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मलेरिया नाशक बीटीआई दवा की खरीद में एक करोड़ से ज्यादा का घपला
Thu, 24 Oct 2019 06:41 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अरुण कुमार, नई दिल्ली
अरुण कुमार, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 24 Oct 2019 06:41 AM IST
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दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के जन स्वास्थ्य विभाग में मलेरिया नाशक बीटीआई दवा की खरीद में एक करोड़ से ज्यादा का घपला होने का मामला प्रकाश में आया है। इसके साथ ही बीटीआई दवा को बिना टेंडर के खरीदकर एक निजी कंसलटेंसी को फायदा पहुंचाने का भी आरोप है। बीटीआई दवा का प्रयोग मलेरिया की रोकथाम के लिए नालियों में छिड़ककर किया जाता है।
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वर्ष 2017-18 में दक्षिणी दिल्ली के जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा 42,500 किलो बीटीआई दवा खरीदी गई। इस दवा की कीमत में बड़ी अनियमितता मिलने पर दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की नेता विपक्ष किशनवती ने जन स्वास्थ्य विभाग से इसका विस्तृत ब्योरा मांगा।
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दवा की खरीद में घोटाले का आरोप लगने के बाद जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई जानकारी में बताया गया कि दवा को 624.99 रुपये प्रति किलो के हिसाब से खरीदा गया था। इस दस्तावेज में जानकारी दी गई कि इस दवा की खरीद पर कुल 1,34,80,199 रुपये खर्च हुए।
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जन स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में दी गई जानकारी की जांच की गई तो दवा की कीमत में बड़ी गड़बड़ी सामने आई। जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा 624.99 रुपये प्रति किलो के हिसाब से 42,500 किलो दवाई खरीदी। इन तथ्यों के हिसाब से गणना करने पर पता लगा कि दवा पर 1,34,80,199 करोड़ रुपयों की बजाय 2,65,62,075 करोड़ रुपये का खर्चा हुआ। विपक्ष ने इस संबंध में जवाब मांगा कि अगर बीटीआई पर 1,34,80,199 करोड़ का खर्च हुआ, तो बाकी के 1,30,81,876 करोड़ रुपये कहां गए।
एसडीएमसी के जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई जानकारी में एक जगह पर वर्ष 2017-18 में खरीदी गई बीटीआई दवा की कीमत 658.47 रुपये प्रति किलो भी बताई गई। इस हिसाब से 42,500 किलो बीटीआई दवा की खरीद पर 2,79,84,975 करोड़ का खर्च हुआ, यानी इस गणना के हिसाब से भी एक करोड़ 45 लाख 4 हजार 776 की गड़बड़ी सामने आई।
इसके साथ ही विपक्ष का आरोप है कि बीटीआई दवा को बिना टेंडर दिए एक निजी कंसलटेंसी के जरिये खरीदा गया, जिस पर 34 लाख से ज्यादा खर्च भी अवैध रूप से किया गया।
स्थायी समिति के अध्यक्ष ने 30 तक मांगी जांच रिपोर्ट
इस मामले में स्थायी समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जांच के आदेश दे दिए गए हैं और इस संबंध में 30 अक्तूबर तक रिपोर्ट मांगी गई है। उन्होंने कहा कि अगर इस मामले में लगे आरोप सही साबित होते हैं, तो आरोपी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।