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हाईकोर्ट की टिप्पणी- गरीबों की आवाज सुनने वाला कोई नहीं, आम जनता के लिए नहीं है पुलिस

Sat, 13 May 2017 09:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 13 May 2017 09:47 AM IST
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police force not for the poor and common people, Delhi high court comments
दिल्ली पुलिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस के कामकाज व मामले दर्ज करने में गरीबों से भेदभाव पर दिल्ली पुलिस को आड़े हाथ लिया है। अदालत ने कहा पुलिस गरीब लोगों की शिकायत नहीं सुनती है, वह उन्हें भगा देती है, क्योंकि वह उनसे पैसे नहीं बना पाती। इतना ही नहीं निचले स्तर के अधिकारी जानते है कि गरीब लोग उच्च अधिकारी तक भी नहीं पहुंचा पाएंगे।

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न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति दीपा शर्मा की खंडपीठ ने यह कड़ी टिप्पणी वैवाहिक विवाद के एक मामले में सुनवाई के दौरान की है। खंडपीठ ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में गरीब लोगों की आवाज कोई नहीं सुनता। आज कल की पुलिस आम जनता के लिए नहीं है। 
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खंडपीठ के समक्ष याचिका दायर कर एक महिला ने दावा किया है कि आठ माह के एक दुधमुंहे बच्चे समेत उसके दो बच्चों को ससुराल पक्ष के लोग जबरन उससे ले गए हैं। उसके बच्चे अब पंजाब के होशियारपुर में हैं। 15 अप्रैल को उसे ससुराल पक्ष ने घर से बाहर निकाल दिया गया था, तभी से वह अपनी मायके में रह रही है। याची का आरोप है कि शिकायत करने पर तिमारपुर थाना पुलिस भी उसकी मदद नहीं कर रहीं। 
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अदालत ने तिमारपुर थानाध्यक्ष को मामले में उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। अदालत ने थानाध्यक्ष को अगली सुनवाई 23 मई को महिला के पति, ससुराल पक्ष के जिन लोगों का नाम शिकायत में हैं उन्हें व दो बच्चों को अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है।  

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