फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   patient comes AIIMS trauma center by the Green Corridor

ग्रीन कॉरिडोर बनाकर मरीज को एम्स ट्रॉमा सेंटर लाया गया

Sat, 21 Feb 2015 09:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 21 Feb 2015 09:27 AM IST
विज्ञापन
patient comes AIIMS trauma center by the Green Corridor

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की मदद से एक बार फिर से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एक गंभीर मरीज को जनकपुरी के ऑर्चिड अस्पताल से एम्स ट्रॉमा सेंटर लाया गया। ब्रेन डेड घोषित करने के बाद मरीज के परिजनों की सहमति से उनके अंगों को दान करने का निर्णय लिया गया। इससे तीन लोगों को दूसरे दिन ही नई जिंदगी मिल गई। दोनों कॉर्निया को एम्स में सुरक्षित रख लिया गया है। इससे दो लोग इस दुनिया को देख सकेंगे।

विज्ञापन


अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ. एम.सी. मिश्रा ने बताया कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की मदद से एक बार फिर पांच लोगों को नई जिंदगी मिलने का रास्ता साफ हो गया। उन्होंने बताया कि सूचना देने के बाद दिल्ली ट्रैफिक पुलिस सात मिनट के अंदर ग्रीन कॉरीडोर बनाने को तैयार हो गई और 21 मिनट के अंदर जनकपुरी से एम्स ट्रॉमा सेंटर तक की 22 किलोमीटर की दूरी को तय कर लिया गया।
विज्ञापन


 ट्रैफिक पुलिस की मदद से 17-18 फरवरी की रात में ग्रीन कॉरिडोर बनाकर मरीज को ट्रॉमा सेंटर लाया गया। डॉ. मिश्रा ने बताया कि इसमें दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त (यातायात) मुक्तेश चंदर का अच्छा सहयोग मिला। इस दौरान ट्रैफिक नहीं रोका गया, लेकिन एंबुलेंस के आगे-आगे दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की गाड़ी चलती रही और सड़क के दायीं ओर चल रही ट्रैफिक को हटाती रही। रास्ते में पड़े ट्रैफिक प्वाइंटों पर पुलिस की तैनाती भी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


सबसे अधिक उम्र का डोनर
डॉ. मिश्रा ने बताया कि इससे पहले 77 वर्ष के किसी मरीज ने ब्रेन डेड होने के बाद एम्स में अंग दान करने की हामी नहीं भरी थी। इसी वजह से मरीज के हृदय और हृदय वॉल्व को प्रत्यारोपित नहीं किया जा सका। उन्होंने बताया कि अधिक उम्र के डोनर के अंग में दिक्कत आती है, लेकिन देश में अंग दान करने वालों की संख्या बहुत कम है और मांग ज्यादा है, इसलिए जरूरी है कि अधिक उम्र के ब्रेन डेड मरीज का भी अंग उपयोग में लाया जा रहा है।

ये रहा ट्रॉमा सेंटर पहुंचने का रास्ता
17-18 फरवरी की रात एंबुलेंस 11.40 बजे जनकपुरी सी-3 स्थित ऑर्चिड अस्पताल से मरीज को लेकर निकली। एंबुलेंस के आगे-आगे ट्रैफिक पुलिस की गाड़ी एस्कॉर्ट करती जा रही थी। एंबुलेंस जनकपुरी से निकल कर डाबड़ी मोड़, दिल्ली कैंट, आर्मी गोल्फ कोर्स, धौला कुंआ, रिंग रोड होते हुए रात 12.01 बजे एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुंची। रात होने की वजह से ट्रैफिक पुलिस को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी और न ही ट्रैफिक रोकना पड़ा।

पहले भी ऐसे प्रयास से बचाई गईं जानें
दिल्ली और गुड़गांव यातायात पुलिस के ऐसे ही प्रयास से जून 2014 में 16 वर्षीय एक किशोर की जान बचाई गई। तब एक दानदाता के हृदय को गुड़गांव के फोर्टीस अस्पताल से दिल्ली के एस्कॉर्ट अस्पताल की 32 किलोमीटर की दूरी को महज 29 मिनट में तय कर किशोर की जान बचाई गई।


चेन्नई में भी पिछले साल ग्रीन कॉरीडॉर बनाकर पुलिस ने एक दानदाता के हृदय को एंबुलेंस के जरिये महज 12 मिनट में 14 किलोमीटर की दूरी को तय कर अस्पताल पहुंचाया था। इसमें एक युवती को नई जिंदगी मिली थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed