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सावधान! आपके घर आने वाला है जहरीला पानी

Mon, 10 Feb 2014 08:51 PM IST
सोमदत्त शर्मा/ अमर उजाला, नोएडा
सोमदत्त शर्मा/ अमर उजाला, नोएडा Updated Mon, 10 Feb 2014 08:51 PM IST
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poisonous water wiil be supplied in homes

जल्द हालात नहीं बदले गए तो वो दिन दूर नहीं जब नोएडा का पानी जहरीला हो जाएगा और लोगों को अपनी चपेट में ले लेगा।

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इसका कारण क्षेत्र में बड़े स्तर पर चल रहे अवैध डाइंग प्लांट हैं। इनसे निकलने वाला रासायन युक्त पानी जल स्रोतों को प्रदूषित कर रहा है। अवैध डाइंग प्लांट पर चिंता प्रकट करते हुए पिछले दिनों क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने डीएम को रिपोर्ट भी सौंपी है।

विभागों की मेहरबानी या नजरअंदाजी से कई गांवों में सैकड़ों अनधिकृत डाइंग प्लांट चल रहे हैं। बिशनपुरा, बहलोलपुर, गिझौड़, ममूरा, हरौला सहित अन्य गांवों में ये अवैध कारोबार पूरी तरह से पैर फैला चुका है।
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हालात ये है कि हर तीसरे-चौथे घर में डाइंग का काम हो रहा है। चिंता का विषय इनसे निकलने वाला रसायन युक्त पानी है। जिसको प्लांट मालिक जमीन के अंदर निस्तारित कर रहे हैं। साथ ही कई प्लांट खुले में प्रवाहित कर रहे हैं।
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इससे पेयजल स्रोत दूषित हो रहे हैं जो कि शहर के भूजल को धीरे-धीरे जहरीला बना रहे हैं। ममूरा निवासी एसपी सिंह बताते हैं कि गांव के लोग पहले भूजल का उपयोग पीने के लिए करते थे। लेकिन जब से डाइंग का कारोबार शुरू हुआ है तब से पानी का स्वाद ही बदल गया है। कई बार तो पानी से बदबू आने लगती है।

बडे़ स्तर पर चल रहे अवैध डाइंग प्लाटों की जानकारी होने के बावजूद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित अन्य विभागों ने आंखें मूंद रखी हैं। आलम ये है कि करीब दो साल पहले इन्हें बंद करने के लिए कार्रवाई की गई थी। लेकिन आधी अधूरी कार्रवाई के चलते बंद होने के बजाए अवैध डाइंग प्लांटों की संख्या बढ़ गई है।

तेजी से गिर रहा जलस्तर
डाइंग प्लांट मालिक अवैध तरीके से भूजल का उपयोग कर रहे हैं। कपड़ों की रंगाई के लिए बोरवेल के पानी का इस्तेमाल करते हैं। अनुमान के मुताबिक एक प्लांट में रोजाना करीब 50 से 70 हजार लीटर पानी का उपयोग होता है। इसके चलते नोएडा का जलस्तर तेजी से गिर रहा है।

दिल्ली में प्रतिबंधित होने के बाद चल रहे नोएडा में
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद करीब तेरह साल पहले दिल्ली में डाइंग प्लांट को प्रतिबंधित कर दिया गया। इसके बाद से अधिकांश प्लांट नोएडा में अवैध रूप से संचालित किए जा रहे हैं। प्लांटों से निकलने वाला रसायन युक्त पानी खुले में फैला हुआ देखा जा सकता है।


रंगीन पानी आने के बाद लगी थी रोक
करीब तीन साल पहले गाजियाबाद में भी बड़े स्तर पर अवैध डाइंग प्लांट चल रहे थे। इसके कारण पेयजल स्रोतों में रंगीन पानी आना शुरू हो गया था। नींद से जागते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कार्रवाई की। आनन-फानन में की गई कार्रवाई के बाद रंगाई यूनिटों पर ताला लगाया था।

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