फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Parents in Trouble Due to school distance for Nursery admission

नर्सरी दाखिला : दूरी के फेर में उलझे अभिभावक, इन तरीकों से तय हो रहा पड़ोस

Wed, 19 Dec 2018 05:25 AM IST
पूजा त्रिपाठी रश्मि शर्मा, नई दिल्ली
रश्मि शर्मा, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Wed, 19 Dec 2018 05:25 AM IST
विज्ञापन
Parents in Trouble Due to school distance for Nursery admission
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

निजी स्कूलों में नर्सरी में दाखिले की रेस में पड़ोस का मानक अभिभावकों के लिए चुनौती साबित हो रहा है। स्कूलों में दाखिले के लिए दूरी एक अहम मानक है। अभिभावक इसके फेर में ही उलझ गए हैं। दरअसल कई स्कूलों का घर से दूरी (पड़ोस) मापने का तरीका अलग-अलग है। कुछ स्कूल गूगल मैप, सैटेलाइट मैप से, कुछ बस रूट और कुछ कॉलोनी के आधार पर दूरी माप रहे हैं। इस कारण स्कूल से नजदीक रहने के बावजूद अभिभावक दूरी के अधिकतम अंकों से वंचित हो रहे हैं।

विज्ञापन


निजी स्कूलों ने दाखिला मानकों में पड़ोस (नेबरहुड) के लिए 20 से 80 तक अंक तय किए हैं। कुछ स्कूलों ने पड़ोस के लिए कॉलोनी का नाम मानक रखा है। यानी पड़ोस के मानक में स्कूल ने जो कॉलोनी शामिल की है, उसी के आधार पर बच्चे को अंक मिलेंगे। कई कॉलोनियां स्कूलों की सूची में नहीं हैं। अभिभावकों की परेशानी यह है कि स्कूल के पास रहने के बावजूद उनकी कॉलोनी मानक में शामिल नहीं है। 
विज्ञापन


कुछ कॉलोनी ऐसी हैं, जहां स्कूल से घर की दूरी कम है, लेकिन वहां बस रूट नहीं है। इससे दूरी का दायरा अधिक हो रहा है। ऐसे में अभिभावक अंकों से वंचित हो रहे हैं। कुछ स्कूल गूगल मैप से भी पड़ोस को माप रहे हैं। गूगल की माप में कुछ इलाकों की दूरी अधिक बताई जा रही है, जबकि वह स्कूल के पास है। अभिभावकों का कहना है कि सड़क से दूरी और गूगल मैप से दूरी अलग-अलग आती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम प्रमुख सुमित वोहरा का कहना है कुछ स्कूलों ने ऐसी कॉलोनी को मानक में शामिल किया है, जहां से चुनिंदा अभिभावकों को ही दाखिले का लाभ मिल सकता है। पड़ोस के अंक के लिए पारदर्शिता होनी चाहिए। शिक्षा निदेशालय को चाहिए कि अभिभावकों की परेशानी को समझते हुए स्थिति को स्पष्ट करे। वहीं, आधार कार्ड को लेकर भी शिक्षा निदेशालय ने अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं की है। स्कूल बच्चे का आधार कार्ड मांग रहे हैं, जबकि वह जरूरी नहीं है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed