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हरियाणा का रण: सभी पार्टियों पर भारी पड़ेगा ये मुद्दा
मलिक असगर हाशमी/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Fri, 05 Sep 2014 09:52 PM IST
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सियासी दल विधानसभा चुनाव में गुड़गांव और मेवात की सात सीटों पर महिलाओं से संबंधित मुद्दों को गंभीरता से नहीं उठा रहे हैं, जबकि दोनों जिलों की आधी आबादी अपनी पर आ जाए तो किसी भी दल की हवा खराब कर सकती है।
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मौजूदा विधानसभा चुनावों को लेकर प्रदेश के मुख्य चुनाव कार्यालय ने मतदाताओं से संबंधित ताजे आंकड़े जारी किए हैं, जिसमें पुरुष मतदाताओं से महिला वोटर को कहीं से कमतर नहीं दिखाया गया है।
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फिर भी सियासी दल चुनाव प्रचार में महिलाओं के मसलों को खास तवज्जो नहीं दे रहे हैं। रही बात समस्याओं की तो गुड़गांव और मेवात की महिलाएं इसमें बुरी तरह उलझी हुई हैं।
मेवात के पुन्हाना में जहां लड़कियों के कॉलेज की मांग लंबे समय से अब तक चली आ रही है। वहीं साइबर सिटी में पिछले पांच दशक में कोई दूसरा महिला कॉलेज नहीं खोला गया।
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भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष तथा गुड़गांव से भाजपा टिकट की दावेदार पदमिनी सिंह स्वीकारती हैं कि गुड़गांव में तकरीबन पांच लाख नौकरीपेशा महिलाओं की समस्याएं समझने में राजनीतिक दल रुचि नहीं दिखाते। इसी तरह पुन्हाना की दयावती भड़ाना कहती हैं कि महिला स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में गुड़गांव एवं मेवात की हालत एक जैसी है।
गुड़गांव की महिलाओं की समस्या
सुरक्षा, प्राइवेट जॉब में आरक्षण, महिला पुलिस बल में कमी, सार्वजनिक शौचालय का अभाव, सिटी बसों में सीसीटीवी कैमरे नहीं, स्ट्रीट लाइट का अभाव, महिला कॉलेज और महिला मेडिकल कॉलेज की मांग।
मेवात की महिलाओं की समस्याएं
घरों में शौचालय की कमी, बलात्कार की घटनाएं अधिक, दहेज उत्पीड़न, उच्च शिक्षा की व्यवस्था नहीं, गर्ल्स कॉलेज, विशेषज्ञ महिला डॉक्टर की घोर कमी, महिलाओं के रोजगार के लिए माहौल की कमी'