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संसद अपनी सुरक्षा करने में खुद समर्थ, प्रचार के लिए ना दाखिल करें पीआईएल: हाईकोर्ट
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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को संसद की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा कराने संबंधी जनहित याचिका (पीआईएल) खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि संसद की सुरक्षा का मामला सरकार और संसद स्वयं देखें, अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता राज सिंह से कहा, क्या आपको लगता है कि संसद अपनी सुरक्षा संभालने में असमर्थ है? हर कोई सिर्फ प्रचार के लिए पीआईएल दायर कर देता है। पीठ ने यह भी कहा कि अनुच्छेद 226 के तहत संसद की सुरक्षा समीक्षा का निर्देश नहीं दिया जा सकता, क्योंकि कोई असाधारण परिस्थिति नहीं है। याचिकाकर्ता जब संसदीय लोकतंत्र पर तर्क रखने लगे तो अदालत ने कहा, हमें आपके लेक्चर की जरूरत नहीं है।
याचिका में 2001 के संसद हमले व 2023 के सुरक्षा उल्लंघन का हवाला देते हुए सरकार व सचिवालयों को सुरक्षा तंत्र की समीक्षा का निर्देश देने की मांग की गई थी। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस तरह के मामलों में अदालत को नहीं घसीटा जाना चाहिए। ब्यूरो
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कोर्ट ने याचिकाकर्ता राज सिंह से कहा, क्या आपको लगता है कि संसद अपनी सुरक्षा संभालने में असमर्थ है? हर कोई सिर्फ प्रचार के लिए पीआईएल दायर कर देता है। पीठ ने यह भी कहा कि अनुच्छेद 226 के तहत संसद की सुरक्षा समीक्षा का निर्देश नहीं दिया जा सकता, क्योंकि कोई असाधारण परिस्थिति नहीं है। याचिकाकर्ता जब संसदीय लोकतंत्र पर तर्क रखने लगे तो अदालत ने कहा, हमें आपके लेक्चर की जरूरत नहीं है।
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याचिका में 2001 के संसद हमले व 2023 के सुरक्षा उल्लंघन का हवाला देते हुए सरकार व सचिवालयों को सुरक्षा तंत्र की समीक्षा का निर्देश देने की मांग की गई थी। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस तरह के मामलों में अदालत को नहीं घसीटा जाना चाहिए। ब्यूरो
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