनी नगर हॉल्ट, सफदरजंग, चाणक्यपुरी हॉल्ट, सरदार पटेल मार्ग हॉल्ट, बरार स्क्वायर, दिल्ली इंद्रलोक हॉल्ट, नारायणा विहार हॉल्ट, कृति नगर हॉल्ट, नारायणा विहार हॉल्ट।
उत्तरी दिल्ली वाले स्टेशन- निजामुद्दीन, प्रगति मैदान, तिलक ब्रिज, शिवाजी ब्रिज, नई दिल्ली, सदर बाजार, दिल्ली किशनगंज, विवेकानंद पूरी, दया बस्ती और शकूरबस्ती।
लोगों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल सिस्टम पर जोर है। मेट्रो, रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंड से जोड़ने की कोशिश हो रही है। रिंग रेल नेटवर्क पर पड़ने वाले नौ स्टेशन मेट्रो से कनेक्ट हैं, कुछ पास में है। अन्य स्टेशनों को भी इससे जोड़ दिया जाए तो यात्रियों को इसका लाभ मिल सकेगा।
मेट्रो से जुड़े रिंग रेल के स्टेशन
- दिल्ली सराय रोहिल्ला, सदर बाजार मेट्रो के रेड लाइन पर है।
- नई दिल्ली मेट्रो के यलो लाइन व एयरपोर्ट एक्सप्रेस से जुड़ा है
- प्रगति मैदान रेलवे स्टेशन मेट्रो के ब्लू लाइन से जुड़ा है।
- हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन मेट्रो के पिंक लाइन से जुड़ा है।
- लाजपत नगर स्टेशन पिंक लाइन व वायलेट लाइन
- पटेल नगर रेलवे स्टेशन मेट्रो के ग्रीन लाइन से जुड़ा है।
- कीर्ति नगर स्टेशन मेट्रो के ब्लू लाइन व ग्रीन लाइन से जुड़ा है।
- नारायणा विहार रेलवे स्टेशन मेट्रो के पिंक लाइन पर है।