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दिल्ली: बवाना के 3,164 फ्लैटों का होगा ऑडिट, मजबूती जांचने के बाद ही किया जाएगा आवंटन; देरी पर लगेगा जुर्माना
Thu, 29 Oct 2026 03:13 AM IST
दुष्यंत शर्मा
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 29 Oct 2026 03:13 AM IST
सार
दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) 233 ब्लॉकों में 2008 से 11 के बीच बनाए गए 3,164 फ्लैटों की मजबूती जांचेगा। इसके लिए एनडीटी, कोर कटिंग और कंप्रेसिव स्ट्रेंथ टेस्ट कराए जाएंगे।
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- फोटो : Freepik
विस्तार
बवाना में वर्षों से तैयार 3,164 औद्योगिक फ्लैटों में मजदूरों को बसाने की दिशा में डीएसआईआईडीसी ने स्ट्रक्चरल ऑडिट और जरूरी कानूनी मंजूरियां हासिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन मंजूरियों के आखिरी सत्यापन आईआईटी से कराए जाएंगे, इसके बाद मजदूरों को आशियाना आवंटित होगा। दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) 233 ब्लॉकों में 2008 से 11 के बीच बनाए गए 3,164 फ्लैटों की मजबूती जांचेगा। इसके लिए एनडीटी, कोर कटिंग और कंप्रेसिव स्ट्रेंथ टेस्ट कराए जाएंगे।
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खामियां मिलने पर इमारतों की मरम्मत और मजबूती बढ़ाने के उपाय होंगे। पूरी ऑडिट रिपोर्ट का आईआईटी या समकक्ष प्रमुख सरकारी तकनीकी संस्थान से सत्यापन होगा। साथ ही 120 दिन के भीतर ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट और जरूरी एनओसी हासिल की जाएगी। इन प्रक्रियाओं के पूरा होते ही फ्लैटों के आवंटन और मजदूरों को सुरक्षित आशियाना देने का रास्ता खुल जाएगा।
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सभी ब्लॉकों की मजबूती की होगी जांच
बवाना आवासीय परिसर में 92 ब्लॉक जी प्लस तीन और 141 ब्लॉक जी प्लस दो मंजिल के हैं। इमारतों की मजबूती जांचने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाएंगे। बिना इमारत को नुकसान पहुंचाए जांच होगी, वहीं कंक्रीट के छोटे नमूने निकालकर भी उनकी गुणवत्ता परखी जाएगी। इससे पता चलेगा कि इमारतें कितनी मजबूत हैं और उनमें मरम्मत की जरूरत कहां है। कहीं दरार या कमजोरी मिलने पर इंजीनियर उसे ठीक करने और इमारत को मजबूत बनाने की योजना तैयार करेंगे। इसमें मरम्मत पर आने वाला खर्च भी बताया जाएगा। पूरी जांच रिपोर्ट की आईआईटी या किसी अन्य प्रमुख सरकारी तकनीकी संस्थान से जांच कराई जाएगी।
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120 दिन में पूरी करनी होंगी औपचारिकताएं
फ्लैटों को आवंटित करने से पहले जरूरी वैधानिक मंजूरियां और ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट हासिल होंगे। परामर्श एजेंसी 120 दिन के भीतर एमसीडी, फायर, दिल्ली अर्बन आर्ट कमीशन, दिल्ली जलबोर्ड और डीडीए से संबंधित नक्शों, लेआउट और एनओसी हासिल करेगी। इससे फ्लैटों का कब्जा देने में कानूनी अड़चन नहीं आएगी।
दो श्रेणियों में बने हैं फ्लैट
ये फ्लैट औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले कम आय वाले श्रमिकों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं, ये दो श्रेणियों के हैं। टाइप-एक के 1,500 फ्लैटों का कारपेट एरिया 24.44 वर्ग मीटर है, जबकि टाइप-दो के 1,664 फ्लैटों का कारपेट एरिया 27.68 वर्ग मीटर है। लंबे समय से इन फ्लैटों के आवंटन की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों के लिए ऑडिट और मंजूरियों की प्रक्रिया अहम है।
देरी और लापरवाही पर जुर्माने का प्रावधान
डीएसआईआईडीसी ने काम में देरी करने पर एजेंसी के खिलाफ जुर्माने की शर्तें रखी हैं। 60 दिन से अधिक देरी होने पर हर महीने अनुबंध की कुल राशि का एक प्रतिशत जुर्माना लगाया जाएगा। यह जुर्माना अधिकतम कुल राशि के 10 प्रतिशत तक हो सकता है। वहीं, गलत जानकारी देने या फर्जी दस्तावेज जमा करने पर एजेंसी की जमा सुरक्षा राशि जब्त करने के साथ उसे दो साल तक सरकारी काम से बाहर किया जा सकता है।