पायल अब्दुल्ला से सरकारी आवास खाली कराने पर रोक, कोर्ट ने केंद्र को किया तलब
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हाईकोर्ट ने जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की पत्नी पायल अब्दुल्ला से सरकारी आवास खाली करवाने पर रोक लगा दी है। अदालत ने इस मामले में केंद्र व जम्मू-कश्मीर सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
न्यायमूर्ति इंद्रमीत कौर ने दोनों पक्षों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि जेड श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त पायल अब्दुल्ला व उनके दो बच्चों को एक छोटे फ्लैट में दूसरी मंजिल पर किस प्रकार सुरक्षा प्रदान की जा सकती है।
अदालत ने 28 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए कहा कि अगले आदेश तक याची से सरकारी आवास खाली करवाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई न की जाए।
हाईकोर्ट ने केंद्र व जम्मू-कश्मीर सरकार से मांगा जवाब
अदालत ने यह निर्देश पायल अब्दुल्ला की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया है। याची पायल व उनके दो बेटे जमीर व जाहिर अब्दुल्ला की ओर से पेश अधिवक्ता अमित खेमका ने अदालत को बताया कि तीनों को जान का खतरा देखते हुए जेड श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है।
उनकी सुरक्षा में 94 सुरक्षा गार्ड तैनात हैं। उन्होंने कहा जम्मू-कश्मीर के हालत देखते हुए यह सुरक्षा प्रदान की गई थी और अब उनके मुवक्किलों को केंद्र सरकार ने टाइप-8 के फ्लैट को खाली करने का नोटिस दे दिया है।
उन्होंने कहा कि जिस फ्लैट में उन्हें रहने के लिए कहा गया है वह मात्र 2300 वर्गमीटर में बना है और दूसरी मंजिल पर है। उन्होंने सवाल उठाया कि दूसरी मंजिल पर बने इस छोटे फ्लैट में किस प्रकार सुरक्षा की जा सकती है।
याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि दूसरी ओर सुब्रह्मण्यम स्वामी को भी जेड श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है और सरकार ने उन्हें सरकारी आवास प्रदान कर दिया है। यह सरासर भेदभाव की नीति है। ऐसे में केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि उनके मुवक्किलों से आवास खाली करवाने का नोटिस वापस लिया जाए।