सेमेस्टर की तर्ज पर दो बार बोर्ड परीक्षाएं, मानव संसाधन विकास मंत्री को सौंपा ड्राफ्ट
-कमेटी ने नए मानव संसाधन विकास मंत्री को राष्ट्रीय शिक्षा नीति का ड्राफ्ट सौंपा
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विस्तार
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के ड्राफ्ट में कमेटी ने एक से 18 आयु वर्ग तक के बच्चों को मुफ्त गुणवत्ता युक्त शिक्षा, सुरक्षा के साथ पूरी तरह से विकास करने का सुझाव दिया है। इसमें शिक्षा का अधिकार कानून को पहली की बजाय नर्सरी और आठवीं की बजाय 12वीं कक्षा तक विस्तार करने को कहा है। सेमेस्टर परीक्षाएं छात्र की तैयारी के आधार पर आयोजित की जाएं। इसके लिए बाकायदा नीति तैयार की जाए। सेमेस्टर परीक्षा में 24 विषयों से अधिक विषय न हों। एक बार फेल या अच्छा प्रदर्शन न करने पर छात्र को दो या उससे अधिक बार मौका मिलना चाहिए।
तीन और चार साल की डिग्री की सिफारिश
कमेटी ने स्नातक प्रोग्राम में तीन और चार वर्षीय डिग्री का सुझाव दिया है। कमेटी का मानना है कि चार वर्षीय लिबरल आर्ट डिग्री प्रोग्राम में पढ़ाई होती है। इसके अलावा तीन वर्षीय डिग्री प्रोग्राम में भी संस्थान पढ़ाई करवा सकते हैं। चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम में पढ़ाई करने के बाद छात्र एक साल में सीधे मास्टर डिग्री कर सकता है। एमफिल प्रोग्राम को खत्म करने की सिफारिश की गई है। लिबरल एजुकेशन इंस्टीट्यूशन के तहत बैचलर ऑफ लिबरल आर्ट्स, बैचलर ऑफ लिबरल एजुकेशन डिग्री विद रिसर्च शुरू करने का सुझाव दिया है। पारंपरिक बीए, बीएससी के साथ बैचलर ऑफ वोकेशनल डिग्री को आगे भी चलाया जाए।
टॉप 200 संस्थानों के कैंपस भारत में खोले जाएं
कमेटी ने सुझाव दिया है कि भारत के संस्थानों को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों में शामिल करने के लिए इंटरनेशनल रैंकिंग के दो सौ संस्थानों के कैंपस भारत में खोलने की अनुमति दी जाए। विदेशी शिक्षकों व छात्रों को भारत से जोड़ें। नालंदा, तक्षशिला की तर्ज पर भारतीय प्राचीन विश्वविद्यालयों को आगे बढ़ाया जाए। मल्टीडिस्पलिनेरी यूनिवर्सिटी व कॉलेज खोले जाएं, जो एक साथ कई विषयों की पढ़ाई करवाते हों। साहित्य, भाषा, खेल, योग, आयुर्वेद, प्राचीन, मध्यकालीन इतिहास और संगीत पर फोकस किया जाना चाहिए।
दो सिफारिशों पर आ सकती है आपत्ति
यूपीए-दो के कार्यकाल में बीजेपी ने विपक्ष में रहकर चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम और विदेशी संस्थानों या विश्वविद्यालयों के कैंपस भारत में खोलने का विरोध किया था। ऐसे में बीजेपी सरकार के कार्यकाल में कमेटी की दो सिफारिशों पर आपत्ति आ सकती है। वहीं, कमेटी ने अपने ड्राफ्ट में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से भारतीयता व संस्कृत को शामिल कर लिया है।
महत्वपूर्ण बिंदु
-बच्चों को कुपोषण से बचाने और शिक्षा से जोड़ने के मकसद से मिड-डे-मील में अब लंच के साथ नाश्ता भी देने का सुझाव है।
-यूजीसी को भंग करते हुए एक रेगुलेटर बनाने की सिफारिश है। यूजीसी की बजाय हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (एचईसीआई) एक्ट-2018 बनाया जाए।
-अंग्रेजी भाषा विदेशी भाषा या एलिट क्लास है। बेहतर भविष्य के लिए अंग्रेजी जरूरी है, लेकिन सभी भारतीय भाषाओं को भी स्कूल व उच्च शिक्षा में शामिल करें।
-थ्री लैंग्वेज फॉर्मूले में संस्कृत के साथ तीन भारतीय भाषाओं की पढ़ाई करनी होगी। यह अनिवार्य रहेगा, जबकि इलेक्टिव में विदेशी भाषा की पढ़ाई की जा सकती है।
-नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से सभी प्रवेश और प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित की जाएं। कंप्यूटर आधारित परीक्षा पर जोर दिया जाए।
-भारतीय समेत शास्त्रीय भाषाओं में कोर्स उपलब्ध करने पर जोर दिया। इसके अलावा संस्कृत की पढ़ाई करवाने पर सरकार आर्थिक रूप से मदद करेगी।
-कमेटी ने न्यू एपेक्स एजुकेशनल बॉडी बनाने का सुझाव दिया है। इसका राष्ट्रीय शिक्षा आयोग नाम रखा जाएगा। इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करें, इस आयोग का काम देश की शिक्षा में सुधार और योजनाओं को लागू करने की जिम्मेदारी होगी।
-मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय किया जाए। इसका काम शिक्षा और सीखने पर जोर होना चाहिए।
-स्टेट स्कूल रेगुलेटरी अथॉरिटी का निर्माण किया जाए। इसका काम राज्यों की शिक्षा व्यवस्था, फीस, शिक्षकों व गुणवत्ता पर नजर रखना होगा। इसमें तीन साल में बदलाव किया जाए।
-नेशनल स्कॉलरशिप फंड ईजाद हो, ताकि छात्रों को शिक्षा में आगे बढ़ने का मौका मिले। इसके अलावा गरीब छात्रों को फीस माफी मिले।
-एनसीईआरटी पाठ्यक्रम पर आधारित किताबों में बदलाव किया जाए। अगले साल तक नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क-0ण्2020 लागू होना चाहिए।