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Heat Stroke: लू की चपेट में आए मरीजों का मोबाइल हीट स्ट्रोक एंबुलेंस से किया जाएगा इलाज, RML में मिलेगी सुविधा

Fri, 02 May 2025 02:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 02 May 2025 02:26 AM IST
सार

मौके पर उपचार देने के लिए अस्पताल प्रशासन ने यह कदम उठाया है, जिससे मरीज का तापमान तुरंत नियंत्रित किया जा सकें।

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Patients affected by heat stroke will be treated using mobile heat stroke ambulance
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) में लू (हीट स्ट्रोक) के मरीजों को टैको (ट्रेपॉलिन असिस्टेड कूलिंग ऑस्किलेशन) तकनीक से उपचार दिया जाएगा। मौके पर उपचार देने के लिए अस्पताल प्रशासन ने यह कदम उठाया है, जिससे मरीज का तापमान तुरंत नियंत्रित किया जा सकें। इसके लिए तीन एसी मोबाइल हीट स्ट्रोक एंबुलेंस तैयार की गई हैं। 

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वहीं, बढ़ते तापमान के मद्देनजर अस्पताल का हीट स्ट्रोक रूम भी तैयार है। इसके अलावा हेल्पलाइन नंबर (011-23404446) भी जारी किया गया है। अस्पताल के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. अमलेंदु यादव ने बताया कि जिन इलाकों में एबुलेंस नहीं पहुंच पाएगी, वहां पर हीट स्ट्रोक के मरीज को तिरपाल के बीच में मरीज को लिटाया जाएगा, उसमें 25-30 किलोग्राम बर्फ डालकर तिरपाल को चारों छोर से पकड़कर हिलाया-डुलाया जाएगा। 
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इससे मरीज का तुरंत शरीर का तापमान कम करने में मदद मिलेगी और फिर टीम उसे अस्पताल में लाकर उपचार देगी।एसी एंबुलेंस में इलाज के लिए कृत्रिम टब सहित बर्फ उपलब्ध कराई जाएगी। इससे उपचार में देरी नहीं होगी। हीट स्ट्रोक के मरीज के लिए सबसे जरूरी उसके शरीर के तापमान को नियंत्रित करना होता है। एबुलेंस कर्मियों को भी इस संबंध में प्रशिक्षण देने की योजना है। 
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अस्पताल में मरीजों के लिए हीट स्ट्रोक रूम तैयार है। इसमें दो बड़े-बड़े टब रखे गए है। इसमें मरीज को करीब 150 लीटर पानी के बीच 50-55 किलोग्राम बर्फ के साथ लिटाया जाता है। टब में मरीज को करीब 20-25 मिनट तक रखने पर उसके शरीर का तापमान 100 डिग्री पहुंच आ जाता है। हीट स्ट्रोक में मरीज का तापमान 105 डिग्री पहुंच जाता है। वहीं, मरीज को सांस की नली भी लगाई जाती है। इसके बाद शारीरिक स्थिति के आधार पर उसे वेंटिलेटर और वार्ड में शिफ्ट किया जाता है।

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