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डॉक्टर बनने के लिए खरगोशों की बलि क्यों?, पेटा ने उठाया सवाल

Thu, 30 Aug 2018 08:26 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 30 Aug 2018 08:26 PM IST
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peta asked Why do rabbits sacrifice to become a doctor
फाइल फोटो
मेडिकल पीजी कोर्स के पाठ्यक्रम में होने जा रहे बदलावों को लेकर पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पीटा) ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पशु सरंक्षण को लेकर कार्य करने संस्था का कहना है कि डॉक्टर बनने के लिए खरगोशों की बलि क्यों?। 
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भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एमसीआई) को पत्र लिखते हुए पीटा ने पाठ्यक्रम में बदलाव की कड़ी निंदा की है। इनका कहना है कि नए पाठ्यक्रम को लागू किया जाता है कि अनगिनत खरगोश और अन्य वन्य जीवों को विचलन, घुटन, दौरे, रक्तस्त्राव जैसी गंभीर परेशानियां झेलनी पड़ेंगी। 
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पीटा की मांग की है कि मौजूदा कानून एवं वन मंत्रालय के नियमों की पालना करते हुए तत्काल नए पाठ्यक्रम से जीव जंतुओं के इस्तेमाल को हटाया जाए।  दरअसल एमसीआई ने कुछ ही समय पहले मेडिकल फॉर्मेकॉलोजी और फिजियोलॉजी के संशोधित पाठ्यक्रम में कुत्ता, बिल्ली और जलचर जीवों पर प्रयोग के स्थान पर कंप्यूटर प्रणाली का इस्तेमाल करने की सिफारिश की है।
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लेकिन इसी पाठ्यक्रम में खरगोश और चूहों पर पीड़ादायी प्रयोगों की अनुमति दी गई है। जबकि वर्ष 2012 में वन मंत्रालय ने पशु प्रयोगों एवं विच्छेदन पर पूरी तरह से रोक लगाई है। 
 

पीटा इंडिया की विज्ञान योजना सलाहकार डॉ. दीप्ति कपूर का कहना है कि सांसद शत्रुघ्न सिन्हा भी एमसीआई की अध्यक्ष डॉ. जयश्री मेहता को पत्र लिख चिकित्सा पाठ्यक्रमों में जीव जंतुओं के विच्छेदन पर तत्काल रोक लगाने की मांग कर चुके हैं। 

उन्होंने बताया कि इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को भी पत्र लिख पीटा इंडिया ने जल्द से जल्द इस पर रोक लगाने की मांग की थी। 

डॉ. कपूर ने बताया कि यूजीसी, भारतीय दंत चिकित्सा परिषद और फॉर्मेसी काउंसिल ने जीव जंतुओं के प्रयोगों पर रोक लगा दी है, लेकिन एमसीआई अभी तक इस पर पूरी तरह से अमल नहीं कर रहा है।       
 
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