फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   polluted ganga UP and Uttarakhand, NGT has asked answers

यूपी और उत्तराखंड में गंगा मैली, एनजीटी ने मांगा जवाब

Thu, 28 Jan 2016 01:00 PM IST
Updated Thu, 28 Jan 2016 01:00 PM IST
विज्ञापन
polluted ganga UP and Uttarakhand, NGT has asked answers

नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने स्वच्छ गंगा मामले पर सुनवाई 17 फरवरी के लिए टाल दी है। पहले चरण के तहत गोमुख से लेकर कानपुर तक गंगा के बहाव क्षेत्र को स्वच्छ व प्रदूषण रहित बनाने के लिए एनजीटी सुनवाई कर रहा है।

विज्ञापन


बुधवार को गंगा में प्रदूषण को लेकर दो हलफनामे दाखिल हुए। पहला उत्तराखंड में आदेश का उल्लंघन कर गंगा और सहायक नदियों के प्रतिबंधित क्षेत्र में कैंप लगाने और दूसरा उत्तर प्रदेश के वाराणसी में अधजले शव फेंके जाने को लेकर है।
विज्ञापन


दोनों मामलों में ट्रिब्युनल ने संबंधित प्राधिकरणों से जवाब मांगा है। वहीं ट्रिब्युनल ने कानपुर में जाजमऊ स्थित चमड़ा उद्योगों को शिफ्ट किए जाने को लेकर भी प्राधिकरणों से स्पष्ट जवाब देने और अब औद्योगिक इकाइयों के जरिए प्रदूषण के खिलाफ उठाए गए कदमों का ब्योरा भी मांगा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने एमसी मेहता के मामले की सुनवाई की। इस दौरान ग्रीन बेंच ने दोनों राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकरणों से इन मामलों पर अगली सुनवाई में जवाब देने को कहा है।

ऋषिकेश में नदी किनारे लग रहे कैंप

polluted ganga UP and Uttarakhand, NGT has asked answers

एनजीटी ने नदियों के किनारों से 100 मीटर दूरी तक पूर्ण रूप से प्रतिबंधित क्षेत्र बनाने का फैसला सुनाया था। इसके अलावा उत्तराखंड सरकार ने कहा था कि फैसले के बाद से अब तक कौड़ियाला से ऋषिकेश तक गंगा किनारे किसी तरह का कैंप नहीं लगाया गया।


वहीं सरकार के दावे को झूठा बताते हुए सोशल एक्शन फॉर फॉरेस्ट एंड एनवॉयरमेंट (सेफ) एनजीओ ने हलफनामा दाखिल किया गया है। इसमें कहा गया कि पाबंदी के बावजूद ऋषिकेश में कई कैंप गंगा के किनारों पर लगे हुए हैं।

उत्तराखंड सरकार तथ्यों को छुपाकर ट्रिब्युनल को गुमराह कर रही है। एनजीओ ने दावा किया कि कनात और तंबू के जरिए अर्ध स्थायी कैंप बनाए जा रहे हैं। एनजीओ ने ग्रीन पैनल को बताया कि उत्तराखंड सरकार के हलफनामे के बाद एनजीओ द्वारा 19 जनवरी को दौरा किया गया था। इस दौरान पाया गया कि सरकार का दावा झूठा है।

वाराणसी में तैर रहे शव

polluted ganga UP and Uttarakhand, NGT has asked answers

वहीं दूसरा हलफनामा अनिल कुमार सिंघल की ओर से दाखिल किया गया। बीती सुनवाई में ट्रिब्युनल के समक्ष वाराणसी की गंगा में इंसान और जानवर के अधजले शरीरों की तस्वीरें पेश कीं गईं थीं।

हलफनामे में बताया गया है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व वैज्ञानिक महेंद्र पांडे ने यह तस्वीरें मुहैया कराईं है। जबकि स्थानीय प्रशासन और स्वच्छ गंगा की मुहिम में लगी मशीनरी इसे रोक पाने में विफल हैं। इसमें एक रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि कानपुर से उन्नाव के बीच परियार के निकट गंगा में 2015 में 100 से अधिक शव प्राप्त हुए थे।

हलफनामे के मुताबिक वाराणसी के दो घाट हरिश्चंद्र, मणिकर्णिका पर प्रतिवर्ष करीब 32 हजार शव जलाए जाते हैं। यहां करीब 10 हजार टन सूखी लकड़ियां भी जलाई जाती हैं। इसकी वजह से न केवल वायु प्रदूषण हो रहा है बल्कि गंगा भी प्रदूषित हो रही हैं।

मालूम हो कि एनजीटी गोमुख से हरिद्वार गंगा बहाव क्षेत्र तक अपना फैसला सुना चुका है। अब फैसले की बारी हरिद्वार से कानपुर तक गंगा बहाव क्षेत्र को लेकर है। अगली सुनवाई में इन सभी पहलुओं पर एनजीटी प्राधिकरणों के जवाब और तथ्यों को हासिल करने के बाद अपना फैसला सुना सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed